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डैंड्रफ शैंपू बदलते रहे – जड़ कारण क्यों नहीं सुधरता?

Information By Dr. Keshav Chauhan

आप सुबह तैयार होकर अपनी पसंदीदा काली शर्ट या ड्रेस पहनते हैं। जैसे ही आप कंघी करते हैं, आपके कंधों पर सफेद रंग का पाउडर सा गिरने लगता है। यह सच में बहुत ज्यादा शर्मिंदगी भरा और झल्लाहट से भरा अनुभव होता है। आप हर महीने टीवी पर विज्ञापन देखकर एक नया और महंगा एंटी-डैंड्रफ शैंपू खरीद लाते हैं। शुरू के कुछ दिन सब बिल्कुल ठीक रहता है। आपको लगता है कि डैंड्रफ हमेशा के लिए चला गया। लेकिन जैसे ही आप वह शैंपू लगाना छोड़ते हैं, कुछ ही दिनों में वह जिद्दी रूसी और भयंकर खुजली पहले से भी ज्यादा ताकत के साथ वापस लौट आती है। यह एक कभी न खत्म होने वाला चक्र बन जाता है।

अक्सर डर्मेटोलॉजिस्ट आपको कीटोकोनाजोल (Ketoconazole) या जिंक पाइरिथियोन वाले केमिकल लोशन लिख देते हैं। वे कहते हैं कि इसे बालों में लगाकर छोड़ दें। लेकिन यह इस बीमारी की पूरी सच्चाई नहीं है। डैंड्रफ सिर्फ आपके सिर की बाहरी त्वचा का रूखापन नहीं है। यह आपके शरीर के अंदर बज रहा एक बहुत बड़ा अलार्म है। आपका खून और पेट अंदर से अशुद्ध हो चुके हैं। जब तक आप अपने खून को अंदर से साफ नहीं करेंगे और अपनी इम्युनिटी को मजबूत नहीं बनाएंगे। तब तक आप इस भयंकर खुजली से अपनी एंग्जायटी को मैनेज नहीं कर पाएंगे। प्राकृतिक रूप से अंदर से ठीक होना ही एकमात्र स्थायी रास्ता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे पुराने माइग्रेन से राहत पाना अंदरूनी सफाई से ही संभव है।

यह जिद्दी डैंड्रफ आखिर है क्या?

डैंड्रफ (रूसी) को सिर्फ सूखी त्वचा समझ लेना एक बहुत बड़ी भूल है। यह असल में आपके स्कैल्प (सिर की त्वचा) पर पनपने वाले एक फंगस और आपके शरीर के तेल का बहुत ही खराब रिएक्शन है।

  • फंगस का हमला: हमारे सिर की त्वचा पर 'मैलासेज़िया' (Malassezia) नाम का एक फंगस हमेशा रहता है। लेकिन जब शरीर अंदर से कमजोर होता है, तो यह फंगस तेजी से बढ़ने लगता है।
  • सीबम (तेल) का अधिक बनना: जब आपके हार्मोन्स या पेट खराब होते हैं, तो स्कैल्प की ग्रंथियां बहुत ज्यादा तेल छोड़ती हैं। फंगस इसी तेल को खाता है और त्वचा की ऊपरी परत को बहुत तेजी से झड़ने पर मजबूर कर देता है।

रूसी या डैंड्रफ कितने प्रकार का हो सकता है?

