Diseases Search
Close Button
 
 

Loose motion बार-बार होना सिर्फ infection नहीं हो सकता

Information By Dr. Mukesh Sharma     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर जब पेट खराब होता है या लूज मोशन लग जाते हैं, तो हम सबसे पहले यही सोचते हैं कि बाहर का कुछ गलत खा लिया होगा, या फिर पानी बदल गया होगा। एक या दो बार पेट खराब होना बहुत ही सामान्य बात है, जिसे हम 'फूड पॉइजनिंग' या 'इन्फेक्शन' मान लेते हैं। लेकिन, अगर आपको आए दिन इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो इसे सिर्फ एक साधारण इन्फेक्शन मानकर नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है।

आयुर्वेद के अनुसार, हमारा पाचन तंत्र हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य का आधार है। जब दस्त एक क्रॉनिक या बार-बार होने वाली समस्या बन जाए, तो यह शरीर के अंदर चल रही किसी गहरी गड़बड़ी, बिगड़ी हुई जीवनशैली या मानसिक तनाव का संकेत हो सकता है। आइए इस लेख में विस्तार से समझते हैं कि बार-बार लूज मोशन होने के असली कारण क्या हैं और आयुर्वेद के नजरिए से इसे कैसे ठीक किया जा सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार बार-बार पेट खराब होने का मूल रहस्य

आयुर्वेद मानता है कि पेट से जुड़ी सभी बीमारियों की जड़ हमारी कमज़ोर 'जठराग्नि' में छिपी होती है। जब यह अग्नि मंद पड़ जाती है, तो शरीर भोजन को सही से पचाने के बजाय उसे सड़ाने लगता है, जिससे कई समस्याएं जन्म लेती हैं।

  • आम का निर्माण: जब खाना पूरी तरह पचता नहीं है, तो वह आंतों में एक चिपचिपे और विषाक्त पदार्थ के रूप में जमा होने लगता है जिसे 'आम' कहते हैं। यह आम आंतों को भोजन सोखने नहीं देता और मल को बांधने की प्रक्रिया को रोक देता है।
  • ग्रहणी दोष: आंतों का वह हिस्सा जो पचे हुए भोजन से पोषक तत्व निकालता है और मल को बांधता है, उसे आयुर्वेद में 'ग्रहणी' कहते हैं। इसके कमज़ोर होने पर शरीर भोजन को बिना पचे ही पानी की तरह बाहर निकाल देता है।
  • वात और पित्त का असंतुलन: शरीर में जब पित्त और वात एक साथ बढ़ जाते हैं, तो आंतों की गति असामान्य रूप से तेज़ हो जाती है, जिससे बार-बार टॉयलेट भागना पड़ता है।

सिर्फ इन्फेक्शन नहीं, तो आखिर क्या हैं इसके वास्तविक कारण?

बार-बार लूज मोशन होना केवल किसी बैक्टीरिया या वायरस का हमला नहीं है। इसके पीछे हमारी रोजमर्रा की आदतें, खानपान की गलतियां और मानसिक स्थिति जैसे कई कारण छिपे होते हैं।

  • विरुद्ध आहार: आयुर्वेद के अनुसार, दूध के साथ खट्टी चीज़ें खाना, या ठंडे के तुरंत बाद बहुत गर्म खाना खाने जैसी गलतियों से आंतों का सिस्टम बिगड़ जाता है और पाचन तंत्र भ्रमित हो जाता है।
  • तनाव और चिंता: हमारे पेट और दिमाग का बहुत गहरा संबंध होता है। ज्यादा तनाव या घबराहट होने पर आंतों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, जिसे मॉडर्न साइंस में IBS भी कहा जाता है।
  • फूड इनटॉलरेंस: कई बार शरीर कुछ खास चीज़ों जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स या गेहूं को पचा नहीं पाता। जैसे ही आप इन चीज़ों का सेवन करते हैं, पेट तुरंत खराब हो जाता है।
  • आंतों की सूजन: आंतों में अंदरूनी तौर पर पुरानी सूजन या छाले होने पर भी दस्त की शिकायत लगातार बनी रहती है और पाचन पूरी तरह बिगड़ जाता है।

खतरे के संकेत: स्थिति को कब गंभीर मानें?

हर लूज मोशन को घर की रसोई में मौजूद नुस्खों से ठीक नहीं किया जा सकता है। कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जो अलार्मिंग होते हैं, जिन्हें देखते ही आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

  • वज़न का तेज़ी से कम होना: अगर बार-बार दस्त लगने की वजह से आपका या आपके बच्चे का वज़न अचानक कम होने लगा है, तो यह कुपोषण और शरीर के अंदरूनी नुकसान का बड़ा संकेत है।
  • मल में खून या बहुत अधिक म्यूकस आना: मल के साथ रक्त का आना या बहुत अधिक चिपचिपाहट का आना आंतों में गंभीर संक्रमण, सूजन या अल्सर का इशारा हो सकता है।
  • रात में नींद खुलकर दस्त आना: अगर लूज मोशन इतने तीव्र हैं कि रात को गहरी नींद से उठकर आपको भागकर टॉयलेट जाना पड़े, तो यह सामान्य IBS या हल्का इन्फेक्शन बिल्कुल नहीं है।
  • अत्यधिक थकान और चक्कर आना: शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की लगातार कमी होने से गंभीर डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे अत्यधिक कमज़ोरी आती है और इंसान बेहोश भी हो सकता है।

