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Melasma — हार्मोन और Pitta का सम्बन्ध, आयुर्वेदिक उपाय

Information By Dr. Keshav Chauhan

आप आईने के सामने खड़े होते हैं और अपने गालों, माथे या नाक पर पड़े उन भूरे और काले धब्बों (Dark Patches) को देखकर परेशान हो जाते हैं। इन धब्बों को छिपाने के लिए आप कंसीलर (Concealer) लगाते हैं, इंटरनेट पर देखकर महँगी ब्लीचिंग क्रीम्स और सीरम खरीदते हैं, या फिर लेज़र ट्रीटमेंट (Laser Treatment) पर हज़ारों रुपये खर्च कर देते हैं। कुछ समय के लिए त्वचा साफ नज़र आती है, लेकिन जैसे ही आप क्रीम लगाना बंद करते हैं या धूप में निकलते हैं, वे ज़िद्दी झाइयाँ (Melasma) दोगुनी तेज़ी से वापस लौट आती हैं।

ऐसा क्यों होता है? क्योंकि आप एक बहुत बड़ी तार्किक गलती कर रहे हैं। आप अपने चेहरे को एक 'कैनवास' समझकर उसे बाहर से रगड़कर साफ करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यह बीमारी त्वचा की ऊपरी परत की है ही नहीं। Melasma (झाइयाँ) असल में आपके शरीर के अंदर चल रहे हार्मोनल युद्ध (Hormonal Imbalance) और लिवर में भड़की हुई 'पित्त' (गर्मी) का एक बाहरी अलार्म है। जब तक आप अपने शरीर के इस 'सॉफ्टवेयर' (हार्मोन्स और पाचन) को ठीक नहीं करेंगे, बाहरी 'हार्डवेयर' (त्वचा) पर लगाई गई कोई भी क्रीम काम नहीं करेगी। 

Melasma का विज्ञान: आपकी त्वचा में क्या हो रहा है?

Melasma केवल धूप में जाने से नहीं होता। इसके पीछे एक बहुत ही जटिल हार्मोनल और सेल्युलर प्रक्रिया  काम कर रही होती है।

  • मेलानोसाइट्स का ओवरएक्टिव होना: हमारी त्वचा के नीचे रंग बनाने वाली कोशिकाएं होती हैं जिन्हें 'मेलानोसाइट्स' कहते हैं। जब ये कोशिकाएं अत्यधिक मात्रा में 'मेलेनिन' (Melanin - रंग का पिगमेंट) बनाने लगती हैं, तो वह मेलेनिन त्वचा की सतह पर भूरे धब्बों के रूप में जमा हो जाता है।
  • हार्मोनल ट्रिगर: महिलाओं में गर्भावस्था, गर्भनिरोधक गोलियाँ खाने या PCOD के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स का स्तर तेज़ी से बदलता है। ये भड़के हुए हार्मोन्स सीधे मेलानोसाइट्स को उत्तेजित करते हैं, जिससे वे बिना ज़रूरत के भी मेलेनिन बनाने लगते हैं।
  • लिवर की कमज़ोरी: शरीर के अतिरिक्त हार्मोन्स को शरीर से बाहर निकालने का काम लिवर का होता है। जब खराब लाइफस्टाइल से लिवर कमज़ोर हो जाता है, तो ये विषैले हार्मोन्स खून में ही घूमते रहते हैं और त्वचा पर पिगमेंटेशन (Pigmentation) पैदा करते हैं।

आयुर्वेद में Melasma: 'व्यंग' और पित्त-रक्त का संबंध

आधुनिक विज्ञान जिसे Melasma या Hyperpigmentation कहता है, आयुर्वेद में उसे 'व्यंग' (Vyanga) कहा गया है। आयुर्वेद इसे केवल त्वचा का रोग नहीं, बल्कि पूरे शरीर के मेटाबॉलिज़्म और दोषों के बिगड़ने का परिणाम मानता है।

