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Athlete's Foot – पसीने वाले जूतों से छुटकारा कैसे? आयुर्वेदिक उपाय

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 09 May, 2026
  • category-iconUpdated on 09 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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सुबह ऑफिस के लिए तैयार होते समय पैरों को मोज़ों और जूतों में कैद करना और फिर लगातार 9-10 घंटे बाद घर लौटकर उन्हें आज़ाद करना। इस डिजिटल और भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हमारे पैर एक ऐसे घुटन भरे माहौल में रहते हैं, जो फंगस और बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे मुफीद जगह है जब जूतों से पैर बाहर आते हैं और उँगलियों के बीच तेज़ खुजली, त्वचा का कटना या खाल उधड़ने की समस्या होती है, तो हम इसे महज़ पसीने की वजह से होने वाली आम बात समझकर पाउडर छिड़क कर टाल देते हैं।

लेकिन यह साधारण पसीना या थकावट नहीं है; यह एथलीट फुट Athletes Foot यानी टीनिया पीडिस Tinea Pedis नाम का एक ज़िद्दी फंगल इन्फेक्शन है। जब पैरों की यह खुजली और बदबू रोज़ की आदत बन जाए, तो समझ लीजिए कि आपके पैर एक गंभीर चर्म रोग की चपेट में आ चुके हैं, जिसे नज़रअंदाज़ करना आगे चलकर आपके नाखूनों और पैरों की त्वचा की ताक़त और सुंदरता हमेशा के लिए छीन सकता है।

पैरों की यह खुजली और त्वचा का छिलना शरीर में क्या संकेत देता है?

लगातार बंद जूते और सिंथेटिक मोज़े पहनने से पैरों में हवा का क्रॉस-वेंटिलेशन Cross-ventilation रुक जाता है। पसीने से पैदा होने वाली नमी Moisture पैरों की त्वचा के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देती है।

  • फंगस का पनपना Fungal Overgrowth: डार्क और नमी वाली जगह डर्माटोफाइट्स Dermatophytes नाम के फंगस का घर बन जाती है यह फंगस पैरों की त्वचा के बाहरी प्रोटीन Keratin को खाना शुरू कर देता है।
  • खराब ब्लड सर्कुलेशन: लगातार तंग Tight जूते पहनने से पैरों और उँगलियों के बीच रक्त संचार कम हो जाता है, जिससे त्वचा की खुद को रिपेयर करने की क्षमता घट जाती है।
  • इम्यून सिस्टम का कमज़ोर होना: शरीर में पसीने और गंदगी के कारण पनपने वाले बैक्टीरिया और फंगस से लड़ने वाले लोकल इम्यून रिस्पॉन्स का कमज़ोर पड़ जाना
  • टॉक्सिन्स Ama और क्लेद का जमाव: आयुर्वेद के अनुसार शरीर में बढ़ा हुआ क्लेद अत्यधिक नमी और दूषित पसीना त्वचा और रक्त को अंदर से खराब कर देता है।

एथलीट फुट Athletes Foot और फंगल इन्फेक्शन किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति के जूते पहनने का तरीका, पसीने की मात्रा और उसके शरीर की प्रकृति अलग होती है। पैरों में पनपने वाला यह फंगल इन्फेक्शन शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान इन्फेक्शन: इस स्थिति में पैरों की त्वचा में भयंकर रूखापन आ जाता है। उँगलियों के बीच की दरारें फट जाती हैं और उनमें से सूखी पपड़ी Scaling झड़ने लगती है। एड़ियाँ फटने लगती हैं और चलने पर खिंचाव के कारण तेज़ दर्द होता है।
  • पित्त-प्रधान इन्फेक्शन: इसमें पैरों की उँगलियों के बीच लालिमा आ जाती है और आग लगने जैसी भयंकर जलन होती है। कई बार पानी भरे छोटे-छोटे दाने Blisters निकल आते हैं। जूते उतारने के बाद पैरों से भारी गर्मी Heat निकलने का अहसास होता है।
  • कफ-प्रधान इन्फेक्शन: लगातार पसीने में पैर रहने से उँगलियों के बीच की त्वचा सफेद और गीली Macerated हो जाती है। इसमें से हमेशा एक बदबूदार स्राव Oozing निकलता रहता है और इंसान असहनीय खुजली से परेशान रहता है।

क्या आपके पैरों में भी फंगल इन्फेक्शन के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

स्किन डैमेज रातों-रात नहीं होता। एथलीट फुट बहुत पहले से अलार्म बजाता है, जिसे हम अक्सर पसीने की आम समस्या मानकर टाल देते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • उँगलियों के बीच असहनीय खुजली: जूते उतारते ही चौथी और पांचवीं उँगली के बीच अचानक तेज़ खुजली का मचना, जो खुजलाने पर भी शांत न हो
  • त्वचा का सफेद होकर उधड़ना: उँगलियों के बीच की स्किन का गलकर सफेद हो जाना और रबड़ की तरह खिंच कर बाहर आना
  • पैरों से भयंकर बदबू आना Foul Odor: रोज़ाना मोज़े बदलने और पैर धोने के बावजूद पैरों से एक अजीब सी दुर्गंध आना जो कमरे में फैल जाए
  • चलने में दर्द और दरारें: उँगलियों के बीच कट लग जाना Fissures, जिससे नंगे पैर ज़मीन पर चलने या नहाते समय साबुन लगने पर तेज़ जलन और दर्द होना।

