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H. Pylori Test Positive — Antibiotics के बाद भी पेट दर्द क्यों?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हफ्तों से पेट में जलन, भारीपन और खट्टी डकारों से परेशान होने के बाद जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं, तो एंडोस्कोपी या स्टूल टेस्ट के बाद पता चलता है कि आपके पेट में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी H. Pylori नामक बैक्टीरिया ने डेरा डाल लिया है। डॉक्टर तुरंत आपको 14 दिनों का भारी एंटीबायोटिक्स Antibiotics और एंटासिड्स PPIs का कोर्स थमा देते हैं। आप रोज़ाना मुट्ठी भर दवाइयां खाते हैं, यह सोचकर कि कोर्स खत्म होते ही आपका पेट पहले की तरह स्वस्थ हो जाएगा। लेकिन कोर्स खत्म होने के बाद भी जब पेट का दर्द, मरोड़ और खाने के बाद फूलने की समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है, तो आप खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं।

एंटीबायोटिक्स ने शायद उस बैक्टीरिया को तो मार दिया, लेकिन आपके पेट की नाज़ुक अंदरूनी परत Stomach Lining और स्वस्थ गट फ्लोरा Good Bacteria को पूरी तरह तबाह कर दिया है। जब यह जलन और पेट का दर्द रोज़ की आदत बन जाए, तो समझ लीजिए कि आपका पाचन तंत्र गंभीर पोस्ट-एंटीबायोटिक गैस्ट्राइटिस Post-Antibiotic Gastritis और अल्सर की चपेट में आ चुका है, जिसे नज़रअंदाज़ करना आगे चलकर आपके पाचन को हमेशा के लिए कमज़ोर कर सकता है।

H. Pylori और पेट दर्द शरीर में क्या संकेत देते हैं?

Pylori एक ऐसा ज़िद्दी बैक्टीरिया है जो पेट के तेज़ एसिड में भी ज़िंदा रह सकता है। इसे मारने के लिए दी जाने वाली हेवी डोज़ एंटीबायोटिक्स हमारे पाचन तंत्र पर एक ऐसा भारी दबाव डालती हैं, जिसके लिए हमारी आंतें प्राकृतिक रूप से नहीं बनी हैं। यह लगातार पड़ने वाला दबाव पेट को अंदर से झुलसा देता है।

  • म्यूकोसल लाइनिंग का डैमेज Mucosal Lining Damage: पेट की दीवार को एसिड से बचाने के लिए एक प्राकृतिक परत Mucus होती है। H. Pylori और फिर तेज़ एंटीबायोटिक्स इस परत को छील देते हैं। इस कारण पेट का अपना ही एसिड दीवारों को जलाने लगता है, जिससे भयंकर दर्द और जलन होती है।
  • गट फ्लोरा का विनाश Destruction of Gut Flora: एंटीबायोटिक्स अच्छे और बुरे बैक्टीरिया में फर्क नहीं कर पाते। वे पेट के उन करोड़ों अच्छे बैक्टीरिया को भी मार देते हैं जो खाना पचाने के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। इसके कारण पेट में भयंकर गैस और ब्लोटिंग Bloating रहने लगती है।
  • एसिड रिबाउंड Acid Rebound Effect: महीनों तक एंटासिड Pantoprazole/Omeprazole खाने के बाद जब आप उन्हें छोड़ते हैं, तो पेट अचानक से बहुत ज़्यादा एसिड बनाने लगता है, जिससे सीने और गले में तेज़ जलन Heartburn होने लगती है।
  • पाचन तंत्र का रूखापन और कमज़ोरी: लगातार रसायनों के प्रभाव से पेट और आंतों की नसों में सिकुड़न आ जाती है। भोजन पचने के बजाय पेट में ही सड़ने लगता है, जो कमज़ोरी का सबसे बड़ा कारण बनता है।

