Diseases Search
Close Button
 
 

रोज Acidity की दवा लेने के बाद भी समस्या क्यों लौट आती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan

दवाएं भी बेअसर? जानिए क्यों बार-बार लौटती है एसिडिटी और कैसे पाएं स्थायी छुटकारा

पेट में उठने वाली वह खट्टी लहर और सीने में महसूस होने वाली सुलगती आग—जिसे हम अक्सर 'मामूली एसिडिटी' कहकर एक गुलाबी टैबलेट या जेल के पीछे छिपा देते हैं—दरअसल आपके पाचन तंत्र का एक गंभीर "SOS" सिग्नल है। जब आप हर सुबह खाली पेट एसिडिटी की दवा (Antacids या PPIs) लेने के अभ्यस्त हो जाते हैं, तो आप अपनी समस्या को ठीक नहीं कर रहे, बल्कि उसे एक खतरनाक मोड़ की ओर धकेल रहे हैं। एसिडिटी को लंबे समय तक दबाना भविष्य में भोजन नली के कैंसर या अल्सर जैसी डरावनी स्थितियों का आमंत्रण हो सकता है। अब समय आ गया है कि हम लक्षणों के बजाय समाधान पर ध्यान दें।

क्या है यह 'अम्लपित्त' या एसिडिटी

चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे GERD (Gastroesophageal Reflux Disease) कहा जाता है। सरल शब्दों में, हमारे पेट में एक शक्तिशाली एसिड होता है जिसे 'हाइड्रोक्लोरिक एसिड' कहते हैं। इसका काम भोजन को तोड़ना और कीटाणुओं को मारना है। लेकिन जब हमारे पेट और भोजन नली (Food Pipe) के बीच का दरवाजा, जिसे LES (Lower Esophageal Sphincter) कहते हैं, ठीक से बंद नहीं होता, तो यह एसिड ऊपर की तरफ भागने लगता है। यही वह समय है जब आपको सीने में जलन और गले में खटास महसूस होती है।

एसिडिटी के मुखौटे: इसके विभिन्न प्रकार

एसिडिटी हर व्यक्ति में अलग तरह से व्यवहार करती है:

  • एक्यूट एसिडिटी (Acute Acidity): यह अस्थायी होती है। शादी-पार्टी में ज्यादा खा लेना या देर रात तक जागने के बाद अगले दिन होने वाली जलन।
  • क्रोनिक या जीईआरडी (GERD): जब एसिडिटी हफ्ते में 2-3 बार से ज्यादा हो और सालों तक बनी रहे। यह अन्नप्रणाली की दीवारों को स्थायी रूप से छील देती है।
  • साइलेंट रिफ्लक्स (LPR): इसमें सीने में जलन नहीं होती, लेकिन एसिड गले तक पहुंच जाता है, जिससे पुरानी खांसी, गले में खराश या आवाज का भारीपन बना रहता है।

शरीर की ये पुकार नजरअंदाज न करें (Signs & Symptoms)

एसिडिटी केवल पेट तक सीमित नहीं रहती, इसके लक्षण शरीर के अन्य हिस्सों में भी दिखते हैं:

  • छाती के बीचों-बीच तेज जलन: जो अक्सर खाना खाने के बाद या लेटने पर बढ़ जाती है।
  • रीगर्जेटेशन (Regurgitation): गले या मुंह में खट्टा या कड़वा तरल महसूस होना।
  • रात की सूखी खांसी: बार-बार गले को साफ करने की इच्छा होना।
  • निगलने में कठिनाई: ऐसा लगना कि खाना गले में अटक गया है।
  • पेट फूलना (Bloating): खाना खाने के तुरंत बाद पेट का गुब्बारे जैसा फूल जाना।

क्यों नहीं काम कर रही आपकी दवा? (Major Causes)

अगर दवा के बाद भी समस्या लौट रही है, तो कारण नीचे छिपे हो सकते हैं:

