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Gas पेट में नहीं छाती और कंधे में जाती है - क्या यह Cardiac है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

रात के 2 बजे हैं। अचानक आपकी नींद खुलती है सीने में एक भारी दबाव, बाईं तरफ कंधे में एक अजीब सी जकड़न और ऐसा महसूस होना कि सांस लेना मुश्किल हो रहा है आपके दिमाग में सबसे पहला ख्याल क्या आता है? "क्या मुझे हार्ट अटैक आ रहा है?" आप घबराहट में पसीने से भीग जाते हैं, इमरजेंसी रूम (ER) की ओर भागते हैं, ईसीजी (ECG) से लेकर तमाम टेस्ट होते हैं, और अंत में डॉक्टर मुस्कुराकर कहते हैं "घबराइए नहीं, आपका दिल बिल्कुल ठीक है यह सिर्फ गैस है।

आप राहत की सांस तो लेते हैं, लेकिन मन में एक सवाल हमेशा के लिए घर कर जाता है:"अगर यह सिर्फ गैस थी, तो इसने मेरे सीने और कंधे को क्यों जकड़ लिया? क्या गैस सच में हार्ट अटैक जैसा भयंकर दर्द दे सकती है?"

यह कोई साधारण गैस नहीं है। यह आपके शरीर के बिगड़े हुए पाचन तंत्र (Digestive system) और अनियंत्रित वात दोष की वह खतरनाक स्थिति है, जहाँ गैस पेट में नीचे की ओर जाने के बजाय उल्टा सफर तय करने लगती है जब यह छाती और कंधों में जाकर फँसती है, तो यह आपकी नसों और हृदय के आसपास ऐसा भारी दबाव बनाती है जिसे अक्सर कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) समझ लिया जाता है अगर आप रोज़ाना इस गैस को सिर्फ एक डकार (Burp) या एंटासिड (Antacid) की गोली से दबा रहे हैं, तो आप एक बहुत बड़े खतरे को निमंत्रण दे रहे हैं।

पेट की गैस छाती और कंधे तक कैसे पहुँचती है और यह क्या संकेत देती है?

पेट की गैस का सीने में जाना शरीर के प्राकृतिक नियमों के विरुद्ध है। हमारा आमाशय (Stomach) और हृदय एक मांसपेशीय दीवार से अलग होते हैं, जिसे डायफ्राम (Diaphragm) कहा जाता है। जब गैस शरीर से बाहर नहीं निकल पाती, तो यह ऊपर की ओर दबाव डालती है।

  • डायफ्राम पर अत्यधिक दबाव (Diaphragmatic Pressure): जब पेट में बहुत अधिक गैस बनती है और वह नीचे से पास नहीं होती, तो फूला हुआ पेट डायफ्राम को ऊपर की ओर धकेलता है इससे फेफड़ों और हृदय को फैलने के लिए जगह कम मिलती है, जिससे सीने में भारीपन और सांस लेने में तकलीफ (Palpitations) महसूस होती है।
  • वेगस नर्व का स्टिमुलेशन (Vagus Nerve Stimulation): हमारे मस्तिष्क से लेकर पेट तक एक बहुत महत्वपूर्ण नस जाती है जिसे वेगस नर्व कहते हैं। पेट की गैस और एसिड जब इस नस को इरिटेट करते हैं, तो इसका रेफर्ड पेन (Referred pain) सीधे गर्दन, कंधे और सीने में महसूस होता है
  • गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स (GERD): कई बार गैस के साथ पेट का एसिड भी भोजन नली (Esophagus) में ऊपर आ जाता है भोजन नली हृदय के बिल्कुल पीछे स्थित होती है। जब एसिड वहां जलन पैदा करता है, तो ऐसा लगता है जैसे सीने में आग लग रही हो (Heartburn) और यह दर्द कंधे तक रेडिएट होता है।

गैस्ट्रिक दर्द (Gas Pain) और कार्डियक (हार्ट) दर्द के बीच अंतर कैसे पहचानें?

