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रोज़ सनस्क्रीन लगाने पर भी Tan क्यों? Pitta Skin Type समझें

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

कई बार ऐसा होता है कि हम घर से निकलने से पहले खूब सारा सनस्क्रीन लगाते हैं, लेकिन फिर भी कुछ ही दिनों में चेहरा टैन (काला) होने लगता है। ऐसे में पहला खयाल यही आता है कि या तो हमारी सनस्क्रीन किसी काम की नहीं है, या फिर धूप ही कुछ ज़्यादा तेज़़ है। लेकिन सच बताऊं? इसका सीधा कनेक्शन सिर्फ बाहर की धूप से नहीं होता।

कई बार हमारी स्किन अंदर से इतनी नाज़ुक और सेंसिटिव हो चुकी होती है कि वो हल्की सी धूप को भी बर्दाश्त नहीं कर पाती। अगर धूप में जाते ही आपका चेहरा एकदम लाल हो जाता है, जलन मचने लगती है या तुरंत काला पड़ने लगता है, तो समझ लीजिए कि आपकी स्किन शरीर की अंदरूनी गर्मी पर रिएक्ट कर रही है। मतलब, सारी गलती बाहर की धूप की नहीं है; दिक्कत आपके शरीर के अंदर के बैलेंस (जैसे बढ़ा हुआ पित्त या गर्मी) से भी जुड़ी है। जब शरीर के अंदर की यही गर्मी और स्किन का नाज़ुकपन आपस में टकराते हैं, तो टैनिंग बहुत तेज़़ी से होने लगती है।

आखिर ये टैनिंग होती क्या है?

हम अक्सर टैनिंग को एक विलेन मान लेते हैं, लेकिन अगर आप अपने शरीर के नज़रिए से देखें, तो यह उसका अपना 'सिक्योरिटी गार्ड' है। जब चिलचिलाती धूप सीधे आपकी स्किन पर पड़ती है, तो शरीर खुद को झुलसने और डैमेज से बचाने के लिए एक खास तरह का पिगमेंट (रंग) बनाने लगता है।

इसी कोशिश में स्किन के अंदर 'मेलानिन' नाम का तत्व बढ़ने लगता है। आप इस मेलानिन को अपनी स्किन की एक 'छतरी' समझ सकते हैं, जो सूरज की खतरनाक किरणों को अंदर घुसने से रोकती है। इसी छतरी की वजह से हमारी स्किन बाहर से गहरी या काली दिखने लगती है। आसान भाषा में समझें तो, जो टैनिंग हमें शीशे में देखकर इतनी बुरी लगती है, वो असल में आपके शरीर की आपको बचाने की ही एक प्यारी सी कोशिश है।

सनस्क्रीन लगाने में हमसे कहाँ चूक हो जाती है?

सनस्क्रीन बेशक आपकी स्किन की एक अच्छी दोस्त है, लेकिन ये कोई ऐसा जादुई कवच नहीं है कि सुबह एक बार लगा लिया और दिनभर के लिए टेंशन खत्म! अगर इसे लगाने का तरीका ही गलत है, तो ये किसी काम की नहीं रहेगी। हम अक्सर ये छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं:

  • बहुत कम लगाना: ज़्यादातर लोग सनस्क्रीन को किसी नॉर्मल मॉइस्चराइजर की तरह जरा सा लेते हैं और चेहरे पर मल लेते हैं। इतने से अमाउंट में स्किन पूरी तरह से कवर ही नहीं हो पाती और धूप अपना काम कर जाती है।
  • दोबारा न लगाना (Re-apply न करना): ये हम में से 90% लोगों की सबसे बड़ी गलती है! एक बार लगाई गई सनस्क्रीन पूरा दिन नहीं टिकती। पसीने, धूप और वक्त के साथ इसका असर खत्म होने लगता है। इसलिए हर 2 से 3 घंटे में इसे दोबारा लगाना बहुत ज़रूरी है।
  • गलत SPF चुनना: हर मौसम और स्किन टाइप के लिए अलग SPF बना है। अब चिलचिलाती दोपहर की धूप में आप कोई बहुत कम SPF वाला लोशन लगाकर निकलेंगे, तो वो आपको कैसे ही बचा पाएगा?
  • सिर्फ बाहर की क्रीम्स के भरोसे रहना: आयुर्वेद बहुत साफ कहता है कि अगर शरीर के अंदर पित्त (गर्मी) बढ़ा हुआ है, तो सिर्फ चेहरे पर महंगी क्रीम्स पोतने से बात नहीं बनेगी। अंदर की वो गर्मी स्किन को बहुत जल्दी डैमेज करती है।