  • खराब 'वॉल्व' (Weak LES): दवाएं एसिड कम कर सकती हैं, लेकिन वे उस कमजोर मांसपेशी को ठीक नहीं करतीं जो एसिड को ऊपर आने से रोकती है।
  • हियाटल हर्निया (Hiatal Hernia): पेट का एक हिस्सा डायफ्राम के ऊपर खिसक जाना, जिससे एसिड रिफ्लक्स आसान हो जाता है।
  • पाचन की धीमी गति (Gastroparesis): जब पेट से खाना छोटी आंत में जाने में बहुत समय लेता है, तो वह सड़ने लगता है और एसिड बनाता है।
  • अत्यधिक तनाव (The Brain-Gut Connection): तनाव आपके पेट की सुरक्षा परत को कमजोर कर देता है।

जोखिम और जटिलताएं: एक गंभीर चेतावनी (Risk Factors & Complications)

जोखिम कारक (Risk Factors)

संभावित जटिलताएं (Complications if untreated)

मोटापा: पेट का बढ़ा हुआ घेरा अंदरूनी अंगों पर दबाव डालता है।

Barrett’s Esophagus: अन्नप्रणाली की कोशिकाओं का बदलना, जो कैंसर का पूर्व संकेत है।

धूम्रपान: निकोटीन पेट के वॉल्व (LES) को ढीला कर देता है।

Peptic Ulcers: पेट या आंतों में गहरे और दर्दनाक घाव हो जाना।

देर रात का भोजन: खाना खाते ही सो जाने से एसिड को वापस आने का रास्ता मिल जाता है।

Strictures: बार-बार जलने से नली में घाव के निशान (Scars) पड़ना, जिससे रास्ता संकरा हो जाता है।

कैफीन और सोडा: चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक एसिड उत्पादन को 3 गुना बढ़ा देते हैं।

Aspiration Pneumonia: एसिड का फेफड़ों में चले जाना, जिससे सांस की गंभीर बीमारी हो सकती है।

आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद में जांच (Diagnosis)

आधुनिक जांच (Modern Medical Diagnosis)

  • Upper Endoscopy: एक छोटे कैमरे द्वारा भोजन नली और आमाशय की प्रत्यक्ष जांच।
  • pH Probe Study: 24-48 घंटों तक यह मापना कि पेट में एसिड का स्तर क्या रहता है।
  • Manometry: यह जांचना कि आपकी भोजन नली की मांसपेशियां कितनी ताकत से काम कर रही हैं।

आयुर्वेद का नजरिया (Ayurvedic Diagnosis)

  • अम्लपित्त परीक्षण: आयुर्वेद इसे शरीर में 'पित्त' दोष की अधिकता मानता है।
  • अग्नि मंदता (Weak Digestion): इसमें देखा जाता है कि आपकी 'पाचन अग्नि' कितनी कमजोर है। उपचार केवल एसिड कम करने का नहीं, बल्कि अग्नि को संतुलित करने का होता है।

आयुर्वेद की दृष्टि में अम्लपित्त: सिर्फ जलन नहीं, दोषों का असंतुलन

आयुर्वेद में एसिडिटी को 'अम्लपित्त' कहा जाता है। यह केवल पेट की खराबी नहीं है, बल्कि शरीर की आंतरिक ऊर्जा में असंतुलन का संकेत है।

  • दोष असंतुलन: मुख्य रूप से यह 'पित्त दोष' के बढ़ने के कारण होता है। जब पित्त की अम्लता (Acidity) और तीक्ष्णता (Sharpness) बढ़ जाती है, तो वह पूरे पाचन तंत्र को प्रभावित करता है।
  • मूल कारण (Root Cause): आयुर्वेद के अनुसार, इसका मुख्य कारण 'अग्निमांद्य' (कमजोर पाचन अग्नि) है। जब भोजन पूरी तरह नहीं पचता, तो वह पेट में सड़ने लगता है और 'आम' (विषाक्त पदार्थ) पैदा करता है, जो आगे चलकर खट्टेपन और जलन का रूप ले लेता है।
  • मानसिक संबंध: अत्यधिक क्रोध, ईर्ष्या और मानसिक तनाव भी पित्त को बढ़ाते हैं, जिससे दवा खाने के बाद भी एसिडिटी ठीक नहीं होती।