जब छाती में दर्द उठे, तो हर सेकंड कीमती होता है। ऐसे में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आपका दर्द गैस का है या सच में हृदय का:

  • दर्द का प्रकार और स्थान: गैस का दर्द अक्सर सीने के बीच या निचले हिस्से में एक तीखी चुभन (Sharp, stabbing pain) जैसा होता है जो पेट की तरफ भी महसूस होता है। वहीं, हार्ट अटैक का दर्द ऐसा होता है मानो सीने पर किसी ने कोई भारी पत्थर रख दिया हो या कोई सीने को निचोड़ रहा हो (Heavy crushing pressure)।
  • रेडिएशन (दर्द का फैलना): गैस का दर्द अक्सर कंधों के बीच या पीठ में जाता है। जबकि कार्डियक दर्द मुख्य रूप से बाएं हाथ के निचले हिस्से, जबड़े (Jaw) और गले की तरफ बढ़ता है।
  • डकार और पोश्चर का असर: अगर डकार आने से, पाद (Fart) आने से या शरीर की पोज़िशन बदलने (जैसे सीधे बैठने) से दर्द में तुरंत राहत मिलती है, तो यह 99% गैस्ट्रिक है। हार्ट अटैक के दर्द में पोश्चर बदलने या डकार आने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
  • अन्य लक्षण: हार्ट अटैक के दौरान अचानक ठंडा पसीना आना (Cold sweats), अत्यधिक कमज़ोरी, और चक्कर आना जैसे लक्षण होते हैं। गैस में पेट फूलना (Bloating) और गले में खट्टा पानी आना मुख्य होता है।

क्या आपके शरीर में भी इस गैस के ऊर्ध्वग (ऊपर जाने) के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

गैस अचानक एक दिन में छाती तक नहीं पहुँचती। आपका शरीर बहुत पहले से आपको चेतावनी देना शुरू कर देता है, जिसे हम अक्सर गलत खान-पान का एक सामान्य हिस्सा मानकर टाल देते हैं। तुरंत सतर्क हो जाएँ अगर आपको ये संकेत दिख रहे हैं:

  • थोड़ा खाने पर भी पेट का गुब्बारे जैसा फूलना: खाना खाते ही पेट का भारी हो जाना और ऐसा महसूस होना कि पेट में हवा भर गई है।
  • गले में कुछ अटका हुआ महसूस होना (Globus Sensation): हमेशा ऐसा लगना कि गले में कोई गोला अटका हुआ है, जिसे निगलना मुश्किल हो रहा है।
  • लगातार डकारें आना (Excessive Belching): खाना खाने के बाद या खाली पेट भी लगातार ज़ोर-ज़ोर से डकारें आना, जो सीने में एक अजीब सी जकड़न पैदा करती हैं।
  • सुबह उठते ही पीठ और कंधों में अकड़न: रात भर गैस के ऊपर की तरफ दबाव बनाने के कारण सुबह उठने पर गर्दन और कंधों के बीच भयंकर दर्द और जकड़न महसूस होना।

इस दर्द को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

इस डर से बचने के लिए कि "कहीं यह हार्ट की समस्या तो नहीं", मरीज़ अक्सर गैस को हल्के में लेने लगते हैं या कुछ ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो अंदर ही अंदर पाचन तंत्र और नसों को तबाह कर देते हैं:

  • एंटासिड (Antacids) का रोज़ाना सेवन: गैस बनते ही खाली पेट ली जाने वाली गोलियाँ (जैसे Pantoprazole) पेट के प्राकृतिक एसिड को पूरी तरह खत्म कर देती हैं। इससे खाना पचना बंद हो जाता है और आम (Toxins) बनने लगता है, जो गैस को और भी भयंकर बना देता है।
  • पेनकिलर्स से कंधे के दर्द को दबाना: कंधे और पीठ के दर्द को सर्वाइकल या थकावट समझकर रोज़ाना पेनकिलर खाना, जो पेट की लाइनिंग (Mucosa) को डैमेज कर देता है और अल्सर (Ulcer) पैदा करता है।
  • हृदय रोग को नज़रअंदाज़ करना : जब इंसान मान लेता है कि "मुझे तो गैस ही होती है", तो वह सच में आने वाले हार्ट अटैक के लक्षणों को भी गैस समझकर इग्नोर कर देता है, जो जानलेवा साबित होता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: लंबे समय तक ऊपर की ओर जाने वाली गैस फेफड़ों और हृदय की मांसपेशियों पर क्रोनिक तनाव डालती है, जो आगे चलकर एरिथमिया (Irregular heartbeat) और गंभीर गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल बीमारियों का रूप ले लेती है।

आयुर्वेद छाती में जाने वाली गैस (ऊर्ध्वग वात) को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे GERD या गैस्ट्रिक स्पाज़्म कहता है, आयुर्वेद उसे उदावर्त (Udavarta) और ऊर्ध्वग वात के गहरे विज्ञान से समझता है।