डैंड्रफ हर इंसान में एक जैसा नहीं होता। आपके शरीर के अंदरूनी दोषों (वात, पित्त, कफ) के आधार पर यह अलग-अलग रूप और आकार ले लेता है।

  • सूखा डैंड्रफ (वातजनित): यह सबसे आम है। इसमें बारीक, सफेद और पाउडर जैसे कण होते हैं जो कंघी करते ही कपड़ों पर बर्फ की तरह झड़ने लगते हैं।
  • तैलीय डैंड्रफ (कफ-पित्त जनित): यह बहुत जिद्दी होता है। इसमें बड़े, पीले और चिपचिपे चकत्ते होते हैं जो स्कैल्प पर बुरी तरह चिपके रहते हैं और भयंकर खुजली करते हैं।
  • सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस (Seborrheic Dermatitis): यह डैंड्रफ का सबसे भयंकर रूप है। इसमें सिर की त्वचा एकदम लाल हो जाती है और वहां से मोटी-मोटी पपड़ियां झड़ने लगती हैं।
  • फंगल डैंड्रफ: जब इम्युनिटी गिर जाती है तो यीस्ट इन्फेक्शन बहुत तेजी से फैलता है, जो आम शैंपू से कभी नहीं मरता।

इसके लक्षण और संकेत कैसे पहचानें?

आपका शरीर आपको बहुत सारे साफ संकेत देता है कि यह सिर्फ बाहरी धूल नहीं है, बल्कि अंदरूनी सिस्टम खराब हो रहा है। इन संकेतों को समय रहते समझना बहुत जरूरी है।

  • सिर में लगातार एक बहुत ही परेशान करने वाली खुजली का बने रहना।
  • बालों के बीच और कंधों पर सफेद या हल्के पीले रंग के छिलकों का साफ दिखाई देना।
  • खुजलाने की वजह से स्कैल्प का एकदम लाल हो जाना और जलन महसूस होना।
  • डैंड्रफ के साथ-साथ बालों का गुच्छों में टूटना और भयंकर हेयर फॉल होना।
  • माथे पर, भौहों (Eyebrows) के बीच और पीठ पर लाल रंग के मुंहासे या दाने निकल आना।

डैंड्रफ बार-बार लौटने के मुख्य कारण क्या हैं?

महंगे शैंपू इसलिए फेल हो जाते हैं क्योंकि वे उस जड़ पर काम ही नहीं करते जो इस डैंड्रफ को हर रोज अंदर से पैदा कर रही है।

  • कमजोर पेट और टॉक्सिन्स: जब आपका पाचन तंत्र खराब होता है, तो पेट में 'आम' (गंदगी) बनता है। यह गंदगी खून को अशुद्ध करती है, जो स्कैल्प पर फंगस को पनपने का मौका देती है।
  • स्ट्रेस और हार्मोनल बदलाव: लगातार तनाव के प्रभाव आपके इम्यून सिस्टम को सुन्न कर देते हैं। इससे स्कैल्प पर तेल का उत्पादन अनियंत्रित हो जाता है।
  • खराब खान-पान: बहुत ज्यादा मीठा, जंक फूड और रिफाइंड चीजें खाना सीधे तौर पर फंगस (यीस्ट) का सबसे पसंदीदा भोजन है।
  • नींद का पूरा न होना: लगातार काम के बोझ से नींद की कमी शरीर की रिपेयर प्रक्रिया को रोक देती है, जिससे त्वचा की कोशिकाएं अस्वस्थ हो जाती हैं।

इसे नज़रअंदाज़ करने पर क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

अगर आप इसे सिर्फ एक कॉस्मेटिक समस्या मानकर नजरअंदाज करेंगे या केवल केमिकल वाले शैंपू बदलते रहेंगे, तो इसके परिणाम बहुत भयंकर होंगे।

  • स्थायी गंजापन (Permanent Hair Loss): फंगस बालों की जड़ों (Hair follicles) को पूरी तरह डैमेज कर देता है। बाल इतने कमजोर हो जाते हैं कि वापस नहीं उगते।
  • भयंकर स्किन इन्फेक्शन: लगातार खुजलाने से सिर की त्वचा फट जाती है और वहां दर्दनाक बैक्टीरियल इन्फेक्शन (फोड़े-फुंसी) हो सकते हैं।
  • चेहरे और पीठ पर गंभीर मुंहासे: डैंड्रफ की पपड़ियां जब माथे और पीठ पर गिरती हैं, तो वहां भी भयंकर एक्ने और सिस्ट पैदा कर देती हैं।
  • सामाजिक एकांतवास और डिप्रेशन: कपड़ों पर हमेशा सफेद पाउडर दिखने की शर्मिंदगी इंसान के आत्मविश्वास को पूरी तरह कुचल देती है।

इसका निदान कैसे किया जाता है?