H. Pylori और एंटीबायोटिक्स का असर किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति का खान-पान और उसके शरीर की प्रकृति अलग होती है। बैक्टीरिया और दवाइयों से पेट पर पड़ने वाला यह प्रभाव शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान पाचन डैमेज: इस स्थिति में पेट में भयंकर रूखापन और गैस बनने लगती है। थोड़ा सा भी खाने पर पेट गुब्बारे की तरह फूल जाता है। पेट में मरोड़ और सुई चुभने जैसा दर्द होता है, और मल बहुत कड़ा या अनियमित हो जाता है।
  • पित्त-प्रधान पाचन डैमेज: इसमें पेट की परत छिलने के साथ-साथ सीने और गले में आग लगने जैसी जलन होती है। खट्टी डकारें आती हैं और ऐसा लगता है जैसे पेट में एसिड उबल रहा हो। खाली पेट रहने पर दर्द और भी असहनीय हो जाता है।
  • कफ-प्रधान पाचन डैमेज: लगातार दवाइयों से शरीर का मेटाबॉलिज़्म और जठराग्नि Digestive Fire बिल्कुल धीमी हो जाती है। इसमें हमेशा जी मिचलाने Nausea, खाने से अरुचि और पेट में भारीपन का अहसास होता है। इंसान हमेशा क्रोनिक फटीग Chronic fatigue से घिरा रहता है।

क्या आपके पेट में भी एंटीबायोटिक्स के बाद ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

डाइजेस्टिव डैमेज रातों-रात ठीक नहीं होता। यह समस्या शरीर में अलार्म बजाती है, जिसे हम अक्सर सामान्य एसिडिटी मानकर टाल देते हैं या फिर से एंटासिड खा लेते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • खाने के तुरंत बाद पेट का भारी होना: दो रोटी खाने पर ही ऐसा महसूस होना जैसे बहुत सारा खाना खा लिया हो और पेट में भारीपन के कारण सांस लेने में तकलीफ होना।
  • आधी रात को सीने में जलन के साथ उठना: रात को सोते समय अचानक एसिड का गले तक आना, जिसके कारण नींद टूट जाए और बेचैनी महसूस हो।
  • नाभि के ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द: खाली पेट या खाना खाने के तुरंत बाद नाभि के ठीक ऊपर एक मीठा-मीठा या चुभने वाला दर्द लगातार बने रहना।
  • मुँह में कड़वापन और जी मिचलाना: सुबह उठने पर मुँह का स्वाद कड़वा या धातु Metallic जैसा महसूस होना और हमेशा उल्टी जैसा मन रहना।

इस पेट दर्द में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

इस दर्द से तुरंत राहत पाने और अपना काम चालू रखने की जल्दबाज़ी में, मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो पेट को स्थायी रूप से डैमेज कर देते हैं:

  • एंटासिड्स का रोज़ाना सेवन: जलन को दबाने के लिए रोज़ाना खाली पेट गैस की गोलियाँ PPIs खाना आपके पेट के प्राकृतिक एसिड को खत्म कर देता है, जिससे भोजन पचना बिल्कुल बंद हो जाता है और हड्डियां कमज़ोर होने लगती हैं।
  • गलत खान-पान को नज़रअंदाज़ करना: दर्द होने के बावजूद बाहर का तला-भुना, मसालेदार या प्रोसेस्ड खाना लगातार खाते रहना, जो पेट के ज़ख्मों अल्सर को और गहरा कर देता है।
  • दूध और चाय का गलत कॉम्बिनेशन: एसिडिटी कम करने के लिए बार-बार ठंडा दूध पीना या सिरदर्द मिटाने के लिए खाली पेट चाय-कॉफी पीना, जो स्थिति को और बिगाड़ देता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर पेट की इस सूजी हुई परत को ठीक न किया जाए, तो यह समस्या क्रोनिक गैस्ट्रिक अल्सर Gastric Ulcer, ग्रहणी दोष IBS और कुछ मामलों में पेट के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का भयंकर रूप ले लेती है।

आयुर्वेद H. Pylori और एंटीबायोटिक्स के साइड इफेक्ट्स को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे पोस्ट-इन्फेक्शियस गैस्ट्राइटिस या डिसबायोसिस Dysbiosis कहता है, आयुर्वेद उसे अम्लपित्त Amlapitta, ग्रहणी रोग Grahani और जठराग्नि के मंद होने के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है।