  • अपान वात की विपरीत दिशा (Reverse Apana Vata): आयुर्वेद के अनुसार, नाभि के नीचे अपान वात काम करता है, जिसका काम मल, मूत्र और गैस को नीचे की तरफ शरीर से बाहर निकालना है। लेकिन मल-मूत्र के वेग को रोकने, रात में जागने और गलत खान-पान से यह अपान वात अपनी दिशा बदल लेता है और ऊपर (Urdhwa) की ओर भागने लगता है। इसे ही उदावर्त कहते हैं।
  • समान वात और प्राण वात का टकराव: जब नीचे की गैस ऊपर जाती है, तो वह छाती में बैठे प्राण वात और हृदय के अवलंबक कफ से टकराती है। इन वात दोषों के आपस में टकराने से छाती में भयंकर शूल (दर्द) उत्पन्न होता है, जो बिल्कुल हृदय रोग जैसा महसूस होता है।
  • जठराग्नि की अनदेखी और आम का निर्माण: जब जठराग्नि (Digestive fire) कमज़ोर होती है, तो खाना पचने के बजाय पेट में सड़ने लगता है। इस सड़न से भयंकर ज़हरीली गैसें (Toxins/Ama) बनती हैं, जो शरीर के सूक्ष्म चैनलों (Srotas) को ब्लॉक कर देती हैं और गैस को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता।

छाती और कंधे में जाने वाली गैस को शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके पेट में गैस का बम बना सकता है और उसे शांत भी कर सकता है। उदावर्त (ऊपर जाने वाली गैस) से बचने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - वात अनुलोमक और सुपाच्य) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - वात और गैस भड़काने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया, जौ (Barley)। वाइट ब्रेड, मैदा, बेसन, पैकेटबंद नूडल्स, पिज़्ज़ा।
वसा और मसाले (Fats & Spices) देसी गाय का शुद्ध घी (वात का सबसे बड़ा दुश्मन), अजवायन, हींग, जीरा, सौंफ। रिफाइंड तेल, बहुत अधिक मक्खन, लाल मिर्च पाउडर, बाज़ार का गरम मसाला।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, परवल, कद्दू, अदरक (सभी अच्छी तरह पकी और छौंकी हुई)। कच्चा सलाद, अत्यधिक फूलगोभी-पत्तागोभी, कटहल, राजमा, छोले, भिंडी।
फल (Fruits) पपीता (पाचन के लिए बेहतरीन), सेब (पका हुआ/उबला हुआ), अनार। बिना मौसम के फल, तरबूज़ (रात में), अत्यधिक खट्टे फल (खाली पेट)।
पेय पदार्थ (Beverages) छाछ (भुना जीरा और हींग डालकर), सौंफ का पानी, पुदीने की चाय, गर्म पानी। बहुत ज़्यादा कैफीन (कॉफी गैस भड़काती है), कोल्ड ड्रिंक्स (Cold drinks), कार्बोनेटेड वॉटर।

नसों और पेट को फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के पेट की गैस को शांत करते हैं और छाती पर पड़ने वाले दबाव को खत्म करके हृदय को सुरक्षित रखते हैं:

  • पुष्करमूल (Pushkarmool): जब गैस के कारण छाती में दर्द हो और सांस लेने में तकलीफ हो, तो पुष्करमूल आयुर्वेद की सबसे अचूक औषधि मानी जाती है। यह छाती के दबाव को खोलती है और हृदय व फेफड़ों को भारी आराम देती है।
  • अर्जुन (Arjuna): चूंकि गैस का दर्द अक्सर दिल को घबरा देता है, अर्जुन की छाल हृदय की मांसपेशियों को फौलादी ताकत देती है। यह कार्डियक और गैस्ट्रिक दोनों तरह के तनाव को दूर करने में चमत्कारिक है।
  • हींग (Asafoetida): शुद्ध हींग वात दोष का सबसे बड़ा नाशक है। यह आंतों में फंसी हुई गैस को तुरंत बाहर निकालती है और उल्टी दिशा में दौड़ रहे वात को शांत करती है।
  • लहसुन (Garlic / Lashuna): लहसुन न केवल गैस को नष्ट करता है, बल्कि हृदय की नसों को भी ब्लॉक होने से बचाता है। यह वात और कफ दोनों को संतुलित करने वाला एक जादुई रसायन है।
  • शंख भस्म (Shankh Bhasma): पेट के एसिड को तुरंत शांत करने और छाती की जलन (Heartburn) को बुझाने के लिए यह एक बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि है, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के काम करती है।

