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पसीने से skin rashes क्यों बढ़ सकते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

गर्मियों या उमस के मौसम में पसीना आना बहुत आम बात है, लेकिन यही पसीना जब स्किन पर लाल दानों और भयंकर खुजली का रूप ले ले, तो जीना मुहाल हो जाता है। ऐसे में कई लोग तुरंत राहत पाने के लिए खुशबूदार टेलकम पाउडर या कोई भी ठंडी क्रीम रगड़ लेते हैं। लेकिन क्या यह सही तरीका है? बिलकुल नहीं। पाउडर कुछ देर के लिए पसीना सोख सकता है, लेकिन यह समस्या की जड़ को खत्म नहीं करता। जब तक आप यह नहीं समझेंगे कि आपके पसीने में इतनी गर्मी और जलन क्यों है, तब तक कोई भी क्रीम स्थायी आराम नहीं दे सकती। यह समझना ज़रूरी है कि रैशेज़ शरीर के अंदरूनी असंतुलन का लक्षण हैं।

पसीने के कारण रैशेज़ क्यों और कैसे निकलते हैं?

पसीने से रैशेज़ निकलने की समस्या को आम भाषा में घमौरियाँ भी कहते हैं। इसके पीछे हमारी खराब जीवनशैली और बहुत ज़्यादा उमस ज़िम्मेदार है। जब हम गर्मी में होते हैं, तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए पसीना निकालता है। 

लेकिन जब पसीने वाली ग्रंथियों (Sweat Glands) के मुँह बंद हो जाते हैं, तो पसीना बाहर नहीं निकल पाता और स्किन के नीचे ही जमने लगता है। इससे स्किन पर लाल दाने, सूजन और काँटे चुभने जैसी खुजली होने लगती है। बहुत टाइट कपड़े पहनना और नहाने में लापरवाही बरतना भी इस पसीने को स्किन पर रोककर रैशेज़ को बुलावा देता है।

क्या पसीने से होने वाले सभी रैशेज़ एक जैसे होते हैं?

जी नहीं, पसीने से होने वाली खुजली और रैशेज़ हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। इसे मुख्य रूप से अलग-अलग तरह से देखा जा सकता है। कुछ लोगों को सिर्फ हल्के पानी वाले छोटे दाने होते हैं, जिनमें खुजली नहीं होती। वहीं, कुछ लोगों को गहरे लाल रंग के दाने निकलते हैं, जिनमें भयंकर जलन और काँटे चुभने जैसा दर्द होता है। तीसरी स्थिति वह होती है जहाँ पसीने के कारण स्किन पर फंगल इन्फेक्शन हो जाता है, खासकर जाँघों के बीच या अंडरआर्म्स में। इसलिए अपनी स्किन की परेशानी के सही पैटर्न को पहचानना इलाज का सबसे पहला कदम है।

गलत खानपान से पसीने में जलन और गर्मी कैसे बढ़ती है?

आप अपनी प्लेट में जो भी रखते हैं, उसका सीधा असर आपके पसीने और स्किन पर पड़ता है:

  • मिर्च-मसाले: ज़्यादा चटपटा और मसालेदार खाना खाने से पेट में भयंकर गर्मी बनती है, जो पसीने के ज़रिए स्किन को जलाती है।
  • नमक की अधिकता: ज़्यादा नमक खाने से शरीर में पानी कम होता है और पसीना बहुत ज़्यादा एसिडिक हो जाता है।
  • कैफीन और जंक फूड: बहुत ज़्यादा चाय, कॉफी या बाहर का खाना खून को दूषित करता है, जिससे रैशेज़ निकलते हैं।
  • मीठी चीज़ें: ज़्यादा मीठा खाने पर स्किन पर बैक्टीरिया बहुत तेज़ी से पनपते हैं, जो खुजली को और भड़काते हैं।

क्या बार-बार निकलने वाले रैशेज़ किसी बड़ी बीमारी का संकेत हैं?