  • भ्राजक पित्त और रंजक पित्त का प्रकोप: आयुर्वेद के अनुसार, त्वचा की चमक को 'भ्राजक पित्त' (Bhrajaka Pitta) नियंत्रित करता है और लिवर व खून को 'रंजक पित्त' (Ranjaka Pitta) रंग देता है। बहुत ज़्यादा तनाव लेने, तीखा-मसालेदार खाने और धूप में रहने से ये दोनों 'पित्त दोष' भड़क जाते हैं। यही भड़की हुई गर्मी त्वचा पर काले धब्बे (Melasma) बना देती है।
  • रक्त दुष्टि (Impure Blood): जब कमज़ोर 'पाचन अग्नि' के कारण पेट में 'आम' बनता है, तो वह आम भड़के हुए पित्त के साथ मिलकर 'रक्त धातु' (खून) को अशुद्ध कर देता है। अशुद्ध खून का सीधा असर चेहरे की त्वचा पर पड़ता है।
  • वात का सूखना: इसके साथ ही जब 'वात दोष' बढ़ता है, तो वह त्वचा की प्राकृतिक नमी को सुखा देता है, जिससे झाइयाँ और भी गहरी और रूखी नज़र आने लगती हैं।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

हम बाहरी क्रीम्स से आपकी त्वचा को छीलने (Peel) का काम नहीं करते। हमारा लक्ष्य आपके लिवर की 'अग्नि' को शांत करना और हार्मोन्स को प्राकृतिक रूप से बैलेंस करना है।

  • पित्त शमन और रक्त शोधन: सबसे पहले प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से खून की गर्मी (पित्त) को शांत किया जाता है और शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकाला जाता है।
  • लिवर डिटॉक्स: लिवर की कार्यक्षमता को सुधारा जाता है ताकि वह अतिरिक्त एस्ट्रोजन और टॉक्सिन्स को खून से फिल्टर कर सके।
  • हार्मोनल बैलेंस: एंडोक्राइन सिस्टम (Endocrine System) को रसायन औषधियों से ताकत दी जाती है ताकि हार्मोन्स का उतार-चढ़ाव स्थिर हो सके।

Melasma (झाइयों) के लिए विशेष आयुर्वेदिक डाइट टेबल

चूँकि झाइयाँ सीधे तौर पर 'पित्त' (गर्मी) और लिवर से जुड़ी हैं, इसलिए आपका आहार ही आपकी त्वचा को हील करने की सबसे बड़ी दवा है।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (स्किन हीलिंग फूड्स - पित्त शामक) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - पित्त वर्धक)
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, परवल, खीरा, कद्दू, पेठा (Ash gourd)। बैंगन, टमाटर, शिमला मिर्च, कच्चा प्याज और लहसुन।
अनाज (Grains) पुराना चावल, जौ, ओट्स, मूंग दाल। मैदा, खमीर (Yeast) वाली ब्रेड, बासी रोटियाँ।
फल (Fruits) सेब, पपीता, तरबूज, अनार, नारियल पानी। ज़्यादा खट्टे फल (कच्चा आम, इमली, संतरा), सिरका (Vinegar)।
डेयरी और वसा (Fats) गाय का शुद्ध घी (त्वचा के लिए अमृत है), ताज़ा मट्ठा (छाछ)। बहुत ज़्यादा गर्म दूध, तीखी और पुरानी चीज़ (Cheese), जंक फूड।
मसाले और हर्ब्स धनिया, जीरा, सौंफ, पुदीना, ताज़ा अदरक। लाल मिर्च, गरम मसाला, हरी मिर्च, अत्यधिक नमक और खटाई।

खून साफ करने और झाइयाँ मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

  • मंजिष्ठा: यह आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली 'रक्त शोधक' (Blood Purifier) औषधि है। यह खून से पित्त की गर्मी को निकालती है और मेलानोसाइट्स को शांत करके त्वचा का प्राकृतिक रंग वापस लाती है।
  • सारिवा: यह जड़ी-बूटी शरीर को अंदर से ठंडा करती है, हार्मोन्स को बैलेंस करती है और चेहरे के काले धब्बों को गहराई से मिटाती है।
  • नीम: यह लिवर को डिटॉक्स करने और खून की अशुद्धियों को जड़ से खत्म करने के लिए बेहतरीन है।
  • शतावरी: महिलाओं में गर्भावस्था या PCOD के कारण बिगड़े हुए हार्मोन्स (एस्ट्रोजन) को प्राकृतिक रूप से बैलेंस करने के लिए यह एक जादुई रसायन है।
  • घृतकुमारी: इसे खाने और चेहरे पर लगाने, दोनों से 'भ्राजक पित्त' शांत होता है और त्वचा को प्राकृतिक हाइड्रेशन (नमी) मिलती है।