गैस और छाती के दबाव को खोलने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और गैस बहुत गहराई तक नसों और छाती में जम चुकी हो, तो पंचकर्म की बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • हृद बस्ती (Hrid Basti): छाती के ऊपर आटे का एक घेरा बनाकर उसमें हल्का गर्म औषधीय तेल (जैसे धन्वंतरम तेल) डाला जाता है। यह हृदय की मांसपेशियों को भारी ठंडक और आराम देता है, और गैस के कारण छाती में फंसे प्राण वात को शांत करके सांस की तकलीफ दूर करता है।
  • नाभि बस्ती (Nabhi Basti): नाभि (Navel) हमारे शरीर का केंद्र और समान वात का घर है। नाभि के ऊपर गर्म तेल रोकने से पेट की जठराग्नि प्रज्वलित होती है और गैस की समस्या जड़ से खत्म होने लगती है।
  • अभ्यंग और स्वेदन (Abhyanga & Swedana): गुनगुने वात-शामक तेलों से संपूर्ण शरीर की मालिश और उसके बाद हर्बल भाप (Steam)। यह शरीर के सभी सूक्ष्म चैनलों (Srotas) को खोल देता है, जिससे फंसी हुई गैस पसीने और नीचे के मार्ग से आसानी से बाहर निकल जाती है।

गैस की समस्या पूरी तरह खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों से खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान के कारण बिगड़े हुए पाचन को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। पेट फूलना, डकारें आना और छाती का भारीपन काफी कम हो जाएगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से उदावर्त (उल्टा गैस जाना) खत्म होने लगेगा। कंधे और पीठ का दर्द लगभग खत्म हो जाएगा और आपको नींद अच्छी आने लगेगी।
  • 5-6 महीने: आपकी आंतें और जठराग्नि पूरी तरह मज़बूत हो जाएगी। आप बिना किसी एंटासिड के एक सामान्य, ऊर्जावान और गैस-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

गैस और छाती के दर्द के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य एसिड बनने से रोकने के लिए PPIs (जैसे Omeprazole) और एंटासिड देना। जठराग्नि को प्रज्वलित करना, 'आम' को पचाना और वात को नीचे की ओर (अनुलोमन) करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल पेट के एसिड का इसोफेगस (भोजन नली) में आने (GERD) की समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, अपान वात के उल्टी दिशा (उदावर्त) में भागने का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल मसालेदार खाने से बचने की सलाह, लेकिन खाने के समय और मानसिक शांति पर कोई खास ज़ोर नहीं। वात-शामक डाइट, सही समय पर भोजन, कब्ज़ दूर करना और नाभि बस्ती को इलाज का आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर गैस और एसिडिटी तुरंत वापस आ जाती है और आंतें कमज़ोर हो जाती हैं। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और पाचन तंत्र खुद को हील कर लेता है, जिससे इंसान स्थायी रूप से रोग-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि ज़्यादातर मामलों में छाती का यह दर्द भयंकर गैस का ही परिणाम होता है, लेकिन आपको कभी भी खुद से हार्ट अटैक को रूल आउट (Rule out) नहीं करना चाहिए। अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर लक्षण दिखें, तो आयुर्वेद या कोई भी घरेलू नुस्खा आजमाने से पहले तुरंत नज़दीकी अस्पताल (ER) भागना ज़रूरी है:

  • पसीने से तर-बतर हो जाना (Cold Sweats): दर्द के साथ अचानक बहुत ज़्यादा ठंडा पसीना आना और चक्कर महसूस होना।
  • दर्द का बाएं हाथ और जबड़े में फैलना: सीने का भारी दबाव अगर सीधे आपके बाएं हाथ की उँगलियों तक या निचले जबड़े (Jaw) तक खिंचने लगे।
  • सांस का पूरी तरह टूटना (Extreme Shortness of Breath): ऐसा महसूस होना कि आपके फेफड़ों में हवा ही नहीं जा रही है और आप हांफने लगें।
  • छाती पर क्रशिंग पेन (Crushing Chest Pain): दर्द सुई चुभने जैसा न होकर ऐसा लगे जैसे सीने की हड्डियों को कोई मशीन से दबा रहा है या कुचल रहा है।

