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गर्मी में Acne का तूफ़ान Sebum, Oil और आंत का गहरा संबंध

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

गर्मियों का मौसम आते ही चेहरे पर अचानक छोटे-छोटे दानों और पिंपल्स की बाढ़ आ जाती है। तेज धूप में बाहर निकलने से त्वचा चिपचिपी होने लगती है और बार-बार चेहरा धोने के बाद भी वह तेल कम होने का नाम नहीं लेता।

ज़्यादातर लोग इसे केवल एक बाहरी समस्या मानते हैं और महंगे फेस वॉश, क्रीम या सीरम बदलना शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चेहरे पर निकलने वाले इस तेल और गंभीर एक्ने का असली तार आपके पेट और पाचन क्रिया से जुड़ा हुआ है?

गर्मी के मौसम में एक्ने क्यों बढ़ जाते हैं?

गर्मियों के दिनों में पर्यावरण का तापमान बढ़ने से हमारे शरीर का मेटाबॉलिज़्म और आंतरिक संतुलन बदलने लगता है। जब बाहर भीषण गर्मी होती है, तो त्वचा खुद को ठंडा रखने के लिए अधिक सक्रिय हो जाती है।

इस मौसम में त्वचा की तेल ग्रंथियाँ बेहद सक्रिय हो जाती हैं, जिससे चेहरे का रूप बदलने लगता है:

  • सीबम का अत्यधिक उत्पादन Excess Sebum Production: तेज गर्मी और उमस के कारण त्वचा के नीचे मौजूद वसामय ग्रंथियाँ Sebaceous glands बहुत अधिक मात्रा में प्राकृतिक तेल यानी सीबम का निर्माण करने लगती हैं।
  • रोमछिद्रों का बंद होना Clogged Pores: हवा में मौजूद धूल-मिट्टी, प्रदूषण और पसीना जब इस अतिरिक्त सीबम के साथ मिलते हैं, तो त्वचा के रोमछिद्र पूरी तरह ब्लॉक हो जाते हैं।
  • आंतों की गर्मी Gut Heat: जब हमारी पाचन क्रिया असंतुलित होती है, तो पेट की गर्मी सीधे त्वचा के माध्यम से बाहर निकलने का प्रयास करती है, जिससे चेहरे पर लाल और दर्दनाक दाने उभर आते हैं।

एक्ने और पिंपल्स के विभिन्न प्रकार

आयुर्वेद के अनुसार त्वचा पर होने वाले एक्ने केवल एक जैसे नहीं होते, बल्कि वे शरीर में मौजूद दोषों के असंतुलन के आधार पर अलग-अलग रूपों में दिखाई देते हैं।

चेहरे पर होने वाले इन दानों को उनकी प्रकृति के आधार पर मुख्य रूप से इन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

  • पित्त-प्रधान एक्ने: ये दाने आकार में लाल, अत्यंत दर्दनाक और मवाद Pus से भरे होते हैं। इनमें बहुत ज्यादा जलन और खुजली महसूस होती है। यह सीधे तौर पर पेट की अत्यधिक गर्मी और रक्त की अशुद्धि का संकेत होते हैं।
  • कफ-प्रधान एक्ने: ये दाने त्वचा की गहराई में होते हैं, जो छूने पर कड़े Cystic महसूस होते हैं। ये बहुत धीरे-धीरे पकते हैं और ठीक होने के बाद चेहरे पर गहरे काले धब्बे या गड्ढे छोड़ जाते हैं। यह त्वचा में अत्यधिक तैलीयपन के कारण होते हैं।
  • वात-प्रधान एक्ने: ये आकार में बहुत छोटे, सूखे और खुरदरे दानों जैसे होते हैं। इनमें मवाद नहीं होता, लेकिन त्वचा में रूखापन और खिंचाव बना रहता है।

एक्ने के मुख्य लक्षण जिन्हें पहचानना है ज़रूरी

त्वचा में आ रहे बदलावों को सही समय पर पहचानना बेहद आवश्यक है ताकि समस्या को बढ़ने से रोका जा सके।