आंतों को मजबूत बनाने के असरदार आयुर्वेदिक उपाय

आयुर्वेद का उद्देश्य केवल लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं है, बल्कि पाचन अग्नि को ठीक करके समस्या को जड़ से खत्म करना है। यहां कुछ ऐसे उपाय हैं जो आंतों को प्राकृतिक रूप से आराम और ताकत देते हैं।

  • ताजी छाछ: आयुर्वेद में छाछ को आंतों के लिए 'अमृत' माना गया है। भुना हुआ जीरा, काला नमक और थोड़ी सी हींग डालकर ताजी छाछ पीने से मल आसानी से बंधने लगता है और पाचन सुधरता है।
  • बेल का फल: बेल का फल या इसका चूर्ण आंतों की कार्यक्षमता सुधारने के लिए सबसे बेहतरीन औषधि है। यह मल को सही आकार देता है और आंतों में चिपके हुए 'आम' को पकाता है।
  • अनार का प्रयोग: अनार का रस पेट को बांधने (ग्राही गुण) का काम करता है। यह आंतों की सूजन को कम करता है और लगातार लूज मोशन के कारण आई कमज़ोरी को दूर करता है।
  • सौंफ और जीरे का पानी: एक चम्मच सौंफ और आधा चम्मच जीरा एक गिलास पानी में आधा होने तक उबाल लें। इस पानी को छानकर दिनभर घूंट-घूंट पीने से पेट की मरोड़ और आंतों की गर्मी शांत होती है।

जीवनशैली और आहार में ये बदलाव हैं जरूरी

कोई भी आयुर्वेदिक दवा या घरेलू नुस्खा तभी काम करता है जब आपका आहार और आपकी जीवनशैली आपके शरीर का पूरा सहयोग कर रही हो। इसलिए कुछ बुनियादी नियम अपनाना बेहद जरूरी है।

  • हल्का और सुपाच्य भोजन: जब तक आपका पेट पूरी तरह से ठीक न हो जाए, तब तक सिर्फ मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया और उबले हुए सेब या केले का ही सेवन करें। ये पचने में बहुत आसान होते हैं।
  • सही समय पर ही खाएं: असमय खाने या बिना भूख लगे खाने (अध्यशन) से बचें। जब पहले खाया हुआ भोजन पूरी तरह पच जाए और तेज़ भूख का अहसास हो, तभी अगला भोजन करें।
  • मसालेदार और जंक फूड से दूरी: अत्यधिक मिर्च-मसाले, बाहर का डीप-फ्राइड खाना और पैकेटबंद चीज़ें आंतों में गर्मी और सूजन बढ़ाती हैं। इनसे पूरी तरह परहेज करें।
  • योग और ध्यान का अभ्यास: तनाव को कम करने के लिए अपनी दिनचर्या में कम से कम 20 मिनट योग (जैसे वज्रासन, जो खाने के बाद किया जा सकता है) और ध्यान (Meditation) को जरूर शामिल करें।

References:

https://www.who.int/health-topics/diarrhoea

https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/diarrhea/symptoms-causes

https://www.healthline.com/health/what-to-eat-when-you-have-diarrhea

https://www.nhs.uk/symptoms/diarrhoea-and-vomiting/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, अगर आपको बिना किसी इन्फेक्शन या बुखार के बार-बार लूज मोशन होते हैं, खासकर तनाव के समय या कुछ खास खाने के बाद, तो यह IBS (Irritable Bowel Syndrome) का संकेत हो सकता है।

बिल्कुल नहीं। लूज मोशन के दौरान आंतों में लैक्टेज एंजाइम की कमी हो जाती है, जिससे दूध पच नहीं पाता और दस्त और ज्यादा बढ़ सकते हैं। दूध की जगह ताजी छाछ का इस्तेमाल करें।

मूंग दाल और चावल से बनी खिचड़ी शरीर के तीनों दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करती है। यह पेट पर बिना बोझ डाले शरीर को तुरंत ऊर्जा और पोषण देती है।

जी हाँ। हमारे दिमाग और आंतों के बीच सीधा संपर्क होता है। तनाव होने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन निकलते हैं, जो आंतों की गति को बढ़ा देते हैं, जिससे घबराहट में बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है।

आयुर्वेद में इसे साम मल (टॉक्सिन्स से भरा मल) कहते हैं। यह इस बात का संकेत है कि आपका खाना ठीक से पच नहीं रहा है और आंतों में सूजन या आम (Toxins) जमा हो गया है।

बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद फलों के रस या अत्यधिक मीठे जूस से बचें, क्योंकि ये ऑस्मोसिस के कारण आंतों में पानी खींचते हैं और दस्त बढ़ा सकते हैं। ताजे अनार का रस या नारियल पानी पीना सुरक्षित है।

हाँ। बहुत ज्यादा एंटीबायोटिक्स खाने से आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया (अच्छे कीटाणु) मर जाते हैं, जिससे पाचन तंत्र कमज़ोर हो जाता है और दस्त लग जाते हैं।

हाँ, लूज मोशन में शरीर से पानी और नमक तेज़ी से कम होता है। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ओआरएस का घोल पीना बहुत जरूरी है। आप घर पर भी नींबू, नमक और चीनी का घोल बना सकते हैं।

केले में पेक्टिन (Pectin) और पोटैशियम भरपूर मात्रा में होता है। पेक्टिन आंतों में मौजूद अतिरिक्त पानी को सोखकर मल को बांधता है, और पोटैशियम शरीर की कमज़ोरी दूर करता है।

पाचन अग्नि को मजबूत करने के लिए समय पर भोजन करें, खाने से पहले थोड़ा सा अदरक और सेंधा नमक चबाएं, जंक फूड से बचें, और नियमित रूप से वज्रासन का अभ्यास करें।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us