लगातार रैशेज़ निकलना सिर्फ गर्मी का असर नहीं है; यह शरीर के अंदर चल रही किसी बड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है:

  • कमज़ोर इम्युनिटी: शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर स्किन अपना बचाव नहीं कर पाती।
  • डायबिटीज (शुगर): शुगर के मरीज़ों में पसीने के कारण बहुत जल्दी फंगल इन्फेक्शन और ज़िद्दी रैशेज़ पनपते हैं।
  • हार्मोनल असंतुलन: महिलाओं में हार्मोन्स बिगड़ने पर पसीने की ग्रंथियाँ ज़्यादा सक्रिय हो जाती हैं।
  • लिवर की कमज़ोरी: जब लिवर शरीर की गंदगी साफ नहीं कर पाता, तो वह गंदगी पसीने के रास्ते निकलकर स्किन को खराब करती है।

आयुर्वेद पसीने से होने वाले रैशेज़ को कैसे देखता है?

आयुर्वेद के अनुसार, पसीने से होने वाले रैशेज़ या घमौरियों का सीधा संबंध शरीर के 'पित्त' दोष से है। इसके मुख्य कारण ये माने गए हैं:

  • पित्त का भड़कना: शरीर में गर्मी (पित्त) बहुत ज़्यादा बढ़ने पर खून में एसिडिटी बढ़ती है, जो रैशेज़ पैदा करती है।
  • आम (टॉक्सिन्स) का बनना: खराब पाचन से बना 'आम' जब पसीने की ग्रंथियों को ब्लॉक कर देता है, तो दाने निकलते हैं।
  • कफ का असंतुलन: शरीर में कफ बिगड़ने पर पसीना बहुत ज़्यादा गाढ़ा और चिपचिपा हो जाता है।
  • विरुद्ध आहार: ठंडी और गर्म तासीर वाली चीज़ें एक साथ खाने से खून गंदा होता है और स्किन पर जलन होती है।

रैशेज़ मिटाने वाली जादुई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

स्किन को अंदर से ठंडा रखने और रैशेज़ दूर करने के लिए आयुर्वेद में 4 सबसे खास जड़ी-बूटियाँ हैं:

  • नीम: यह सबसे बेहतरीन नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल है। नीम के पानी से नहाने पर पसीने के सारे कीटाणु तुरंत मर जाते हैं।
  • चंदन: चंदन का लेप स्किन की भयंकर जलन और काँटेदार चुभन को पल भर में शांत कर देता है।
  • एलोवेरा: ताज़ा एलोवेरा जेल पसीने से बंद हुए रोमछिद्रों को खोलता है और स्किन को प्राकृतिक नमी और ठंडक देता है।
  • मजीठ: यह खून को अंदर से साफ करती है। खून साफ होने से पसीने की बदबू और रैशेज़ अपने आप खत्म हो जाते हैं।

आपके कपड़ों और रोज़मर्रा की कौन-सी आदतें रैशेज़ बढ़ा रही हैं?

अनजाने में की गई आपकी कुछ आदतें ही आपकी स्किन की दुश्मन बन गई हैं:

  • सिंथेटिक कपड़े: नायलॉन या पॉलिएस्टर के कपड़े पसीना नहीं सोखते, जिससे स्किन पर चिपचिपाहट और बैक्टीरिया पनपते हैं।
  • टाइट फिटिंग: बहुत ज़्यादा टाइट कपड़े पहनने से स्किन को हवा नहीं मिल पाती और रोमछिद्र बंद हो जाते हैं।
  • पसीने में सूखना: वर्कआउट या धूप से आने के बाद उसी पसीने वाले कपड़े में बैठे रहने से रैशेज़ बहुत तेज़ी से फैलते हैं।
  • गंदे तौलिए का इस्तेमाल: बिना धुला तौलिया बार-बार इस्तेमाल करने से स्किन पर कीटाणुओं का सीधा हमला होता है।

बाज़ार के केमिकल वाले टेलकम पाउडर कैसे नुकसान पहुँचाते हैं?