जीवा आयुर्वेद का विशेष उपचार दृष्टिकोण: जड़ से समाधान

जीवा आयुर्वेद में हम केवल लक्षणों को नहीं दबाते, बल्कि बीमारी की जड़ तक पहुँचते हैं। हमारा दृष्टिकोण 'Personalised Care' पर आधारित है:

  • प्रकृति विश्लेषण: हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट (Vata, Pitta, Kapha) अलग होती है। हम पहले यह समझते हैं कि आपकी एसिडिटी का कारण पित्त है या वात-पित्त का मिश्रण।
  • अग्नि का उपचार: हम ऐसी औषधियां देते हैं जो आपकी पाचन अग्नि को संतुलित करें ताकि भोजन सही से पचे और एसिड बने ही नहीं।
  • विषाक्त पदार्थों की सफाई: जीवा का उद्देश्य शरीर में जमा 'आम' (Toxins) को बाहर निकालना है, जिससे बार-बार दवा लेने की जरूरत खत्म हो जाए।

प्रकृति का खजाना: एसिडिटी के लिए अचूक जड़ी-बूटियां

आयुर्वेद में ऐसी औषधियां हैं जो पेट की दीवार को सुरक्षा प्रदान करती हैं और एसिड को प्राकृतिक रूप से शांत करती हैं:

  • आंवला (Amalaki): यह पित्त के लिए सबसे उत्तम औषधि है। यह पेट की जलन को शांत करता है और विटामिन C से भरपूर होने के कारण अंदरूनी घावों को भरता है।
  • यष्टिमधु (Mulethi): यह भोजन नली के चारों ओर एक सुरक्षा कवच (Protective layer) बना देती है, जिससे एसिड का असर नहीं होता।
  • शतावरी: यह पेट के अल्सर को रोकने और एसिड के स्राव को नियंत्रित करने में सहायक है।
  • सौंफ (Fennel): यह पाचन को सुधारती है और पेट की मांसपेशियों को आराम देकर गैस और अफारा कम करती है।

पंचकर्म और आयुर्वेदिक थैरेपी: शरीर का शुद्धिकरण

जब समस्या पुरानी (Chronic) हो जाती है, तो केवल दवाएं काफी नहीं होतीं। यहाँ विशेष थैरेपी काम आती हैं:

  • वमन (Virechana): यह पंचकर्म की एक मुख्य प्रक्रिया है जिसमें शरीर से अतिरिक्त पित्त को बाहर निकाला जाता है। यह एसिडिटी के लिए 'गोल्ड स्टैंडर्ड' इलाज माना जाता है।
  • तक्र धारा: ठंडी छाछ (Buttermilk) का सिर पर प्रवाह करना, जो मानसिक तनाव को कम कर पित्त को शांत करता है।
  • बस्ती (Medicated Enema): यदि एसिडिटी के साथ कब्ज की समस्या है, तो बस्ती क्रिया शरीर की पूरी सफाई कर देती है।

खान-पान का अनुशासन: क्या खाएं और क्या बचाएं (Diet Table)

क्या खाएं (Recommended Foods)

क्या न खाएं (Foods to Avoid)

ठंडा दूध: हल्का मीठा दूध (यदि लैक्टोज से एलर्जी न हो) पित्त शांत करता है।

खट्टे फल: नींबू, संतरा, और अंगूर का अधिक सेवन।

नारियल पानी: यह प्राकृतिक रूप से क्षारीय (Alkaline) होता है।

मिर्च-मसाले: लाल मिर्च, गरम मसाला और तला-भुना खाना।

पेठा (Ash Gourd): इसका जूस एसिडिटी के लिए अमृत समान है।

चाय और कॉफी: ये पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ा देते हैं।

पुराने चावल और मूंग दाल: ये सुपाच्य और ठंडे स्वभाव के होते हैं।

सिरका और फर्मेंटेड फूड: पिज्जा, बर्गर, अचार और ब्रेड।

जीवा आयुर्वेद में रोगियों का आकलन: हम आपको कैसे समझते हैं?