  • चेहरे, पीठ और कंधों पर लगातार छोटे या बड़े लाल दानों का उभरना।
  • चेहरा धोने के कुछ ही मिनटों बाद त्वचा पर अत्यधिक चिपचिपापन महसूस होना।
  • एक्ने वाले हिस्से के आस-पास की त्वचा का गर्म रहना और उसमें लगातार टीस मारना।
  • ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स की संख्या में अचानक से भारी बढ़ोतरी हो जाना।

एक्ने के इलाज में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

अक्सर लोग चेहरे के दानों से इतने परेशान हो जाते हैं कि वे जल्दबाज़ी में ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो त्वचा को हमेशा के लिए खराब कर देते हैं।

इन गलतियों के कारण त्वचा की बनावट और आंतरिक स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है:

  • पिंपल्स को ज़बरदस्ती फोड़ना Popping Pimples: चेहरे पर दाना दिखते ही उसे उंगलियों से दबाकर फोड़ देना सबसे बड़ी गलती है। इससे बैक्टीरिया त्वचा की गहराई में चले जाते हैं, जिससे संक्रमण फैल जाता है और चेहरे पर जीवनभर के लिए गड्ढे पड़ जाते हैं।
  • केमिकल वाले कड़े प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल: विज्ञापनों को देखकर सैलिसिलिक एसिड या बेंज़ोइल पेरोक्साइड से भरे कड़े फेस वॉश का बार-बार इस्तेमाल करना त्वचा के प्राकृतिक मॉइस्चर को छीन लेता है।
  • पेट की खराबी को नज़रअंदाज़ करना: चेहरे पर अनगिनत लेप लगाना लेकिन खानपान में वही तली-भुनी चीजें खाते रहना एक्ने को कभी ठीक नहीं होने देता। जब तक आंतों की कमजोरी दूर नहीं होगी, तब तक त्वचा साफ नहीं हो सकती।
  • गर्मियों में बहुत ज़्यादा चाय या कॉफ़ी पीना: यह सोचकर कि कैफीन से सुस्ती दूर होगी, खाली पेट डार्क कॉफी या तेज चाय पीना आंतों में भयंकर एसिडिटी और पित्त को भड़काता है, जिससे एक्ने का तूफ़ान आ जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार एक्ने और आंत का गहरा विज्ञान

आधुनिक विज्ञान जिसे केवल हार्मोनल बदलाव या बैक्टीरिया का संक्रमण मानता है, आयुर्वेद उसे 'मुखदूषिका' या 'युवानपिड़का' कहता है। इसका सीधा संबंध हमारी जठराग्नि और पक्वाशय Digestive Tract से है।

जब हमारा पाचन तंत्र कमज़ोर होता है, तो भोजन सही तरीके से पचने के बजाय पेट में सड़ने लगता है। इस अधपचे भोजन से 'आम' Toxins का निर्माण होता है। यह चिपचिपा विषैला पदार्थ रक्त में मिलकर पूरे शरीर में घूमने लगता है। चूंकि त्वचा हमारे शरीर का सबसे बड़ा उत्सर्जन अंग है, इसलिए यह विषैला कचरा सीबम के रास्ते बाहर निकलने की कोशिश करता है। जब गर्मियों में पित्त दोष प्राकृतिक रूप से कुपित होता है, तो यह 'आम' और अशुद्ध रक्त मिलकर चेहरे पर भयंकर एक्ने के रूप में फूट पड़ते हैं।

आंतों को साफ और त्वचा को चमकदार बनाने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने शरीर के आंतरिक सिस्टम को साफ रखने के लिए आपको गर्मियों में अपने खानपान में बेहद सावधानी बरतनी होगी।

इस संतुलित तालिका का पालन करके आप पेट की गर्मी और चेहरे के तेल को नियंत्रित कर सकते हैं:

आहार की श्रेणी क्या खाएं पित्त शांत करने वाले और ठंडे खाद्य क्या न खाएं तासीर में गर्म और तेल बढ़ाने वाले
अनाज पुराना चावल, जौ का दलिया, ओट्स, मूंग की धुली दाल। मैदा, सूजी, अत्यधिक बेसन, गरम मसालेदार पुलाव।
सब्ज़ियाँ लौकी, तरोई, कद्दू, खीरा, परवल, ककड़ी हल्की पकी हुई। बैंगन, टमाटर, अरबी, कच्चा प्याज, कटहल।
फल मीठा तरबूज, खरबूजा, पका हुआ पपीता, अनार, भीगी हुई मुनक्का। खट्टे आम, बिना मौसम के फल, अत्यधिक खट्टे नींबू या संतरे।
पेय पदार्थ मटके का शीतल पानी, सौंफ और मिश्री का पानी, नारियल पानी। बर्फ का अत्यंत ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स, डार्क कॉफी, शराब।

गर्मियों के दिनों में पित्त शांत करने वाले आहार को प्राथमिकता देना ही आपकी त्वचा को अंदरूनी ठंडक प्रदान कर सकता है।

एक्ने को जड़ से खत्म करने वाली जादुई जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे अद्भुत रसायन दिए हैं जो बिना किसी साइड इफेक्ट के आंतों के कचरे को साफ करते हैं और त्वचा की रंगत को निखारते हैं:

  • नीम Neem: यह कड़वी जड़ी बूटी एक बेहतरीन एंटी-बैक्टीरियल और रक्त शोधक है नीम के फायदे त्वचा के संक्रमण को दूर करने और जमे पित्त को बाहर निकालने में बेजोड़ हैं।
  • मंजिष्ठा Manjistha: आयुर्वेद में इसे ब्लड प्यूरीफायर माना गया है मंजिष्ठा के गुण लीवर को डिटॉक्स करते हैं और चेहरे के जिद्दी दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद करते हैं।
  • धनिया Coriander: पेट की भयंकर गर्मी, एसिडिटी और त्वचा की जलन को शांत करने के लिए धनिया का पानी एक जादुई औषधि की तरह काम करता है।
  • गिलोय Guduchi: यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। गिलोय के लाभ पाचन तंत्र को दुरुस्त करके रक्त में मौजूद टॉक्सिन्स को नष्ट करने में मदद करते हैं।
  • त्रिफला Triphala: आंवला, हरड़ और बहेड़ा का यह मिश्रण आंतों की गहरी सफाई करता है। त्रिफला चूर्ण का नियमित सेवन पेट को साफ रखता है जिससे चेहरे पर चमक आती है।

त्वचा का कायाकल्प करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब शरीर के भीतर पित्त और टॉक्सिन्स बहुत गहरे स्तर पर जमा हो जाते हैं, तो पंचकर्म की बाहरी और आंतरिक क्रियाएं शरीर को पूरी तरह रीबूट कर देती हैं:

  • विरेचन Virechana: पित्त दोष और रक्त की अशुद्धियों को दूर करने के लिए यह सबसे मुख्य थेरेपी है। विरेचन चिकित्सा के माध्यम से आंतों में जमा सड़ा हुआ पित्त और चिपचिपे टॉक्सिन्स दस्त के रास्ते बाहर निकाल दिए जाते हैं, जिससे एक्ने की समस्या जड़ से खत्म होती है।
  • उद्वर्तन Udvartana: औषधीय जड़ी-बूटियों के सूखे चूर्ण से शरीर और प्रभावित हिस्सों पर की जाने वाली यह मालिश त्वचा के अत्यधिक तैलीयपन को सोख लेती है। उद्वर्तन थेरेपी रोमछिद्रों को खोलती है और रक्त संचार को सुधारती है।
  • लेपम Lepam: नीम, चंदन, मंजिष्ठा और मुलतानी मिट्टी जैसी बूटियों का विशेष लेप चेहरे पर लगाया जाता है जो त्वचा की सूजन, लालिमा और जलन को तुरंत शांत करता है।