इसलिए सिर्फ बाहरी बचाव के भरोसे रहने के बजाय, शरीर को अंदर और बाहर, दोनों तरफ से बैलेंस रखना ज़रूरी है।

SPF, PA और इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करने का तरीका

दुकान पर जाकर सनस्क्रीन खरीदते वक्त सिर्फ उसका ब्रांड या उसकी खुशबू पर मत जाइए। बोतल के पीछे लिखे 'SPF' और 'PA' का क्या मतलब है, यह जानना आपके लिए बहुत काम का है। 

  • SPF का क्या काम है: सूरज की जो किरणें आपकी स्किन को ऊपर से जलाती हैं और टैनिंग (वो काली परत) पैदा करती हैं, SPF आपको ठीक उन्हीं से बचाता है।
  • PA क्या करता है: सूरज की कुछ किरणें बहुत ढीठ होती हैं। वो स्किन के एकदम अंदर तक घुसकर झुर्रियां और वक्त से पहले बुढ़ापा लाती हैं। PA आपको इन छुपकर वार करने वाली किरणों से बचाता है। (जिस सनस्क्रीन पर जितने ज़्यादा +++ के निशान होंगे, वो उतनी ही बेहतर होगी।)
  • दोनों का होना क्यों ज़रूरी है? मान लीजिए आपने ऐसी क्रीम ली जिसमें सिर्फ SPF है, PA नहीं। तो टैनिंग से तो आप बच जाएंगे, लेकिन अंदरूनी डैमेज का क्या? इसलिए हमेशा 'Broad Spectrum' वाली सनस्क्रीन खरीदें, जिसमें ये दोनों एक साथ मौजूद हों।
  • सही मात्रा (Quantity): इसे ऐसे समझिए कि तेज़ बारिश में एक टूटा या छोटा छाता आपको भीगने से कैसे बचाएगा? बिल्कुल वैसे ही, ज़रा-सी सनस्क्रीन आपको टैनिंग से नहीं बचा सकती। इसे अपने पूरे चेहरे, कानों और गर्दन पर अच्छी खासी मात्रा में लगाएं।
  • हर 2-3 घंटे वाला नियम: अगर आप घर से बाहर हैं और धूप में आपका आना-जाना लगा हुआ है, तो हर दो से तीन घंटे में सनस्क्रीन को दोबारा लगाना अपनी आदत बना लें।

मतलब साफ है, एक अच्छी सनस्क्रीन खरीदना जितना ज़रूरी है, उसे सही तरीके से लगाना उससे भी कहीं ज़्यादा ज़रूरी है।

वो गलतियां जो टैनिंग को बढ़ा देती हैं

जाने-अनजाने में हम अपनी स्किन के साथ कुछ ऐसा कर बैठते हैं, जो उसे और कमजोर बना देता है:

  • बार-बार चेहरा धोते रहना: अगर आपको दिन में कई बार फेस वाश से चेहरा धोने की आदत है, तो इसे आज ही बदल दीजिए। इससे स्किन का सारा कुदरती तेल (Natural Oils) खिंच जाता है और वो धूप के आगे एकदम बेबस हो जाती है।
  • हार्ड (तेज़़) केमिकल्स का इस्तेमाल: बहुत ज़्यादा खुशबू वाले या तेज़़ केमिकल वाले स्किनकेयर प्रोडक्ट्स स्किन को अंदर से चिड़चिड़ा (इरिटेट) कर देते हैं। इससे वो धूप को लेकर और ज़्यादा सेंसिटिव हो जाती है।
  • चेहरे को हद से ज़्यादा रगड़ना (Over-exfoliation): रोज़़ाना या हर दूसरे दिन स्क्रब करने से स्किन की सबसे ऊपरी सुरक्षा परत छिलकर पतली हो जाती है। अब खुद सोचिए, ऐसी बिना ढाल वाली स्किन पर धूप कितनी सीधी और गहरी मार करेगी!

जब हमारी इन्हीं आदतों की वजह से स्किन की अपनी कुदरती ढाल (Natural Barrier) टूट जाती है, तो फिर थोड़ी सी धूप भी भयंकर टैनिंग और जलन का कारण बन जाती है।

क्या होती है 'पित्त' (Pitta) स्किन टाइप?