डर्मेटोलॉजिस्ट अक्सर बस दूर से बालों को देखकर एक नया शैंपू लिख देते हैं। लेकिन डैंड्रफ की असली जड़ तक पहुंचने के लिए गहराई से जांच जरूरी है।

  • स्कैल्प का फिजिकल एग्जामिनेशन: डॉक्टर बालों की जड़ों में देखते हैं कि त्वचा लाल है, उसमें पपड़ियां हैं या वह तैलीय है।
  • स्किन स्क्रेपिंग (Skin Scraping): सिर की पपड़ी को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर यह देखना कि यह फंगस है या सोरायसिस।
  • ब्लड टेस्ट: यह देखने के लिए कि कहीं शरीर में जिंक, विटामिन बी, या आयरन की भारी कमी तो नहीं है जो त्वचा को रूखा बना रही है।
  • हार्मोनल और थायरॉइड की जांच: कई बार यह हार्मोनल असंतुलन या थायरॉइड की वजह से त्वचा के बहुत ज्यादा रूखे होने का नतीजा होता है।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है?

आयुर्वेद डैंड्रफ को एक बहुत ही गहरी सिस्टमिक बीमारी मानता है। आयुर्वेद में इसे 'दारुणक' (Darunaka) कहा गया है, जो सीधे तौर पर खून की अशुद्धि से जुड़ा है।

  • वात और कफ का भयंकर असंतुलन: जब शरीर में वात (रूखापन) और कफ (चिपचिपापन) दोनों एक साथ बिगड़ जाते हैं, तो स्कैल्प पर चिपचिपी पपड़ियां जमने लगती हैं।
  • रक्त धातु की अशुद्धि: जब खून में बहुत ज्यादा गर्मी (पित्त) और टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं, तो त्वचा बीमार पड़ जाती है।
  • अग्नि की कमजोरी: जब आपकी पाचन अग्नि ठंडी पड़ जाती है। तो शरीर में 'आम' (गंदगी) का पहाड़ बन जाता है। आयुर्वेद इसी गंदगी को बाहर निकालता है, और यही किसी भी प्राकृतिक उपचार का असली आधार है।

जीवा आयुर्वेद का समग्र प्रबंधन क्या है?

हम आपके बालों को कठोर केमिकल से नहीं धोते। हम आपके शरीर के अंदर के वातावरण को ही पूरी तरह बदल देते हैं ताकि फंगस खुद ब खुद मर जाए।

  • रक्त शोधन (खून की सफाई): जड़ी-बूटियों के माध्यम से खून में तैर रहे सारे टॉक्सिन्स को बाहर निकालना।
  • दोष संतुलन: भड़के हुए वात और कफ को बिल्कुल शांत करना ताकि स्कैल्प का प्राकृतिक तेल (Sebum) संतुलित हो सके।
  • ओजस (इम्यूनिटी) बढ़ाना: शरीर की अपनी ताकत को इतना बढ़ा देना कि फंगस दोबारा हमला ही न कर पाए।
  • मानसिक शांति: बीमारी और हेयर फॉल के भारी तनाव को कम करने के लिए खास तनाव कम करने की विधियां अपनाई जाती हैं।

डैंड्रफ के लिए 4 सबसे बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां कौन सी हैं?