जीवा में, हम जानते हैं कि दो व्यक्तियों की एसिडिटी एक जैसी नहीं होती। हमारी परामर्श प्रक्रिया एक 'जासूसी जांच' की तरह है, जहाँ हम बीमारी के पीछे छिपे असली अपराधी को ढूंढते हैं:

  • प्रकृति विश्लेषण (Ayurvedic DNA): हमारे डॉक्टर यह निर्धारित करते हैं कि आपकी मूल प्रकृति (Vata, Pitta, Kapha) क्या है। यदि आपकी प्रकृति 'पित्त' प्रधान है, तो आपको एसिडिटी होने की संभावना दूसरों से अधिक है।
  • नाड़ी परीक्षा (Pulse Diagnosis): यह एक प्राचीन तकनीक है जहाँ डॉक्टर आपकी कलाई की नब्ज से शरीर के आंतरिक असंतुलन को पढ़ते हैं। इससे यह पता चलता है कि कौन सा अंग (जैसे लिवर या पेट) पित्त से सबसे ज्यादा प्रभावित है।
  • गहन केस हिस्ट्री: हम केवल आपके पेट के बारे में नहीं पूछते, बल्कि आपकी नींद, आपके काम का तनाव और आपके पारिवारिक स्वास्थ्य के बारे में भी बात करते हैं।

हमारे मरीज़ों की देखभाल की चरण-दर-चरण प्रक्रिया:

कॉल की उम्मीद करें: अपनी संपर्क जानकारी जमा करें, या आप हमें 0129 4264323 पर कॉल भी कर सकते हैं।

अपॉइंटमेंट की पुष्टि।

आप अपॉइंटमेंट तय कर सकते हैं और हमारे आयुर्वेदिक विशेषज्ञों से सलाह लेने के लिए हमारे क्लिनिक आ सकते हैं।

अगर आपको अपने आस-पास हमारा क्लिनिक नहीं मिल रहा है, तो आप 0129 4264323 पर ऑनलाइन सलाह भी ले सकते हैं। इसकी कीमत सिर्फ़ 49 रुपये (नियमित कीमत 299 रुपये) है और आप घर बैठे ही हमारे डॉक्टरों से सलाह ले सकते हैं।

विस्तृत जाँच

जीवा डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य समस्या की असली वजह जानने के लिए पूरी और विस्तृत जाँच करेंगे।

असली वजह पर आधारित इलाज

जीवा डॉक्टर लक्षणों और असली वजह को ठीक करने के लिए बहुत असरदार, प्राकृतिक और आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल करके आपके लिए खास इलाज सुझाएँगे।

स्वास्थ्य लाभ की समयसीमा (Healing Timeline)

आयुर्वेद जादुई छड़ी नहीं है, बल्कि एक स्थायी समाधान है:

  • प्रथम चरण (1-15 दिन): आपको एसिडिटी की तीव्रता में कमी महसूस होगी। रात की नींद बेहतर होने लगेगी।
  • द्वितीय चरण (1-3 महीने): पेट फूलना (Bloating) और भारीपन कम हो जाएगा। आपकी पाचन शक्ति (Agni) मजबूत होने लगेगी।
  • तृतीय चरण (3-6 महीने): आपका शरीर अंदर से शुद्ध हो जाता है। इस स्तर तक पहुँचते-पहुँचते अधिकांश रोगी अपनी एलोपैथिक दवाओं को छोड़ने में सफल हो जाते हैं।

क्या परिणाम की उम्मीद करें? (Realistic Expectations)

  • तनाव मुक्त सुबह: बिना किसी खट्टी डकार या जलन के जागना
  • दवाओं से आजादी: हर भोजन से पहले गोली लेने की मजबूरी का खत्म होना।
  • मानसिक स्पष्टता: जब पेट शांत होता है, तो दिमाग भी शांत और अधिक केंद्रित रहता है।
  • बेहतर त्वचा: क्योंकि पित्त कम होने से चेहरे की चमक बढ़ती है और मुहाँसे कम होते हैं।