आयुर्वेद की भाषा में समझें, तो पित्त स्किन वो है जिसके अंदर कुदरती तौर पर 'गर्मी' और 'तेज़़' ज़्यादा होता है। यह स्किन बहुत ही 'इम्पेशेंट' (जल्दी रिएक्ट करने वाली) होती है। जरा-सी धूप लगी नहीं कि चेहरा लाल हो गया या जलन होने लगी।

ऐसी स्किन दिखने में तो बहुत ग्लोइंग और साफ होती है, लेकिन अंदर से बहुत नाजुक होती है। इसे गलत क्रीम, गर्मी या धूप से बहुत जल्दी चिढ़ मचती है। इसे थोड़ी एक्स्ट्रा केयर और अंदरूनी ठंडक की जरूरत होती है।

पित्त स्किन आखिर इतनी जल्दी टैन क्यों होती है?

आयुर्वेद कहता है कि पित्त के अंदर 'उष्ण' (गर्मी) और 'तीक्ष्ण' (तेज़) गुण होते हैं। जब शरीर का पित्त बढ़ता है, तो स्किन भी गर्म और सेंसिटिव हो जाती है। ऐसी स्किन धूप में बहुत जल्दी टैन होती है, इसके मुख्य कारण हैं:

  • डबल गर्मी का अटैक: पित्त स्किन के अंदर तो गर्मी है ही, ऊपर से जब सूरज की गर्मी पड़ती है, तो स्किन एकदम से झुलसने लगती है।
  • मेलानिन की स्पीड: शरीर खुद को बचाने के लिए जो पिगमेंट (मेलानिन) बनाता है, वो पित्त स्किन में बहुत तेज़ी से बनता है, जिससे रंग जल्दी गहरा हो जाता है।
  • ओवर-रिएक्ट करना: पित्त का स्वभाव ही उग्र (तेज़) है, इसलिए यह छोटी सी बात (हल्की धूप) पर भी बहुत बड़ा रिएक्शन (टैनिंग और जलन) देता है।

आयुर्वेद का नजरिया: धूप और पित्त का क्या कनेक्शन है? 

सूरज हमारे शरीर में 'पित्त' (यानी गर्मी) भड़काने का सबसे बड़ा कुदरती जरिया है। आपने खुद भी यह महसूस किया होगा जैसे-जैसे दिन चढ़ता है और धूप चुभने लगती है, हमारे शरीर के भीतर की गर्मी भी बढ़ने लगती है। फिर जब दोपहर को सूरज बिल्कुल सिर के ऊपर आ जाता है, तब हमारा पित्त भी उफान पर होता है।

यही कारण है कि जिन लोगों की तासीर पहले से गर्म (पित्त प्रकृति) होती है, दोपहर की धूप उन्हें फौरन झुलसा देती है। उनका चेहरा एकदम लाल या तेज़ी से टैन हो जाता है। इसलिए, मेरी यही सलाह है कि इस चिलचिलाती धूप में बाहर निकलने से हमेशा बचें।

आयुर्वेद टैनिंग और 'पित्त' वाली स्किन को ठीक कैसे करता है?

आयुर्वेद टैनिंग को सिर्फ रंग गहरा होने या खूबसूरती छिन जाने वाली प्रॉब्लम नहीं मानता। अगर आपकी स्किन डार्क हो रही है, तो इसका सीधा सा मतलब है कि आपके शरीर के भीतर बेतहाशा गर्मी (पित्त) बढ़ गई है और यह उसी का असर है जो बाहर दिख रहा है।

  • पित्त को शांत करना (Cooling Effect): हमारी सबसे पहली और जरूरी कोशिश यही होती है कि किसी तरह इस भड़की हुई गर्मी को शांत किया जाए। सही खान-पान और चुनिंदा जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल से हम शरीर को अंदर से एक गहरी ठंडक देते हैं।
  • खून की सफाई (Blood Purification): स्किन की कोई भी दिक्कत हो, उसका सीधा कनेक्शन हमारे खून से होता है। अगर खून साफ और अंदर से डिटॉक्स हो जाए, तो टैनिंग अपने आप खत्म हो जाती है और चेहरे पर एक ऐसा कुदरती निखार आता है जिसे किसी बाहरी मेकअप की जरूरत नहीं पड़ती।
  • पेट (पाचन) दुरुस्त करना: आपको पता है, सारा खेल आपके पेट से ही शुरू होता है। अगर आपका पाचन फर्स्ट क्लास है, तो शरीर में न तो फालतू गर्मी बनेगी और न ही कोई टॉक्सिन्स (गंदगी) जमा होंगे। इसका सबसे बेहतरीन और सीधा फायदा आपकी स्किन को ही मिलता है।