निष्कर्ष

सीने में अचानक उठने वाला दर्द और कंधे की जकड़न आपको पल भर में मौत के खौफ से भर सकती है। यह राहत की बात है कि कई बार यह सिर्फ गैस होती है, लेकिन यह आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपकी जठराग्नि बुझ चुकी है, आपका अपान वात अपनी दिशा भूल गया है और आपका पाचन तंत्र भारी दबाव में दम तोड़ रहा है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना एंटासिड और पेनकिलर्स की कृत्रिम गोलियों से दबाते हैं, तो आप गैस को ठीक करने के बजाय अपनी आंतों को स्थायी रूप से अपाहिज कर रहे होते हैं। इस डर और बीमारी के खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपने खान-पान का समय सुधारें, रात को हल्का भोजन लें और अपनी डाइट में शुद्ध गाय का घी और हींग शामिल करें। पुष्करमूल, अर्जुन और लशुन जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और हृद बस्ती व नाभि बस्ती से अपने बिगड़े हुए वात को नया जीवन दें। गैस के कारण अपने हृदय को कमज़ोर न पड़ने दें, और अपने शरीर व पाचन तंत्र को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

गैस का दर्द आमतौर पर डकार आने, पाद (fart) आने या बैठने का पोश्चर बदलने से कुछ कम हो जाता है। इसमें पेट फूलना और जलन होती है। हार्ट अटैक का दर्द सीने पर भारी दबाव (जैसे कोई हाथी बैठ गया हो) जैसा होता है, पसीना आता है और यह डकार या पोश्चर बदलने से बिल्कुल कम नहीं होता।

बिल्कुल नहीं। रोज़ाना खाली पेट एंटासिड खाने से पेट का प्राकृतिक एसिड कम हो जाता है, जिससे खाना पचना बंद हो जाता है। आयुर्वेद के अनुसार इससे आम (Toxins) बनता है, जो आगे चलकर गैस की समस्या को और भयंकर और लाइलाज बना देता है।

हाँ। रात को जठराग्नि (Digestive fire) प्राकृतिक रूप से कमज़ोर होती है। देर से भारी खाना खाने और तुरंत सो जाने से खाना पचता नहीं है, बल्कि सड़ता है। इससे बनी गैस गुरुत्वाकर्षण के कारण और वात के बिगड़ने से सीधे छाती और गले की तरफ (उदावर्त) भागती है।

आमतौर पर गैस से ECG में बदलाव नहीं आता, लेकिन गंभीर गैस्ट्रिक रिफ्लक्स और घबराहट (Panic) के कारण आपकी धड़कन (Heart rate) बहुत तेज़ हो सकती है जिसे टैचीकार्डिया (Tachycardia) कहते हैं।

पेट शरीर के बाएं हिस्से (Left side) में स्थित होता है। जब पेट के ऊपरी हिस्से (Fundus) में गैस जमा होती है, तो यह डायफ्राम और बाएं तरफ की वेगस नर्व पर दबाव डालती है। वेगस नर्व का यही इरिटेशन रेफर्ड पेन के रूप में बाएं कंधे और गर्दन में महसूस होता है।

बिल्कुल। आयुर्वेद के अनुसार, कब्ज़ होने पर अपान वात का नीचे का रास्ता ब्लॉक हो जाता है। गैस को बाहर निकलने की जगह नहीं मिलती, इसलिए वह मजबूरन ऊपर की तरफ (ऊर्ध्वग) दौड़ती है और सीने में भारी जकड़न पैदा करती है।

अर्जुन हृदय की मांसपेशियों को ताकत देता है। जब गैस के दबाव से हृदय की धड़कनें अनियमित होती हैं और घबराहट होती है, तो अर्जुन हृदय को सुरक्षित रखता है और सीने के तनाव को जादुई ठंडक देकर शांत करता है।

हाँ। पानी कम पीने से आंतों में रूखापन (वात दोष) बढ़ जाता है और कब्ज़ की समस्या होती है। शरीर का सही हाइड्रेशन मल को नरम रखता है और गैस को आसानी से नीचे की तरफ पास होने में मदद करता है।

तुरंत आराम के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में चुटकी भर भुना हुआ जीरा, अजवायन और थोड़ा सा काला नमक या हींग मिलाकर घूंट-घूंट कर पिएं। सीधे बैठें और थोड़ा टहलें। पीठ के बल लेटने से बचें, क्योंकि इससे गैस ऊपर की तरफ आएगी।

नाभि पेट का केंद्र है। नाभि बस्ती में जब नाभि पर गर्म औषधीय तेल रोका जाता है, तो यह आंतों की रूक्षता (Dryness) को खत्म करता है, रुकी हुई गैस को नीचे की ओर धकेलता है (वात अनुलोमन) और जठराग्नि को तेज़ करके गैस बनने की प्रक्रिया को ही रोक देता है।

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