पंचकर्म थेरेपी: त्वचा की गहराई से डीप क्लींजिंग

जब झाइयाँ सालों पुरानी हों और क्रीम्स से काली पड़ चुकी हों, तो पंचकर्म शरीर के अंदर की पूरी ओवरहॉलिंग (सर्विसिंग) करता है।

  • विरेचन: Melasma के लिए यह सबसे अचूक थेरेपी है। इसमें औषधीय दस्त कराकर लिवर, आंतों और खून में सालों से जमे हुए 'पित्त' (तेज़ाब/गर्मी) को शरीर से बाहर फेंक दिया जाता है। इसके होते ही त्वचा की चमक वापस आ जाती है।
  • रक्तमोक्षण: जोंक या विशेष प्रक्रिया द्वारा त्वचा के अशुद्ध और टॉक्सिक खून को बाहर निकाला जाता है, जिससे वहाँ नया और शुद्ध खून पहुँचता है और पिगमेंटेशन जड़ से खत्म होता है।
  • मुख लेपम: हल्दी, चंदन, मंजिष्ठा और मुलेठी से बने विशेष आयुर्वेदिक लेप चेहरे पर लगाए जाते हैं जो बाहरी त्वचा की सूजन और कालेपन को प्राकृतिक रूप से काटते हैं।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

हम आपकी त्वचा को बाहर से देखकर क्रीम नहीं देते; हम आपकी नाड़ी से आपके लिवर और हार्मोन्स का सच जानते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह गहराई से समझना कि आपके शरीर में 'पित्त' का स्तर कितना भड़क चुका है और रक्त धातु कितनी अशुद्ध है।
  • हार्मोनल और लाइफस्टाइल ऑडिट: आपका स्ट्रेस लेवल, नींद, पीरियड्स की स्थिति (PCOD आदि) और गर्भनिरोधक गोलियों के उपयोग का गहरा विश्लेषण किया जाता है।
  • पाचन का विश्लेषण: 'जठराग्नि' की स्थिति को समझा जाता है, क्योंकि अगर पेट में एसिडिटी और गैस बन रही है, तो वह सीधे चेहरे पर झाइयों के रूप में दिखेगी।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको ब्लीचिंग क्रीम्स की तरह कोई "रातों-रात गोरा होने" का झूठा वादा नहीं करते; हम आपको स्थायी और प्राकृतिक त्वचा देते हैं।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर 0129 4264323 पर कॉल करें।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर समय की कमी है, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें और अपनी त्वचा की स्थिति दिखाएं।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपकी 'पित्त' प्रकृति और झाइयों के कारण के अनुसार खास रक्त-शोधक जड़ी-बूटियाँ, लिवर टॉनिक्स और एक पित्त-शामक डाइट तैयार की जाती है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