  • जठराग्नि Digestive Fire का बुझना: हेवी एंटीबायोटिक्स तीक्ष्ण और उष्ण गर्म प्रकृति के होते हैं। ये पेट के खराब बैक्टीरिया को तो मारते हैं, लेकिन साथ ही आपकी प्राकृतिक पाचन अग्नि को भी भस्म कर देते हैं, जिससे अग्निमांद्य हो जाता है।
  • श्लेषक कफ Mucosal Lining का सूखना: पेट की दीवारों को सुरक्षित रखने वाला चिकना श्लेषक कफ Mucus इन रसायनों से सूख जाता है, और बढ़ा हुआ पित्त एसिड सीधे पेट की नसों और ऊतकों Tissues को जलाने लगता है।
  • आम Toxins का निर्माण: जब पाचन कमज़ोर होता है, तो खाया हुआ भोजन रस में बदलने के बजाय पेट में सड़ने लगता है। इससे आम विषाक्त पदार्थ बनता है, जो रक्त के साथ मिलकर पूरे शरीर में सुस्ती और दर्द पैदा करता है।

पेट की गर्मी और खुश्की मिटाने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके पेट के अल्सर को बढ़ा भी सकता है और उसे दोबारा स्वस्थ भी कर सकता है। एंटीबायोटिक्स के डैमेज से बचने और पेट को शांत करने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - पेट को ठंडक और हीलिंग देने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - एसिड और अल्सर बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, मूंग दाल की पतली खिचड़ी, दलिया, ओट्स। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, पिज़्ज़ा, खमीर उठा भोजन Fermented।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी पेट की लाइनिंग के लिए अमृत, नारियल का तेल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, मसालेदार तड़का, बाज़ार का बटर।
सब्ज़ियाँ Vegetables पेठा Ash Gourd, लौकी, तरोई, कद्दू, परवल बिना बीज के। कच्चा सलाद, अत्यधिक गोभी, शिमला मिर्च, टमाटर, खट्टी चीज़ें।
फल Fruits मीठा अनार, पका हुआ पपीता, सेब उबाल कर, नारियल पानी। खट्टे फल संतरा, नींबू, कच्चा अनानास, डिब्बाबंद जूस।
पेय पदार्थ Beverages ताज़ा छाछ भुना जीरा डालकर, सौंफ-धनिया का पानी, मुलेठी की चाय। बहुत ज़्यादा कैफीन चाय/कॉफी एसिड बढ़ाते हैं, शराब, कोल्ड ड्रिंक्स।

पेट को फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के पेट के अल्सर को भर देते हैं और डैमेज हो चुके पाचन तंत्र को दोबारा ज़िंदा कर देते हैं:

  • मुलेठी Mulethi: पेट के अल्सर और एसिडिटी को खत्म करने के लिए मुलेठी एक अद्भुत रसायन है। यह पेट की जली हुई परत पर एक मीठी और ठंडी कोटिंग कर देती है, जिससे दर्द में तुरंत आराम मिलता है।
  • आंवला Amla: यह प्राकृतिक रूप से पित्त को शांत करता है। आंवला विटामिन सी से भरपूर होने के बावजूद पेट में एसिड नहीं बढ़ाता, बल्कि पेट के घावों Ulcers को तेज़ी से भरता है।
  • कामदुधा रस Kamdudha Ras: जब पेट में भयंकर जलन और खट्टी डकारें आ रही हों, तो यह आयुर्वेदिक औषधि एक जादुई एंटासिड का काम करती है, वह भी बिना पाचन को कमज़ोर किए।
  • शंख भस्म Shankh Bhasma: यह पेट के अत्यधिक एसिड को सोख लेता है और आंतों की सूजन Inflammation को खत्म करके पाचन तंत्र को मज़बूत बनाता है।
  • गिलोय Giloy: शरीर के अंदरूनी आम और एंटीबायोटिक्स के ज़हरीले प्रभाव को जड़ से खत्म करने के लिए गिलोय बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर और इम्यूनिटी बूस्टर का काम करती है।