मरीजों का अनुभव –

कई महीनों तक, मैंने कब्ज़ से छुटकारा पाने की उम्मीद में डॉक्टरों को दिखाने और दवाएँ लेने पर पैसे खर्च किए। लैक्सेटिव्स (पेट साफ़ करने वाली दवाएँ) कुछ समय के लिए तो काम करती थीं, लेकिन फिर समस्या दोबारा हो जाती थी। एक दिन, मैंने टीवी पर डॉ. चौहान को देखा और मुझे तुरंत लगा कि आयुर्वेद मेरी मदद कर सकता है—और सचमुच, इसने मेरी मदद की। मैंने दवाएँ लीं और डॉक्टर के बताए डाइट चार्ट का पूरी तरह से पालन किया, जिससे मुझे 100% राहत मिली।            —बुध राम

जीवा आयुर्वेद में इलाज की अनुमानित लागत

अपनी सेहत के लिए ज़रूरी आर्थिक निवेश को समझना ज़रूरी है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं की लागत में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी मेडिकल ज़रूरतों के हिसाब से सबसे सही विकल्प चुन सकें।

इलाज की लागत

जो मरीज़ नियमित, लगातार देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और कंसल्टेशन की मासिक लागत आमतौर पर 3,000 रुपये से 3,500 रुपये के बीच होती है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित शुरुआती लागत है। अंतिम लागत मरीज़ की बीमारी की सही प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करती है।

प्रोटोकॉल

ज़्यादा व्यापक और व्यवस्थित तरीके के लिए, हम खास पैकेज प्रोटोकॉल देते हैं। ये प्लान शारीरिक लक्षणों और पूरी जीवनशैली में सुधार, दोनों पर ध्यान देने के लिए बनाए गए हैं। पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल की लागत में एक बार में 15,000 रुपये से 40,000 रुपये तक का पेमेंट शामिल होता है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

जिन मरीज़ों को गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की ज़रूरत होती है, उनके लिए हमारे जीवाग्राम केंद्र बेहतरीन इलाज का अनुभव देते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में बना एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है, और यह ये सुविधाएँ देता है:

  • असली पंचकर्म थेरेपी
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक इलाज सेवाएँ
  • आरामदायक रहने की जगह
  • और भी कई जीवन-स्तर सुधारने वाली सुविधाएँ

जीवाग्राम में 7 दिनों के लिए पूरी तरह से समर्पित वेलनेस स्टे की लागत लगभग 1 लाख रुपये है, जो आपके शरीर और मन को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए लगातार, व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

पिछले कुछ सालों में, जीवा आयुर्वेद ने हज़ारों ऐसे मरीजों का भरोसा जीता है जो प्राकृतिक और पर्सनलाइज़्ड हेल्थकेयर समाधान ढूंढ रहे हैं। जीवा आयुर्वेद पर मरीजों के भरोसे के कुछ मुख्य कारण ये हैं:

  • बीमारी की जड़ पर आधारित इलाज

पारंपरिक इलाज के उलट, जो सिर्फ़ बीमारी के लक्षणों पर ध्यान देते हैं, आयुर्वेदिक इलाज बीमारी की जड़ को ठीक करने और शरीर में मौजूद उन अंदरूनी असंतुलनों को ठीक करने पर ज़ोर देता है जिनकी वजह से बीमारी होती है।

  • अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर

जीवा आयुर्वेद के पास अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों की एक बहुत बड़ी टीम है, जो किसी भी बीमारी के लिए इलाज सुझाने से पहले हर मरीज की स्थिति की अच्छी तरह से जांच करते हैं।

  • पर्सनलाइज़्ड "Ayunique" इलाज का तरीका

आयुर्वेदिक इलाज बहुत ज़्यादा पर्सनलाइज़्ड होता है और हर व्यक्ति की प्रकृति और जीवनशैली के हिसाब से तैयार किया जाता है।