आयुर्वेद एथलीट फुट और त्वचा के फंगल इन्फेक्शन को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे एथलीट फुट या टीनिया पीडिस कहता है, आयुर्वेद उसे कुष्ठ रोग के अंतर्गत दद्रु Dadru या किच्चिप के गंभीर प्रकोप के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है।

  • रक्त धातु की दृष्टि: अशुद्ध खान-पान और खराब जीवनशैली से रक्त धातु दूषित हो जाती है। जब दूषित रक्त पसीने के रूप में बाहर आता है, तो वह त्वचा में इन्फेक्शन पैदा करता है।
  • क्लेद नमी का बढ़ना: जूतों के अंदर हवा न जाने से जो पसीना रुकता है, आयुर्वेद उसे क्लेद कहता है। कफ और पित्त दोष जब इस क्लेद के साथ मिलते हैं, तो वह स्थान फंगस के लिए एक उपजाऊ ज़मीन बन जाता है।
  • जठराग्नि की अनदेखी: जब कमज़ोर पाचन के कारण शरीर में आम Toxins बनता है, तो वह रक्त के साथ मिलकर त्वचा के रोमछिद्रों Pores को ब्लॉक कर देता है, जिससे त्वचा खुलकर साँस नहीं ले पाती

फंगल इन्फेक्शन मिटाने और दोषों को शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके रक्त को अशुद्ध कर सकता है और उसे दोबारा साफ भी कर सकता है। एथलीट फुट से बचने और फंगस को भूखा मारने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - रक्त साफ करने वाले और नमी सोखने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - क्लेद और खुजली बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, जौ Barley, मूंग दाल, ज्वार, रागी। नया चावल, वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद जंक फूड।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी सीमित मात्रा में, सरसों का तेल। बहुत अधिक रिफाइंड तेल, चीज़, मेयोनीज़।
सब्ज़ियाँ Vegetables करेला, परवल, लौकी, तोरई, नीम के पत्ते, पत्तागोभी। अत्यधिक टमाटर, बैंगन, अरबी, भिंडी जो चिपचिपी होती हैं।
फल Fruits आंवला, सेब, अनार, पपीता। बहुत ज़्यादा खट्टे फल, डिब्बाबंद जूस, बाज़ार के कटे हुए फल।
पेय पदार्थ Beverages ताज़ा छाछ भुना जीरा डालकर, नीम और गिलोय का पानी। शराब Alcohol फंगस को बढ़ाता है, कोल्ड ड्रिंक्स, बहुत ज़्यादा मीठी चाय।

त्वचा को इन्फेक्शन-मुक्त बनाने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य एंटी-फंगल और ब्लड-प्यूरीफायर रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के त्वचा के फंगस को जड़ से खत्म कर देते हैं:

  • नीम Neem: यह प्रकृति का सबसे शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल एजेंट है। नीम रक्त को गहराई से साफ करता है और बाहरी रूप से लगाने पर फंगस को तुरंत नष्ट करता है।
  • हल्दी Haridra: हल्दी में सूजन कम करने Anti-inflammatory और घाव भरने की गज़ब की ताक़त होती है। यह उँगलियों के बीच के घावों को तेज़ी से भरती है।
  • खदिर Khadir: आयुर्वेद में चर्म रोगों Skin diseases के लिए खदिर को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यह त्वचा की गहराई में जमे टॉक्सिन्स को बाहर खींच लेता है।
  • गिलोय Giloy: शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने और अंदरूनी आम को जड़ से खत्म करने के लिए गिलोय बेहतरीन काम करती है।
  • मंजिष्ठा Manjistha: रक्त शोधन के लिए यह एक अचूक जड़ी-बूटी है। यह त्वचा के लालपन, खुजली और जलन को जादुई शांति प्रदान करती है।

एथलीट फुट को खत्म करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब फंगस त्वचा की गहरी परतों में जम चुका हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ पैरों की त्वचा को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • पाद प्रक्षालन Pada Prakshalana: नीम, त्रिफला और फिटकरी Sphatika जैसी औषधियों के उबले हुए पानी से पैरों को रोज़ाना धोना। यह थेरेपी पैरों की अशुद्धियों को काटती है और फंगस को बढ़ने से रोकती है।
  • औषधीय लेप Herbal Lepa: गंधक रसायन या नीम और हल्दी से बने औषधीय लेप को उँगलियों के बीच लगाने से गीलापन Oozing तुरंत सूखता है और घाव भर जाते हैं।
  • पादभ्यंग Padabhyanga: जब इन्फेक्शन सूख जाता है और त्वचा में दरारें या रूखापन बचता है, तब औषधीय एंटी-फंगल तेलों जैसे जात्यादि तेल या नीम तेल से मालिश की जाती है।
  • रक्तमोक्षण Raktamokshana: बहुत गंभीर और पुराने फंगल इन्फेक्शन में जोंक Leech Therapy के ज़रिए पैरों के दूषित रक्त को बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे तुरंत आराम मिलता 