प्रकृति ने हमें स्कैल्प के इन्फेक्शन को खत्म करने के लिए बहुत ही जादुई चीजें दी हैं। ये शैंपू की तरह त्वचा को रूखा नहीं बनाती हैं।

  • नीम (Neem): यह प्रकृति का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल पेड़ है। यह खून की गहराई में जाकर फंगस को जड़ से काट देता है।
  • आंवला (Amla): यह विटामिन सी का पावरहाउस है। यह स्कैल्प के पीएच (pH) लेवल को बिल्कुल संतुलित कर देता है और रूखेपन को मिटाता है।
  • भृंगराज (Bhringraj): इसे बालों का राजा (Keshraj) कहा जाता है। यह खुजली को शांत करता है, जड़ों को मजबूत करता है और नए बाल उगाता है।
  • खदिर (Khadir): आयुर्वेद में इसे त्वचा रोगों का सबसे बड़ा दुश्मन माना गया है। यह अशुद्धियों को सोख लेता है और भयंकर खुजली को तुरंत रोकता है।

आयुर्वेदिक थेरेपी कैसे काम करती है?

जब बीमारी खून और त्वचा की गहराई में बस जाए, तो बाहर से लगाया जाने वाला तेल या शैंपू काफी नहीं होता। हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी इसे सीधा उखाड़ फेंकती है।

  • शिरो अभ्यंग (Shiro Abhyanga): खास औषधीय तेलों (जैसे नीलीभृंग्यादि तेल) से सिर की बहुत गहराई तक मालिश की जाती है। यह स्कैल्प के ब्लड सर्कुलेशन को तेज करता है।
  • शिरोलेप (Shirolepa): नीम, त्रिफला और अन्य जड़ी-बूटियों का एक औषधीय लेप सिर पर लगाया जाता है। यह लेप फंगस को मारता है और जिद्दी पपड़ियों को जड़ से उखाड़ देता है।
  • विरेचन (Virechana): यह एक पंचकर्म चिकित्सा है। इसके जरिए लिवर में जमा हुआ सालों पुराना विषैला पित्त मल के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है। पेट साफ होते ही डैंड्रफ खत्म हो जाता है।

हार्मोनल और मेटाबॉलिक संतुलन के लिए डाइट प्लान

आप जो खाते हैं, वह सीधे तौर पर आपके स्कैल्प के तेल को बनाता है। डैंड्रफ को खत्म करने के लिए एक साफ और अल्कलाइन डाइट बहुत जरूरी है।

पावर फूड्स:

  • गाय का शुद्ध घी: यह स्कैल्प की अंदरूनी खुश्की को खत्म करता है और शरीर में अच्छे फैट्स को बढ़ाता है।
  • कड़वी और हरी सब्जियां: लौकी, करेला और मेथी खून को प्राकृतिक रूप से साफ करते हैं और फंगस को भूखा मारते हैं।
  • पाचन सहायक: पेट को हर हाल में साफ रखने के लिए त्रिफला के फायदे जानकर उसका रोज रात को सेवन करें। साफ आंतों का मतलब है साफ और मजबूत बाल।

इन चीजों से बिल्कुल बचें:

  • रिफाइंड चीनी और मैदा: चीनी फंगस (यीस्ट) का सबसे पसंदीदा खाना है। चीनी खाते ही डैंड्रफ रातों-रात दुगना हो जाता है।
  • खट्टी और फर्मेंटेड चीजें: पुराना दही, अचार और सिरका। यह शरीर में पित्त की गर्मी को तुरंत भड़का देते हैं और खुजली बढ़ाते हैं।
  • जंक फूड: पिज्जा, बर्गर और डीप फ्राइड चीजें पेट में गंभीर पाचन संबंधी समस्याएं पैदा करती हैं जो सीधा स्कैल्प को बीमार करती हैं।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जांच कैसे करते हैं?