टैनिंग और पित्त स्किन के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां

हम कभी भी रातों-रात गोरा बनाने वाले झूठे दावों या बाहरी क्रीम्स पर यकीन नहीं करते। इसकी जगह, हमारा पूरा भरोसा उन जड़ी-बूटियों पर होता है जो जड़ पर काम करके शरीर को अंदर से मज़बूत बनाती हैं:

  • मंजिष्ठा: जब बात खून को साफ करने और जिद्दी टैनिंग या पुराने दाग-धब्बों को हमेशा के लिए मिटाने की आती है, तो सच मानिए मंजिष्ठा का कोई मुकाबला नहीं है।
  • नीम: यह स्किन की उस तेज़ जलन, लाली और खुजली को तुरंत शांत कर देता है और चेहरे को अंदर से बिल्कुल साफ और हेल्दी रखता है।
  • आंवला और गिलोय: जब ये दोनों मिलते हैं, तो शरीर के अंदर की फालतू गर्मी को जड़ से उखाड़ फेंकते हैं। साथ ही, स्किन को अंदर से भरपूर पोषण और वो जरूरी ठंडक देते हैं जिसकी उसे सबसे ज़्यादा दरकार है।

धूप से झुलसी स्किन को सुकून देने वाली आयुर्वेदिक थेरेपीज़

सिर्फ खाने वाली दवाएं ही नहीं, आयुर्वेद में कुछ बहुत ही शानदार बाहरी पंचकर्म थेरेपीज़ भी मौजूद हैं। धूप में झुलसी और भट्टी की तरह तप रही स्किन को ये तुरंत राहत देती हैं:

  • अभ्यंग (मसाज): जब शरीर को ठंडक पहुंचाने वाले खास आयुर्वेदिक तेलों से मसाज की जाती है, तो ऐसा लगता है जैसे स्किन के अंदर फंसी हुई सारी गर्मी बाहर निकल गई हो।
  • शिरोधारा: जब माथे पर एक लय में लगातार औषधीय तेल गिरता है, तो आपका पूरा शरीर और दिमाग एकदम रिलैक्स हो जाता है। इससे होता यह है कि बढ़ा हुआ पित्त खुद-ब-खुद कंट्रोल में आ जाता है।
  • हर्बल लेप (फेस पैक): असली चंदन और मुल्तानी मिट्टी जैसी ठंडी तासीर वाली चीजों से तैयार लेप लगाने से स्किन की टैनिंग बहुत तेज़ी से कटती है। इसे लगाते ही जलन में जो आराम मिलता है, उसे बस महसूस किया जा सकता है।

डाइट का रोल: क्या खाएं और क्या नहीं?

चेहरे पर महंगे प्रोडक्ट्स पोतने से कहीं ज़्यादा यह मायने रखता है कि आप अपने शरीर को अंदर से खुराक क्या दे रहे हैं:

  • क्या खाएं: पानी वाले ताजे फल (जैसे तरबूज, खीरा, पपीता), नारियल पानी और हरी सब्जियां अपनी डाइट में जमकर शामिल करें। खाने में थोड़ा सा शुद्ध देसी घी जरूर लें, क्योंकि यह भड़के हुए पित्त को शांत करने का सबसे बढ़िया तरीका है। कोशिश करें कि हमेशा घर का बना सादा और हल्का खाना ही खाएं।
  • क्या न खाएं: ज़्यादा मिर्च-मसाले, बहुत तला-भुना, जरूरत से ज़्यादा खट्टा, हद से ज़्यादा चाय-कॉफी और बाहर का जंक फूड आज ही बंद कर दें। ये सारी चीजें आपकी स्किन की गर्मी को और भड़काने का काम ही करती हैं।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम अमेय है। मुझे पीठ पर रैशेज के साथ स्किन से जुड़ी समस्याएँ हो गई थीं, जिनमें फंगल इंफेक्शन, खुजली और जलन की परेशानी शामिल थी। मैंने जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया, जहाँ डॉक्टरों ने मेरी समस्या को समझकर मेरे लिए पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट पैक तैयार किया। साथ ही मुझे जीवा बेसिल सोप के उपयोग की सलाह दी गई। इसके अलावा एक कस्टमाइज्ड डाइट प्लान भी दिया गया, जिससे मेरी स्किन कंडीशन में काफी सुधार हुआ। परिणाम बहुत अच्छे रहे और मुझे काफी राहत मिली।

डॉक्टर से कब मिलें?