हार्मोन्स को रिसेट (Reset) होने और नई त्वचा कोशिकाओं (Skin cells) के बनने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती 4-6 हफ्ते: शरीर की एसिडिटी और पेट की गर्मी शांत होगी। चेहरे का लगातार गहरा होता कालापन रुक जाएगा।
  • 2 से 3 महीने तक: लिवर डिटॉक्स होने से खून साफ होगा। झाइयों के किनारे (Edges) हल्के पड़ने शुरू होंगे और त्वचा का रूखापन खत्म होगा।
  • 4 से 6 महीने तक: नए और स्वस्थ स्किन सेल्स के बनने से झाइयाँ गहराई से साफ हो जाएंगी। हार्मोन्स संतुलित होने के कारण ये धूप में जाने पर भी जल्दी वापस नहीं लौटेंगी।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपकी त्वचा को स्टेरॉयड और ब्लीचिंग एजेंट (Hydroquinone) से छीलकर कमज़ोर नहीं करते।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ काले धब्बों को नहीं छिपाते; हम लिवर और हार्मोन्स को ठीक करके मेलेनिन के ओवर-प्रोडक्शन (Overproduction) को रोकते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का बहुत ही शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों महिलाओं को झाइयों के इस मानसिक तनाव से बाहर निकाला है।
  • कस्टमाइज्ड केयर: झाइयाँ थायरॉयड से हैं, PCOD से हैं या तनाव से, हमारा इलाज बिल्कुल आपके मूल कारण पर आधारित होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: हमारी औषधियाँ और लेप पूरी तरह प्राकृतिक हैं। ये त्वचा को पतला या धूप के प्रति अति-संवेदनशील (Photosensitive) नहीं बनाते।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य हाइड्रोक्विनोन (Hydroquinone), स्टेरॉयड क्रीम्स और लेज़र से बाहरी त्वचा को छीलना (Peeling)। रक्त शोधन' (Blood purification), लिवर डिटॉक्स और 'पित्त' को शांत करके अंदरूनी हीलिंग करना।
शरीर को देखने का नज़रिया Melasma को केवल त्वचा (Dermatological) की ऊपरी परत की समस्या मानता है। इसे लिवर, हार्मोन्स और खून की खराबी (रक्त दुष्टि) का बाहरी प्रभाव मानता है।
डाइट और जीवनशैली की भूमिका डाइट को महत्व नहीं दिया जाता, केवल सनस्क्रीन लगाने पर ज़ोर होता है। पित्त-शामक डाइट (जैसे लाल मिर्च, खटाई छोड़ना) को इलाज का सबसे बड़ा हथियार मानता है।
लंबा असर क्रीम्स छोड़ने और धूप में जाने पर झाइयाँ अक्सर रिबाउंड (Rebound) कर जाती हैं। लिवर और हार्मोन्स के संतुलित होने से स्थायी समाधान मिलता है और त्वचा की इम्युनिटी बढ़ती है।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

अगर आपके चेहरे पर काले धब्बों के साथ ये गंभीर संकेत दिखें, तो यह केवल सामान्य झाइयाँ नहीं हैं:

  • अगर चेहरे के धब्बों में अचानक भयंकर खुजली शुरू हो जाए या वे लाल होकर सूज जाएं (यह स्किन इन्फेक्शन या एलर्जी हो सकती है)।
  • अगर झाइयों का आकार बहुत तेज़ी से बदल रहा हो, उनके किनारे खुरदरे हो जाएं या उनमें से खून आने लगे (यह स्किन कैंसर या मेलानोमा का संकेत हो सकता है)।
  • अगर झाइयों के साथ-साथ आपके पीरियड्स पूरी तरह रुक जाएं या शरीर पर अनचाहे बाल तेज़ी से आने लगें (यह गंभीर PCOD या हार्मोनल डिसऑर्डर का अलार्म है)।

निष्कर्ष

Melasma (झाइयाँ) कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो आपकी त्वचा पर बाहर से आकर चिपक गई हो। यह आपके शरीर की एक 'अलार्म लाइट' है जो बता रही है कि आपके अंदर 'पित्त' (गर्मी) भड़क चुका है, आपका लिवर टॉक्सिन्स को फिल्टर नहीं कर पा रहा है और आपके हार्मोन्स का संतुलन पूरी तरह क्रैश हो गया है। जब आप इस अलार्म को स्टेरॉयड क्रीम्स या लेज़र के ज़रिए ज़बरदस्ती बंद करने (Mute) की कोशिश करते हैं, तो आप अपनी त्वचा को पतला और कमज़ोर कर देते हैं। यही कारण है कि बाहरी इलाज के बाद झाइयाँ पहले से ज़्यादा गहरी होकर वापस आती हैं। आयुर्वेद आपको 'क्विक-फिक्स' के इस तार्किक भ्रम से बाहर निकालता है। अपनी त्वचा की नहीं, अपने 'लिवर' और 'रक्त' की सफाई करें। मंजिष्ठा और सारिवा जैसी शक्तिशाली रक्त-शोधक जड़ी-बूटियों, 'विरेचन' पंचकर्म और पित्त-शामक आहार की मदद से अपने हार्मोनल सिस्टम को रिसेट करें। केमिकल्स से अपनी त्वचा को जलाना बंद करें, और जीवा आयुर्वेद के साथ अंदरूनी स्वास्थ्य और एक प्राकृतिक, दमकती हुई त्वचा पाएं।