  • संपूर्ण इलाज

आयुर्वेदिक इलाज सिर्फ़ दवाओं तक ही सीमित नहीं है; इसमें खान-पान और जीवनशैली में बदलाव, सांस लेने की तकनीकें, और तनाव को मैनेज करने के तरीके भी शामिल हैं, ताकि शरीर और मन का पूरी तरह से इलाज हो सके।

  • पूरे भारत में मरीजों का भरोसा

बहुत बड़ी संख्या में मरीजों ने Jiva के इलाज के तरीकों और सुझावों को अपनाने के बाद अपनी सेहत में सुधार देखा है। इससे पता चलता है कि आयुर्वेदिक इलाज के लिए लोग जीवा आयुर्वेद पर कितना भरोसा करते हैं।

  • 95% मरीजों ने इलाज शुरू करने के 3 महीने के अंदर ही अपनी सेहत में काफ़ी सुधार देखा।
  • 88% मरीजों ने एलोपैथिक दवाएँ पूरी तरह से लेना बंद कर दिया।
  • हर दिन 8000+ मरीजों का कंसल्टेशन होता है।
  • दुनिया भर में 15 लाख से ज़्यादा संतुष्ट मरीज़
  • 30+ वर्षों की आयुर्वेदिक विशेषज्ञता
  • पूरे भारत में 80+ क्लिनिक

आधुनिक बनाम आयुर्वेदिक उपचार (Comparison Table)

विशेषता

आधुनिक एलोपैथी (Modern)

जीवा आयुर्वेद (Jiva)

मुख्य लक्ष्य

पेट के एसिड को तुरंत सुखाना।

एसिड बनने के कारण (पित्त) को शांत करना।

दीर्घकालिक प्रभाव

हड्डियों की कमजोरी और पोषण की कमी का खतरा।

शरीर को पोषण देना और पाचन सुधारना।

उपचार की अवधि

अक्सर जीवनभर दवा लेनी पड़ती है।

एक निश्चित समय के बाद दवा बंद हो जाती है।

समाधान

'वन साइज फिट्स ऑल' (सबके लिए एक दवा)।

'पर्सनलाइज्ड' (आपके शरीर के अनुसार अलग दवा)।

डॉक्टर से परामर्श कब लें? 

यदि आप इन लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो अब और इंतज़ार न करें: 

  •  निगलते समय दर्द होना। 
  •  मल का रंग गहरा काला होना (आंतरिक रक्तस्राव का संकेत)। 
  •  अत्यधिक कमजोरी और खून की कमी। 
  •  लगातार उल्टी जैसा महसूस होना।

जड़ से समाधान के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से जुड़ें: 

संपर्क करें:

  • कॉल: 0129-4264323
  • वेबसाइट: www.jiva.com
  • परामर्श: पूरे भारत में ऑनलाइन और 80+ क्लिनिक उपलब्ध हैं।

निष्कर्ष 

एसिडिटी महज एक शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि आपके शरीर द्वारा भेजा गया एक महत्वपूर्ण संकेत है जो आपसे बेहतर देखभाल की मांग करता है। केवल दवाएं लेना लक्षणों को अस्थायी रूप से दबाने जैसा है, जबकि बीमारी की असली जड़ आपके पाचन तंत्र में गहराई से पनपती रहती है। आयुर्वेद का विज्ञान इसी जड़ को समझकर, वात-पित्त-कफ के संतुलन द्वारा रोग को जड़ से मिटाने की अद्भुत क्षमता रखता है। अब समय आ गया है कि आप खुद को दवाओं के बोझ से मुक्त करें और अपने शरीर की प्राकृतिक रिकवरी शक्ति पर विश्वास करें। जीवा आयुर्वेद के विशेषज्ञ आपकी व्यक्तिगत प्रकृति का विश्लेषण कर, आपके लिए एक सटीक और स्थायी स्वास्थ्य योजना तैयार करते हैं। अपनी जीवनशैली में आज ही सकारात्मक बदलाव लाएं और बिना किसी जलन या डर के, जीवन के हर लम्हे का आनंद लें। आपका स्वास्थ्य आपका सबसे बड़ा निवेश है, इसे सही मार्गदर्शन के साथ सुरक्षित करें और आज ही हमारे विशेषज्ञ से परामर्श लें।