पेट की गर्मी और जलन मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब पित्त और आम बहुत गहराई तक आंतों और पेट की नसों में जम चुका हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • विरेचन Virechana: पेट और आंतों में जमे हुए अत्यधिक पित्त एसिड और टॉक्सिन्स को औषधीय जड़ी-बूटियों के माध्यम से मल के रास्ते बाहर निकालने की यह सबसे बेहतरीन थेरेपी है।
  • तक्रधारा Takradhara: इसमें माथे पर औषधीय छाछ Medicated Buttermilk की धारा गिराई जाती है। यह दिमाग के स्ट्रेस को कम करती है, जिसका सीधा असर गट-ब्रेन एक्सिस Gut-Brain Axis के ज़रिए पेट की जलन को शांत करने में होता है।
  • बस्ती Basti: पक्वाशय Large Intestine में वात दोष को संतुलित करने के लिए हर्बल काढ़े और औषधीय तेल का एनीमा दिया जाता है, जो पुरानी से पुरानी गैस और ब्लोटिंग को खत्म कर देता है।

पेट की लाइनिंग रिपेयर होने और दर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

तेज़ एंटीबायोटिक्स के कारण झुलसे हुए पेट को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और सही डाइट से आपका पेट शांत होना शुरू होगा। सीने की जलन, खट्टी डकारें और पेट दर्द में भारी कमी आएगी। भूख दोबारा सामान्य होने लगेगी।
  • 3-4 महीने: पेट की नष्ट हो चुकी म्यूकोसल लाइनिंग Mucosal Lining रिपेयर होने लगेगी। गैस और ब्लोटिंग Bloating लगभग खत्म हो जाएगी और अच्छे बैक्टीरिया वापस पनपने लगेंगे।
  • 5-6 महीने: आपका गट-सिस्टम पूरी तरह पोषित हो जाएगा और जठराग्नि मज़बूत हो जाएगी। आप बिना किसी गैस की गोली के, अपनी पसंद का भोजन आराम से पचा सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

Pylori और पोस्ट-एंटीबायोटिक डैमेज के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य एसिड के उत्पादन को रोकने के लिए PPIs एंटासिड्स देना। जठराग्नि को ठीक करना, पित्त शांत करना और पेट की झिल्ली Lining को रिपेयर करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया केवल पेट में बनने वाले एसिड को दुश्मन मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए दोष और 'आम' का परिणाम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल मसालेदार खाने से मनाही, लेकिन जठराग्नि या मन की शांति पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। पित्त-शामक डाइट, सही समय पर भोजन और मानसिक तनाव को दूर करना ही इलाज का आधार है।
लंबा असर एंटासिड्स छोड़ने पर जलन तुरंत वापस आ जाती है Rebound Acid और गट फ्लोरा नष्ट रहता है। पाचन तंत्र अंदर से मज़बूत होता है, शरीर खुद को हील कर लेता है, जिससे इंसान स्थायी रूप से दर्द-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस डाइजेस्टिव खुश्की और डैमेज को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • मल में खून आना: अगर आपका मल बिल्कुल काले रंग का Tar-like आ रहा हो, जो पेट या आंतों में अंदरूनी ब्लीडिंग Ulcer bleeding का संकेत है।
  • उल्टी में कॉफी जैसे कण: अगर लगातार उल्टी हो रही हो और उसमें खून या कॉफी के रंग जैसे कण दिखाई दें।
  • अचानक वज़न का गिरना: बिना किसी कोशिश के अगर आपका वज़न तेज़ी से कम होने लगे और कुछ भी निगलने में भयंकर दर्द हो।
  • पेट में असहनीय और तेज़ दर्द: अगर नाभि के पास इतना तेज़ दर्द उठे जो सीधे पीठ की तरफ जाए और बर्दाश्त के बाहर हो।