FAQs

Melasma मुख्य रूप से शरीर में हार्मोनल असंतुलन (एस्ट्रोजन/प्रोजेस्टेरोन में उतार-चढ़ाव), सूरज की हानिकारक यूवी (UV) किरणों और लिवर के कमज़ोर होने के कारण होता है। इससे त्वचा की कोशिकाएं (Melanocytes) ज़्यादा मेलेनिन बनाने लगती हैं, जो काले धब्बों के रूप में दिखता है।

आयुर्वेद के अनुसार, झाइयाँ (व्यंग) मुख्य रूप से भ्राजक पित्त (त्वचा की गर्मी) और रंजक पित्त (लिवर और खून की गर्मी) के भड़कने और रक्त धातु के अशुद्ध होने का परिणाम हैं।

बिल्कुल! जब आप तनाव लेते हैं, तो शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है जो सीधे तौर पर अन्य हार्मोन्स को असंतुलित कर देता है। इसके अलावा तनाव से शरीर में पित्त (गर्मी) भड़कता है, जिससे झाइयाँ और ज़्यादा गहरी हो जाती हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान हार्मोन्स के भारी बदलाव (Chloasma) के कारण झाइयाँ आती हैं। कई महिलाओं में डिलीवरी के बाद हार्मोन्स नॉर्मल होने पर ये हल्की पड़ जाती हैं। लेकिन अगर लिवर कमज़ोर हो या पित्त बढ़ा रहे, तो ये हमेशा के लिए चेहरे पर रह जाती हैं।

मंजिष्ठा (Manjistha) रक्त को शुद्ध करने और पित्त को शांत करने के लिए सबसे बेहतरीन जड़ी-बूटी है। इसके अलावा सारिवा (Anantmool) और मुलेठी (Licorice) भी मेलेनिन के ओवर-प्रोडक्शन को रोकती हैं।

जी हाँ! लाल मिर्च, गरम मसाला, अत्यधिक खटाई और सिरका (Vinegar) शरीर में सीधे पित्त (एसिडिटी) को भड़काते हैं। यह गर्मी खून के ज़रिए त्वचा तक पहुँचती है और पिगमेंटेशन (कालेपन) को और ज़्यादा बढ़ा देती है।

नहीं। ब्लीच और केमिकल पील्स त्वचा की ऊपरी परत को जलाकर छील देते हैं। इससे कुछ दिन चेहरा गोरा लगता है, लेकिन त्वचा की प्राकृतिक रक्षा-परत (Skin barrier) टूट जाती है। इसके बाद धूप में जाने पर झाइयाँ भयंकर रूप से रिबाउंड (Rebound) कर जाती हैं।

विरेचन एक डिटॉक्स प्रक्रिया है जिसमें औषधीय दस्त कराए जाते हैं। यह लिवर और आंतों में जमा सालों पुराने पित्त (गर्मी) और ज़हरीले टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर फेंक देता है। खून साफ होते ही चेहरे की झाइयाँ अपने आप गहराई से साफ होने लगती हैं।

नहीं, लेकिन बाज़ार के पैकेटबंद दूध (जिसमें अक्सर हार्मोन्स की मिलावट होती है) से बचें। इसके अलावा दूध के साथ नमक या खट्टे फलों का सेवन (विरुद्ध आहार) तुरंत बंद कर दें, क्योंकि यह खून को अशुद्ध करके त्वचा रोग पैदा करता है।

स्टेरॉयड क्रीम्स के बजाय, चेहरे पर एलोवेरा जेल (घृतकुमारी), शुद्ध चंदन का लेप, या रात को सोते समय 2-3 बूंद कुमकुमादि तैलम (Kumkumadi Tailam) से हल्की मालिश करनी चाहिए। यह त्वचा को अंदर से पोषण देता है और काले धब्बों को काटता है।

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