त्वचा के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

वर्षों के गलत खानपान और कड़े केमिकल्स के इस्तेमाल से डैमेज हुई त्वचा और आंतों को दोबारा स्वस्थ होने में थोड़ा समय और अनुशासन की आवश्यकता होती है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों के सेवन से आपकी जठराग्नि सुधरने लगती है। पेट का भारीपन दूर होता है, रक्त साफ होने लगता है और चेहरे पर नए बड़े एक्ने का निकलना काफी हद तक कम हो जाता है।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और विशेष रसायनों के प्रभाव से पुराने एक्ने के दाग-धब्बे हल्के होने लगते हैं। त्वचा की तेल ग्रंथियाँ संतुलित हो जाती हैं और चेहरा अत्यधिक चिपचिपा होना बंद हो जाता है।
  • 5-6 महीने: आपका पूरा मेटाबॉलिज़्म और पाचन क्रिया सुदृढ़ हो जाती है। त्वचा को भीतर से पोषण मिलता है, जिससे बिना किसी केमिकल क्रीम के चेहरा प्राकृतिक रूप से चमकदार, साफ और बेदाग हो जाता है।

आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

एक्ने के उपचार को लेकर आधुनिक एलोपैथी और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर होता है।

इस अंतर को आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य बैक्टीरिया को मारने के लिए एंटीबायोटिक्स और तेल सुखाने वाली कड़ी दवाएं देना। जठराग्नि को ठीक करना, रक्त को शुद्ध करना और बढ़े हुए पित्त को शांत करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल त्वचा की एक स्थानीय Local या बैक्टीरियल समस्या मानना। इसे अशुद्ध रक्त, कमज़ोर पाचन और शरीर में जमा टॉक्सिन्स का परिणाम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल खानपान में विशेष बदलाव की सलाह नहीं दी जाती, केवल बाहर से सफाई पर ज़ोर। भोजन में घी/तेल का सही संतुलन, ठंडी तासीर की चीजें और सही जीवनचर्या पर ज़ोर।
लंबा असर दवाइयाँ बंद करते ही या मौसम बदलते ही एक्ने दोबारा वापस आ जाते हैं। शरीर भीतर से साफ हो जाता है, जिससे त्वचा स्थाई रूप से स्वस्थ और चमकदार बनी रहती हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

यद्यपि आयुर्वेद के माध्यम से एक्ने और पेट की गर्मी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है, लेकिन यदि आपको अपनी त्वचा या शरीर में ये गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए:

  • यदि चेहरे के दानों में से लगातार पीला मवाद निकल रहा हो और चेहरा पूरी तरह सूज गया हो।
  • एक्ने के साथ-साथ यदि आपको लगातार तेज बुखार बना रहता हो।
  • यदि दानों के कारण चेहरे पर असहनीय दर्द हो, जिससे खाना चबाने या बोलने में भी दिक्कत हो रही हो।
  • बिना किसी कारण के अचानक चेहरे, होठों या आँखों के आस-पास गंभीर सूजन आ जाना।

निष्कर्ष

आपकी त्वचा आपके आंतरिक स्वास्थ्य का आईना होती है। जब तक आपके शरीर के भीतर यानी आपकी आंतों में कचरा और अत्यधिक गर्मी जमा रहेगी, तब तक महंगे से महंगा फेस वॉश भी आपके चेहरे को साफ नहीं रख सकता। चेहरे पर बार-बार उभरने वाले ये दर्दनाक दाने कोई मामूली कॉस्मेटिक समस्या नहीं हैं; यह आपके शरीर का एक अलार्म है कि आपका लिवर और पाचन तंत्र भोजन के विषैले तत्वों को डिकोड नहीं कर पा रहा है। इस गर्मियों में रसायनों और कड़े एसिड्स के जाल से बाहर निकलें। कच्ची और ठंडी तासीर वाली चीज़ों को सही ढंग से खाएं, नीम और मंजिष्ठा जैसी बूटियों की शक्ति को अपनाएं, और अपनी त्वचा को अंदर से बेदाग व पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