निष्कर्ष

Pylori को मारने के लिए भारी एंटीबायोटिक्स का कोर्स शायद आज के मेडिकल प्रोटोकॉल का हिस्सा हो, लेकिन कोर्स के बाद बचा हुआ वह मीठा-मीठा दर्द, खट्टी डकारें और पेट का फूलना आपकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा नहीं होना चाहिए। यह आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपके पेट की सुरक्षा परत जल चुकी है, जठराग्नि मंद पड़ गई है और आपका पाचन भारी दबाव में दम तोड़ रहा है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना सुबह खाली पेट एंटासिड्स की गोलियों से दबाते हैं, तो आप अपने पाचन तंत्र को हील करने के बजाय उसे हमेशा के लिए पंगु बना रहे होते हैं। इस खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपने खान-पान को सुधारें, तनाव से ब्रेक लें और अपनी डाइट में शुद्ध गाय का घी और पेठे का रस शामिल करें। मुलेठी, आंवला और कामदुधा रस जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और आयुर्वेदिक डिटॉक्स से अपनी सूखी हुई आंतों को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। रसायनों के कारण अपने पेट को कमज़ोर न पड़ने दें, और अपने शरीर व पाचन तंत्र को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया को खत्म कर देते हैं, लेकिन साथ ही पेट की परत (Mucosal lining) और अच्छे गट बैक्टीरिया को भी डैमेज कर देते हैं। इस डैमेज के कारण दवा बंद करने के बाद भी पेट में सूजन, जलन और दर्द बना रहता है।

हाँ। आयुर्वेद पित्त-शामक और व्रण-रोपक (घाव भरने वाली) जड़ी-बूटियों जैसे मुलेठी और आंवले के ज़रिए पेट के अल्सर को प्राकृतिक रूप से भरता है और जठराग्नि को दोबारा संतुलित करता है।

अस्थायी रूप से ठंडा दूध जलन शांत कर सकता है, लेकिन कुछ समय बाद दूध में मौजूद कैल्शियम और फैट पेट में और भी ज़्यादा एसिड बनाने का कारण (Rebound Acid) बन सकते हैं। इसकी जगह नारियल पानी या सौंफ का पानी पीना ज़्यादा बेहतर है।

लंबे समय तक रोज़ गैस की गोली खाने से पेट का ज़रूरी एसिड बिल्कुल खत्म हो जाता है। इससे भोजन पचना बंद हो जाता है, विटामिन B12 की कमी हो जाती है और हड्डियां भुरभुरी (Osteoporosis) होने लगती हैं।

दवाइयां पेट के खराब बैक्टीरिया के साथ-साथ खाना पचाने वाले गुड बैक्टीरिया को भी मार देती हैं। इसके कारण खाना ठीक से पच नहीं पाता और आंतों में गैस बनाने लगता है, जिससे पेट फूलता है।

प्रोबायोटिक्स कुछ अच्छे बैक्टीरिया वापस ला सकते हैं, लेकिन जब तक पेट की ज़मीन (Lining) ही रसायनों से जली हुई है, तब तक वे बैक्टीरिया टिक नहीं पाएंगे। आयुर्वेद पहले पेट की उस परत को रिपेयर करता है (आम पाचन और पित्त शमन द्वारा), ताकि गट फ्लोरा खुद-ब-खुद पनप सके।

बिल्कुल। पेट और दिमाग गट-ब्रेन एक्सिस के ज़रिए जुड़े होते हैं। स्ट्रेस हार्मोन (Cortisol) पेट के प्राकृतिक खून के बहाव को रोक देते हैं और पित्त भड़का देते हैं, जिससे जलन और दर्द तुरंत बढ़ जाता है।

मुलेठी स्निग्ध (चिकनी) और शीत (ठंडी) होती है। यह पेट की छिल चुकी दीवारों पर एक प्राकृतिक लेप लगा देती है, जिससे एसिड का सीधा संपर्क पेट की नसों से टूट जाता है और अल्सर तेज़ी से भरता है।

लंबे समय तक खाली पेट रहना (Fasting) इस स्थिति में खतरनाक हो सकता है क्योंकि खाली पेट एसिड दीवारों को ज़्यादा जलाता है। आयुर्वेद ऐसे में हल्का, सुपाच्य और समय पर भोजन (जैसे मूंग की पतली खिचड़ी) खाने की सलाह देता है।

नहीं। बर्फ का बहुत ठंडा पानी पेट की जठराग्नि (Digestive fire) को बुझा देता है और नसों को सिकोड़ देता है, जिससे आम (Toxins) बनने लगता है। हमेशा सामान्य या मटके का पानी ही पिएं।

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