जब एंटी-डैंड्रफ शैंपू काम करना बंद कर देता है, तब हम आपकी बीमारी को गहराई से समझते हैं। हम सिर्फ सफेद छिलकों को नहीं देखते, हम शरीर की असली चीख को सुनते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि आपके अंदर खून में और लिवर में कितनी अशुद्धि जमा हो गई है।
  • लक्षणों का मूल्यांकन: यह समझना कि आपका डैंड्रफ सर्दियों में ज्यादा बढ़ता है या पसीना आने पर चिपचिपा हो जाता है।
  • लाइफस्टाइल रिव्यू: आपके सोने के समय और स्ट्रेस लेवल को बारीकी से समझना। एक शांत दिमाग की कमी भी बालों को झाड़ देती है।
  • मूल कारण की पहचान: यह तय करना कि बीमारी सिर्फ पसीने और धूल से है या आपका हाजमा पूरी तरह खराब हो चुका है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको जिंदगी भर महंगे शैंपू खरीदने के जंजाल में नहीं फंसाते। हमारा लक्ष्य आपको एक बहुत ही सुरक्षित और स्थायी इलाज देना है।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे 0129 4264323 पर कॉल करें। हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपसे तुरंत बात करेंगे।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80+ क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर को दिखा सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: घर बैठे वीडियो कॉल से सिर्फ 49 रुपये में बात करें (सामान्य फीस 299 रुपये है)।
  • विस्तृत जांच: आपके डैंड्रफ और हेयर फॉल की पुरानी हिस्ट्री बहुत ध्यान से सुनी जाती है।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके लिए खास खून साफ करने वाली जड़ी-बूटियों, लेप और डाइट का एक पूरा रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

डैंड्रफ सालों की खराब जीवनशैली का नतीजा है। शरीर के खून और स्कैल्प को पूरी तरह रिसेट होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपकी भयंकर खुजली में बहुत ज्यादा आराम आ जाएगा। पेट साफ रहने लगेगा। बालों का टूटना थोड़ा कम होगा।
  • 1 से 3 महीने तक: सफेद पपड़ियों का गिरना लगभग बंद हो जाएगा। स्कैल्प साफ दिखने लगेगा। शरीर से गंदगी निकलने के कारण प्राकृतिक रूप से स्वस्थ वजन घटाने का अनुभव भी हो सकता है।
  • 3 से 6 महीने तक: खून पूरी तरह से साफ हो जाएगा। बालों की जड़ें मजबूत होंगी और नए बाल उगने लगेंगे। अब आप कोई भी आम हर्बल शैंपू इस्तेमाल कर सकेंगे और डैंड्रफ वापस नहीं आएगा।

आप किन परिणामों की उम्मीद कर सकते हैं?

अगर आप ईमानदारी से आयुर्वेदिक नियमों और डाइट का पालन करते हैं, तो आपकी त्वचा और बाल हमेशा के लिए बदल जाएंगे।

  • कंधों और कपड़ों पर गिरने वाले शर्मनाक सफेद डैंड्रफ से हमेशा के लिए पक्का छुटकारा।
  • भयंकर खुजलाने और स्कैल्प में होने वाली जलन का बिल्कुल खत्म होना।
  • बालों का गिरना रुकना और उनकी प्राकृतिक चमक का वापस लौटना।
  • डैंड्रफ की वजह से माथे पर होने वाले मुँहासों का साफ होना।
  • महंगे, केमिकल युक्त एंटी-डैंड्रफ शैंपू से जीवन भर के लिए आज़ादी।

मरीज़ों के अनुभव

मैं कई वर्षों से गंभीर बाल झड़ने की समस्या से परेशान थी। शैंपू और तेल से कोई फायदा नहीं हुआ। मैंने आयुर्वेदिक उपचार लेने के बारे में सोचा, लेकिन मुझे इस पर पूरा भरोसा नहीं था। फिर एक दिन मैंने टीवी पर बालों की समस्याओं पर डॉ. चौहान का कार्यक्रम देखा और मुझे लगा कि आयुर्वेद वास्तव में फर्क ला सकता है—और ऐसा हुआ भी। अब हर सुबह मुझे अपने तकिए पर बाल नहीं दिखाई देते। जिवा का धन्यवाद।