FAQs

हम आपको चाय छोड़ने की नहीं, बल्कि 'सही' चाय पीने की सलाह देते हैं। दूध और चीनी वाली चाय की जगह जीवा 'आयु आयुर्वेदिक टी' या सौंफ-इलायची का पानी पित्त को शांत करने में मदद करता है।

जी हाँ! आयुर्वेद के अनुसार 'पित्त' और 'क्रोध' का गहरा संबंध है। ज्यादा गुस्सा करने से एसिड रिफ्लक्स बढ़ता है। हम इलाज में 'मानसिक स्वास्थ्य' का भी ध्यान रखते हैं।

बिल्कुल। जीवा का उपचार पूरी तरह प्राकृतिक है और बच्चों के कोमल पाचन तंत्र के लिए अत्यंत सुरक्षित है।

पित्त प्रकृति वालों के लिए बहुत गरम पानी नुकसानदेह हो सकता है। गुनगुना या मटके का पानी सबसे बेहतर है। हमारे डॉक्टर आपकी प्रकृति देख कर सही सलाह देंगे।

इसके दो बड़े कारण हैं। पहला, लेटने पर गुरुत्वाकर्षण (Gravity) पेट के एसिड को आसानी से भोजन नली में आने देता है। दूसरा, आयुर्वेद के अनुसार रात का समय शरीर के शुद्धिकरण का होता है, और यदि आपने देर से भारी भोजन किया है, तो 'पित्त' उग्र हो जाता है। जीवा में हम आपको 'वामकुक्षी' (बाईं करवट सोना) और सोने से 3 घंटे पहले भोजन करने की सलाह देते हैं।

 जी हाँ, बिल्कुल। आयुर्वेद कहता है कि 'पित्त' का सीधा संबंध रक्त और रोम कूपों (Hair Follicles) से है। जब पेट में गर्मी (अम्लता) बढ़ती है, तो वह रक्त को दूषित करती है, जिससे चेहरे पर मुहाँसे, समय से पहले बालों का सफेद होना और झड़ना शुरू हो जाता है। पेट साफ तो त्वचा साफ!

कई सप्लीमेंट्स भारी और ऊष्म (Heated) प्रकृति के होते हैं, जिन्हें पचाना कमजोर अग्नि के लिए मुश्किल होता है। यदि आपको जिम जाने के बाद जलन महसूस होती है, तो इसका मतलब है कि आपका सप्लीमेंट आपके 'पित्त' को बढ़ा रहा है। जीवा के डॉक्टर आपको प्राकृतिक विकल्पों के बारे में सही सलाह दे सकते हैं।

यह एक आम गलतफहमी है। तांबा 'ऊष्म' (गर्म) प्रकृति का होता है। अत्यधिक पित्त या एसिडिटी वाले लोगों को तांबे के बर्तन का पानी कभी-कभी नुकसान पहुँचा सकता है। ऐसे में मिट्टी के घड़े का पानी या चांदी के गिलास में रखा पानी अधिक लाभकारी होता है।

'अति-लंघन' (बहुत अधिक उपवास) पित्त को और अधिक भड़का सकता है। यदि पेट खाली है और एसिड बन रहा है, तो वह पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुँचाएगा। हम 'मध्यम मार्ग' की सलाह देते हैं—हल्का सुपाच्य भोजन और सही अंतराल पर आहार।

उपचार का लक्ष्य आपको प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि आपके शरीर को इतना सक्षम बनाना है कि वह भोजन को पचा सके। एक बार जब आपकी 'अग्नि' संतुलित हो जाती है, तो आप कभी-कभी अपनी पसंद का भोजन (सीमित मात्रा में) बिना किसी परेशानी के ले सकते हैं। हम आपको 'खाने का तरीका' और 'सही कॉम्बिनेशन' सिखाते हैं।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us