रैशेज़ होने पर लोग तुरंत डिब्बे वाले टेलकम पाउडर का इस्तेमाल करते हैं। यह एक अस्थायी और नुकसानदायक उपाय है। इन पाउडर्स में बहुत छोटे केमिकल कण और आर्टिफिशियल खुशबू होती है। जब आप इन्हें पसीने पर लगाते हैं, तो ये स्किन के पोर (रोमछिद्र) को पूरी तरह चोक (बंद) कर देते हैं। इससे पसीना अंदर ही अंदर और ज़्यादा सड़ने लगता है। कुछ देर के लिए ठंडक का एहसास होता है, लेकिन पाउडर का असर खत्म होते ही रैशेज़ और खुजली पहले से दोगुनी ताक़त के साथ वापस आ जाते हैं।

बिना केमिकल के रैशेज़ और खुजली मिटाने के प्राकृतिक तरीके

प्राकृतिक रूप से रैशेज़ ठीक करने के लिए आप इन तरीकों को आसानी से अपना सकते हैं:

  • मुल्तानी मिट्टी: गुलाब जल में मुल्तानी मिट्टी मिलाकर लगाने से स्किन की सारी गर्मी और पसीना बाहर खिंच जाता है।
  • बर्फ की सिकाई: खुजली होने पर सूती कपड़े में बर्फ लपेटकर हल्की सिकाई करें, इससे सूजन और लालिमा तुरंत कम होती है।
  • फिटकरी का पानी: नहाने के पानी में थोड़ी सी फिटकरी घुमा लें। यह पसीने की बदबू और रैशेज़ पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करती है।
  • खीरे का रस: ताज़े खीरे का रस स्किन पर लगाने से रोमछिद्र खुलते हैं और भयंकर जलन शांत हो जाती है।

पसीने की चिपचिपाहट से बचने के लिए कौन-सी आदतें अपनाएँ?

पसीने की चिपचिपाहट से बचने के लिए अपनी रोज की आदतों में बस ये छोटे-छोटे बदलाव करके देखें

  • सूती और ढीले कपड़े हमेशा हल्के रंग के कॉटन वाले कपड़े पहनें जो थोड़े ढीले हों। इससे आपके शरीर को अच्छी तरह हवा लगती रहेगी और पसीना जल्दी सूखेगा।
  • दिन में दो बार नहाएं अगर आपको पसीना ज्यादा आता है, तो सुबह और शाम ताजे या ठंडे पानी से नहाने का रूटीन बना लें।
  • भरपूर पानी पिएं पूरे दिन खूब पानी पीते रहें। शरीर में पानी की कमी नहीं होगी, तो पसीने में ज्यादा चिपचिपाहट और बदबू भी नहीं होगी।
  • रगड़कर न पोछें नहाने के बाद शरीर को तौलिए से जोर-जोर से रगड़ने के बजाय, बस हल्के हाथों से थपथपा कर सुखाएं।

ये बातें सुनने में बहुत आम लगती हैं, लेकिन इनसे गर्मियों में आपको काफी राहत मिलेगी। 

रैशेज़ बिगड़ने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर के पास जाना बहुत ज़रूरी है:

  • दाने में मवाद आना: अगर लाल दानों के अंदर सफेद मवाद या पानी भर जाए और उसमें भयंकर दर्द हो।
  • लगातार फैलना: अगर रैशेज़ शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में बहुत तेज़ी से फैल रहे हों।
  • बुखार आना: रैशेज़ के साथ अगर शरीर का तापमान बढ़ जाए या ठंड महसूस होने लगे।
  • असहनीय खुजली: जब खुजली इतनी ज़्यादा हो कि रात को आपकी नींद ही टूट जाए और स्किन छिल जाए।

स्किन को अंदर से ठंडा रखने के लिए खास आयुर्वेदिक सुझाव

आयुर्वेद में शरीर को अंदर से ठंडा रखने के कुछ बेहतरीन उपाय हैं। सबसे कारगर है सुबह खाली पेट ताँबे के बर्तन में रखा पानी पीना। इससे पेट की सारी गर्मी शांत हो जाती है। अपने खाने में कड़वे रस (जैसे करेला और परवल) को शामिल करें, यह खून की गर्मी को काटता है। नहाने से आधा घंटा पहले पूरे शरीर पर शुद्ध नारियल तेल की बहुत हल्की मालिश करें। नारियल तेल तासीर में ठंडा होता है और यह स्किन पर एक ऐसा सुरक्षा कवच बना देता है कि पसीना उसे नुकसान नहीं पहुँचा पाता।

आधुनिक क्रीम और आयुर्वेदिक इलाज में क्या बड़ा फर्क है?

आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) मुख्य रूप से रैशेज़ के बाहरी लक्षणों पर ध्यान देती है। इसमें अक्सर स्टेरॉयड वाली क्रीम्स या एंटी-फंगल पाउडर दिए जाते हैं। ये तुरंत दाने तो दबा देते हैं, लेकिन स्किन को कागज़ की तरह पतला और कमज़ोर कर देते हैं। क्रीम छोड़ते ही रैशेज़ वापस आ जाते हैं।

इसके विपरीत, आयुर्वेदिक उपचार समस्या की जड़ पर काम करता है। यह शरीर के पित्त दोष को संतुलित करता है और खून साफ करने पर ध्यान देता है। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ स्किन को नुकसान नहीं पहुँचातीं, बल्कि अंदर से पित्त शांत कर देती हैं। इससे आराम हमेशा के लिए मिलता है।

निष्कर्ष

पसीना आना हमारे शरीर की प्राकृतिक ज़रूरत है, लेकिन इसका रैशेज़ में बदल जाना इस बात का इशारा है कि शरीर अंदर से जल रहा है। रैशेज़ होने पर सिर्फ टेलकम पाउडर या क्रीम्स के भरोसे बैठना सही समाधान नहीं है। अपनी दिनचर्या में सुधार, ढीले सूती कपड़े, सही खानपान और आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर इस चिपचिपी परेशानी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। याद रखें, अच्छी स्किन कोई रातों-रात का जादू नहीं है, इसके लिए आपको अपने शरीर के तापमान को प्यार से वापस सेट करना होगा। शरीर के संकेतों को सुनें और स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।

References

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC4607768/

https://www.nhsinform.scot/illnesses-and-conditions/skin/rashes-irritation-and-swelling/skin-rashes-in-children/

https://www.healthline.com/health/rashes

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, ज़्यादा पाउडर रोमछिद्रों को बंद कर देता है, जिससे पसीना अंदर सड़ता है और रैशेज़ बहुत ज़्यादा बढ़ जाते हैं।

बर्फ को सीधे स्किन पर कभी न रगड़ें। उसे एक साफ सूती कपड़े में लपेटकर हल्की सिकाई करें, इससे तुरंत आराम मिलेगा।

हाँ, स्किन के मुड़ने वाली जगहों (जैसे जाँघों के बीच) पर पसीना और नमी फंगस पनपने का सबसे बड़ा कारण बनते हैं।

केमिकल वाले खुशबूदार साबुन बिल्कुल छोड़ दें। सिर्फ नीम या एलोवेरा युक्त नेचुरल आयुर्वेदिक साबुन का ही इस्तेमाल करें।

बिल्कुल। खूब पानी पीने से शरीर की अंदरूनी गर्मी यूरिन के रास्ते बाहर निकल जाती है और पसीना कम एसिडिक होता है।

नहाने के पानी में थोड़ी सी फिटकरी या उबले हुए नीम के पत्ते मिलाना सबसे बेहतरीन और प्राकृतिक उपाय है।

हाँ, चाय और कॉफी में कैफीन होता है जो शरीर में पित्त (गर्मी) को भड़काता है, जिससे खुजली और जलन तेज़ हो जाती है।

हाँ, नारियल तेल की तासीर ठंडी होती है और इसमें नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो जलन को तुरंत शांत करते हैं।

टाइट कपड़ों के कारण पसीना हवा में सूख नहीं पाता और स्किन के साथ रगड़ खाता है, जिससे दाने छिल जाते हैं।

चंदन का लेप गुलाब जल के साथ मिलाकर लगाना स्किन की काँटेदार चुभन और लालिमा को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है।

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