सुनीता तंवर

फरीदाबाद

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपको शैंपू कंपनियों के आजीवन ग्राहक नहीं बनाते। हम आपकी इम्युनिटी को मजबूत बनाकर आपको हमेशा के लिए आज़ाद करते हैं।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ खोपड़ी को बाहर से साफ नहीं करते। हम आपके खून और लिवर की बहुत गहराई से सफाई करते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों से बिगड़े हुए त्वचा और स्कैल्प रोगों के इलाज में शानदार अनुभव रखने वाले बेहतरीन डॉक्टर हैं।
  • कोई साइड इफेक्ट नहीं: केमिकल शैंपू की तरह हमारी प्राकृतिक जड़ी-बूटियां आपके बालों को रूखा और बेजान नहीं बनातीं।
  • स्थायी समाधान: हमारा लक्ष्य आपको जड़ से हमेशा के लिए ठीक करना है, ताकि आप आत्मविश्वास के साथ जिंदगी जी सकें।

आधुनिक बनाम आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

यह समझना बहुत जरूरी है कि आप अपने बालों के साथ कैसा बर्ताव कर रहे हैं। दोनों चिकित्सा पद्धतियों में जमीन-आसमान का अंतर है।

  • आधुनिक चिकित्सा: यह दृष्टिकोण पूरी तरह से फंगस को बाहर से मारने वाले केमिकल शैंपू और लोशन पर निर्भर करता है। ये शैंपू फंगस को मारते हैं, लेकिन स्कैल्प के प्राकृतिक तेल (Natural Oils) को भी पूरी तरह छीन लेते हैं। इससे त्वचा और ज्यादा रूखी हो जाती है और शैंपू छोड़ते ही डैंड्रफ दुगनी ताकत से लौटता है। इसे रिबाउंड इफेक्ट (Rebound Effect) कहते हैं।
  • आयुर्वेद: यह शरीर को खुद को हील करने का पूरा मौका देता है। आयुर्वेद खून की गर्मी को शांत करता है। पेट के टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है। इससे स्कैल्प का प्राकृतिक पीएच (pH) और सीबम प्रोडक्शन खुद-ब-खुद संतुलित हो जाता है, और फंगस अपने आप भूखा मर जाता है।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

डैंड्रफ को हमेशा एक आम कॉस्मेटिक समस्या मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। कुछ बहुत ही खतरनाक संकेतों को तुरंत पहचानना जरूरी है।

  • स्कैल्प से मोटी-मोटी पपड़ियां उखड़ रही हों और वहां से खून या पीप (Pus) निकलने लगे।
  • डैंड्रफ के साथ-साथ आपके बाल गुच्छों में गिर रहे हों और सिर पर गंजेपन के पैच (Bald patches) दिखने लगें।
  • सिर की खुजली इतनी भयंकर हो कि आप रात को सो न पाएं।
  • यह डैंड्रफ और लालिमा आपके माथे, भौहों (Eyebrows), नाक के किनारों या कानों के पीछे तक तेजी से फैल रही हो।
  • आपका स्कैल्प छूने पर हमेशा बहुत गर्म और सूजा हुआ महसूस हो।

निष्कर्ष

हर महीने नया डैंड्रफ शैंपू खरीदना और फिर भी सफेद पपड़ियों का कंधों पर गिरना कोई मामूली बात नहीं है। यह आपके शरीर की एक बहुत ही गंभीर पुकार है कि आपका हाजमा खराब है और खून गंदगी से भर गया है। कठोर केमिकल वाले शैंपू लगाकर स्कैल्प को रगड़ना बंद कीजिए। इससे समस्या अंदर ही अंदर और ज्यादा जटिल होती जाएगी और आप अपने बाल हमेशा के लिए खो देंगे। अपनी जीवनशैली को सुधारें। अपने पेट को साफ रखें और मीठे (Sugar) से बचें। जीवा आयुर्वेद की प्राकृतिक और सुरक्षित जड़ी-बूटियों को अपनाकर अपने खून को अंदर से शुद्ध करें। आज ही जीवा से संपर्क करें और हमेशा के लिए एक मजबूत, घने और डैंड्रफ-मुक्त बालों का आनंद लें।