वैसे तो टैनिंग नॉर्मल है, लेकिन अगर:

  • हल्की धूप में भी स्किन तुरंत काली पड़ जाए।
  • धूप से आते ही स्किन में भयंकर जलन या लालिमा आ जाए जो जाए ही ना।
  • चेहरे पर कहीं रंग बहुत गहरा और कहीं हल्का (पैचेस) दिखने लगे।
  • घरेलू नुस्खों से भी टैनिंग टस से मस न हो।

निष्कर्ष

टैनिंग को सिर्फ धूप का अटैक मानना गलत है; यह शरीर के अंदर बढ़ रही गर्मी का एक 'अलर्ट' भी हो सकता है। आज की क्रीम्स शायद आपको कुछ दिन के लिए गोरा कर दें, लेकिन आयुर्वेद इस परेशानी को पित्त के बैलेंस से जोड़कर जड़ से खत्म करता है। जब आप अपने खाने-पीने और शरीर की गर्मी को बैलेंस कर लेते हैं, तो आपकी स्किन खुद-ब-खुद साफ, शांत और चमकदार हो जाती है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, ऐसा अक्सर होता है। अगर सनस्क्रीन सही मात्रा में न लगाया जाए, समय पर दोबारा न लगाया जाए या त्वचा बहुत sensitive हो, तो टैनिंग हो सकती है। साथ ही अगर शरीर में गर्मी ज्यादा हो, तो बाहरी सुरक्षा अकेले काफी नहीं होती। इसलिए अंदर और बाहर दोनों का ध्यान रखना जरूरी है।

हाँ, पित्त स्किन में गर्मी और sensitivity ज्यादा होती है, इसलिए यह धूप में जल्दी react करती है। हल्की धूप में भी रंग जल्दी गहरा हो सकता है। यही वजह है कि इस तरह की त्वचा को ज्यादा care की जरूरत होती है।

नहीं, टैनिंग स्थायी नहीं होती। सही देखभाल, समय और संतुलन के साथ त्वचा धीरे-धीरे अपनी प्राकृतिक रंगत में लौट सकती है। लेकिन अगर बार-बार धूप का असर होता रहे, तो यह लंबे समय तक बनी रह सकती है।

नहीं, इससे उल्टा नुकसान हो सकता है। ज्यादा face wash करने से त्वचा की natural layer कमजोर हो जाती है, जिससे धूप का असर और तेज हो सकता है। संतुलन बनाकर देखभाल करना जरूरी है।

 कुछ हल्के घरेलू उपाय त्वचा को शांत करने और ठंडक देने में मदद कर सकते हैं। लेकिन अगर टैनिंग ज्यादा हो या बार-बार हो रही हो, तो सिर्फ घरेलू उपाय काफी नहीं होते। अंदर का संतुलन भी जरूरी है।

मुख्य कारण धूप ही है, लेकिन यह पूरी कहानी नहीं है। शरीर की अंदरूनी गर्मी, पाचन और स्किन का स्वभाव भी इसमें भूमिका निभाते हैं। इसलिए हर व्यक्ति में इसका असर अलग होता है।

 हल्का एक्सफोलिएशन मदद कर सकता है, लेकिन ज्यादा करने से त्वचा पतली और sensitive हो जाती है। इससे धूप का असर और बढ़ सकता है। इसलिए संतुलित तरीके से करना जरूरी है।

 पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है और त्वचा को स्वस्थ बनाने में मदद करता है। इससे सीधे टैनिंग खत्म नहीं होती, लेकिन त्वचा की recovery बेहतर होती है और असर जल्दी कम हो सकता है।

हाँ, जब शरीर की गर्मी संतुलित होती है, तो त्वचा कम react करती है। इससे टैनिंग की गति और असर दोनों कम हो सकते हैं। यह अंदर से सुधार का तरीका है।

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