 तरबूज तासीर में ठंडा और पानी से भरपूर होता है, जो गर्मियों के लिए बहुत अच्छा है। लेकिन अगर आप इसे धूप से तुरंत आकर खाते हैं, या इसके ठीक बाद दूध या पानी पी लेते हैं, तो यह विरुद्ध आहार बन जाता है। इससे पाचन बिगड़ता है और चेहरे पर दाने निकल सकते हैं।

 मुल्तानी मिट्टी त्वचा के अतिरिक्त तेल को सोखने में मदद करती है, लेकिन इसे रोज़ाना लगाने से त्वचा अत्यधिक रूखी हो जाती है। जब त्वचा बहुत ज्यादा सूख जाती है, तो हमारी ग्रंथियाँ खुद को बचाने के लिए और अधिक सीबम बनाने लगती हैं, जिससे एक्ने बढ़ सकते हैं। इसे हफ्ते में सिर्फ दो बार लगाना ही काफी है।

इसे एडल्ट एक्ने कहा जाता है। इसका कारण केवल हार्मोन नहीं, बल्कि आपका खराब डाइजेशन, देर रात तक जागना और लगातार बाहर का प्रोसेस्ड फूड खाना है। जब आंतों में पुराना टॉक्सिन जमा हो जाता है, तो वह बड़ी उम्र में भी एक्ने के रूप में बाहर आता है।

 अगर आपको कफ-प्रधान या बहुत अधिक ऑयली एक्ने हैं, तो सीधे चेहरे पर घी लगाने से रोमछिद्र और ब्लॉक हो सकते हैं। हालांकि, रात को नाभि में शुद्ध गाय का घी लगाना या गुनगुने दूध में आधा चम्मच घी डालकर पीना आपकी आंतों को चिकनाई देता है और पेट की गर्मी को शांत कर एक्ने कम करता है।

 बिल्कुल नहीं। बार-बार केमिकल वाले फेस वॉश का इस्तेमाल करने से त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षात्मक परत (Skin Barrier) नष्ट हो जाती है। इससे त्वचा और अधिक संवेदनशील हो जाती है और बैक्टीरिया का हमला बढ़ जाता है। दिन में केवल दो बार सादे या नीम के पानी से चेहरा धोना पर्याप्त है।

 ताजा एलोवेरा जेल बहुत अच्छा होता है, लेकिन पौधे से निकालने के तुरंत बाद उसमें से एक पीला लिक्विड (Aloesin) निकलता है, जो त्वचा में भयंकर जलन और एलर्जी पैदा कर सकता है। इसलिए पौधे को काटने के बाद थोड़ी देर सीधा खड़ा रखें, उसे अच्छे से धोएं और फिर साफ जेल ही चेहरे पर लगाएं।

 गर्मियों में गर्म पानी से चेहरा धोने से त्वचा का तापमान और बढ़ जाता है, जिससे पित्त दोष कुपित होता है और तेल ग्रंथियाँ ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं। चेहरे के लिए हमेशा मटके के पानी या सामान्य नल के पानी का ही उपयोग करना चाहिए।

 हाँ, बहुत गहरा संबंध है। जब आप तनाव में होते हैं या रात को देर तक जागते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है। यह हार्मोन सीधे त्वचा की तेल ग्रंथियों को सीबम बनाने का सिग्नल देता है, जिससे रात भर में ही पिंपल्स बड़े और दर्दनाक हो जाते हैं।

 नारियल तेल कॉमेडोजेनिक होता है, यानी यह रोमछिद्रों को बंद कर सकता है। अगर आपकी त्वचा ऑयली या एक्ने-प्रोन है, तो चेहरे पर सीधे नारियल तेल लगाने से नए दाने निकल सकते हैं। दाग-धब्बों के लिए मंजिष्ठा या चंदन के लेप का उपयोग अधिक सुरक्षित है।

 हाँ, गर्मियों में भुने जीरे और पुदीने के साथ ताजी छाछ पीना जठराग्नि को संतुलित करता है। यह पेट को ठंडा रखती है और लीवर से टॉक्सिन्स को साफ करती है, जिससे खून शुद्ध होता है और त्वचा पर तेल का अत्यधिक उत्पादन धीरे-धीरे कम होने लगता है

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