FAQs

शैंपू सिर्फ ऊपरी त्वचा की सफाई करते हैं और फंगस को कुछ समय के लिए सुन्न कर देते हैं। लेकिन वे खून की अशुद्धि और शरीर की उस गर्मी को ठीक नहीं कर सकते जो फंगस को पैदा कर रही है। इसीलिए शैंपू छोड़ते ही डैंड्रफ लौट आता है।

हां, अगर आपको कफ जनित (तैलीय) डैंड्रफ है, तो भारी तेल लगाना फंगस (Malassezia) के लिए दावत की तरह है। फंगस तेल खाकर और तेजी से बढ़ता है। ऐसे में सिर्फ डॉक्टर द्वारा बताया गया खास आयुर्वेदिक औषधीय तेल ही लगाना चाहिए।

नहीं। डैंड्रफ कोई संक्रामक बीमारी नहीं है। यह किसी का तौलिया या कंघी इस्तेमाल करने से नहीं फैलता। यह पूरी तरह से आपकी अपनी अंदरूनी इम्युनिटी और स्कैल्प के वातावरण पर निर्भर करता है।

बिल्कुल। स्ट्रेस लेने से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो सीधे तौर पर स्कैल्प की तेल ग्रंथियों को बहुत ज्यादा तेल (Sebum) बनाने के लिए भड़काता है। यही तेल डैंड्रफ पैदा करने वाले फंगस का मुख्य भोजन है।

सौ प्रतिशत। आयुर्वेद के अनुसार अगर आपका खाना ठीक से नहीं पच रहा है, तो वह पेट में टॉक्सिन (आम) बनाता है। यह गंदगी सीधा खून में मिलकर स्कैल्प तक पहुंचती है और त्वचा को रोगी बना देती है।

नीम दुनिया का सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल है। यह केवल फंगस को ही नहीं मारता, बल्कि यह खून की गर्मी (पित्त) को शांत करता है और त्वचा को अंदर से बिल्कुल शुद्ध कर देता है।

दही में मौजूद लैक्टिक एसिड और नींबू का सिट्रिक एसिड कुछ समय के लिए पपड़ी को साफ कर सकते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा खट्टी चीजें स्कैल्प को रूखा कर सकती हैं और अंदरूनी पित्त को भड़का सकती हैं। हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही इनका इस्तेमाल करें।

विरेचन पंचकर्म में औषधियों के जरिए लिवर और आंतों में जमा हुआ सालों पुराना विषैला पित्त मल के रास्ते बाहर निकाला जाता है। पेट साफ होते ही खून की गर्मी शांत हो जाती है, जिससे स्कैल्प का पीएच नॉर्मल हो जाता है और डैंड्रफ खत्म हो जाता है।

खुजली और पपड़ी झड़ने में तो कुछ ही हफ्तों में भारी आराम मिल जाता है। लेकिन खून को पूरी तरह से शुद्ध होने और बालों की जड़ों को दोबारा मजबूत होने में कम से कम तीन से छह महीने का अनुशासित समय लगता है।

आपको चीनी (Sweets), रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (मैदा, ब्रेड), और बहुत ज्यादा खट्टी या फर्मेंटेड चीजों से बिल्कुल बचना चाहिए। ये चीजें सीधे तौर पर शरीर में यीस्ट और फंगस को बहुत तेजी से बढ़ाती हैं।

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