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

एथलीट फुट और फंगल इन्फेक्शन के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य फंगस को बाहरी तौर पर मारने के लिए स्टेरॉयड क्रीम्स और एंटी-फंगल पाउडर्स देना। रक्त को शुद्ध करना, 'आम' को पचाना और शरीर की इम्यूनिटी को प्राकृतिक रूप से बढ़ाना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल पैरों की त्वचा का एक स्थानीय Local इन्फेक्शन मानना। इसे अशुद्ध रक्त, कमज़ोर पाचन और कफ-पित्त के असंतुलन का परिणाम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल क्रीम लगाने की सलाह, लेकिन जठराग्नि या वात-पित्त-कफ के संतुलन पर कोई ज़ोर नहीं दिया जाता। रक्त शोधक डाइट, सूती मोज़े पहनना, सफाई रखना और औषधीय पानी से प्रक्षालन को इलाज का बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर क्रीम छोड़ते ही और दोबारा पसीना आते ही इन्फेक्शन तुरंत वापस आ जाता है High relapse rate। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और त्वचा खुद को हील कर लेती है, जिससे इंसान स्थायी रूप से फंगस-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस फंगल इन्फेक्शन को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने पैरों में ये कुछ गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • पैरों से खून या मवाद आना: अगर उँगलियों के बीच के घाव बहुत गहरे हो जाएं और उनमें से पीला मवाद Pus या खून निकलने लगे।
  • पैरों में भयंकर सूजन और लालिमा Cellulitis: अगर खुजली वाले हिस्से से लेकर टखने या पिंडली तक पूरा पैर लाल होकर सूज जाए और छूने पर गर्म लगे।
  • बुखार आना: अगर पैरों के इन्फेक्शन के साथ-साथ आपको तेज़ बुखार और ठंड लगने लगे यह इन्फेक्शन खून में फैलने का संकेत हो सकता है।
  • डायबिटीज के मरीज़ों में घाव का न भरना: अगर आपको शुगर की बीमारी है और पैरों के बीच का घाव सुन्न पड़ जाए या कई दिनों तक न भरे।

निष्कर्ष

ऑफिस या फील्ड वर्क में लगातार जूते पहने रहना आज हमारी ज़रूरत बन चुका है, लेकिन जूतों से पैर बाहर निकालते ही उँगलियों में होने वाली वह असहनीय खुजली, छिलती त्वचा और बदबू आपकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा नहीं है। यह आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपके शरीर में कफ और पित्त दोष भड़क चुका है, रक्त अशुद्ध हो गया है और आपकी त्वचा भारी फंगल अटैक में दम तोड़ रही है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना स्टेरॉयड क्रीम्स और एंटी-फंगल पाउडर से दबाते हैं, तो आप त्वचा को हील करने के बजाय उसे स्थायी रूप से कमज़ोर कर रहे होते हैं। इस इन्फेक्शन के खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपने पैरों को हवा लगने दें, सूती Cotton मोज़े पहनें, जूतों को धूप दिखाएं और अपनी डाइट में नीम, गिलोय और ताज़ा छाछ शामिल करें। हल्दी, खदिर और मंजिष्ठा जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पाद प्रक्षालन व औषधीय लेप से अपनी उधड़ती त्वचा को प्राकृतिक पोषण देकर नया जीवन दें। पसीने के कारण अपने पैरों को बीमार न पड़ने दें, और फंगस को स्थायी रूप से जड़ से उखाड़ने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

आम खुजली पैर धोने या थोड़ी देर खुली हवा में रखने से ठीक हो जाती है। लेकिन एथलीट फुट एक फंगल इन्फेक्शन है, जिसमें उँगलियों के बीच की त्वचा कटने लगती है, सफेद होकर गलती है, भयंकर बदबू आती है और यह बिना सही इलाज के ठीक नहीं होता।

बिल्कुल। जब आप पूरे दिन जूते पहनते हैं, तो पसीने से जूते अंदर तक गीले हो जाते हैं। अगर आप अगले दिन बिना सुखाए उसी जूते को पहनते हैं, तो उस नमी में मौजूद फंगस तेज़ी से आपके पैरों पर हमला कर देता है। हमेशा जूतों को एक दिन का आराम देकर धूप में सुखाना चाहिए।

हाँ, नीम एक प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल औषधि है। रोज़ाना हल्के गर्म पानी में नीम के पत्ते उबालकर या नीम का अर्क डालकर पैरों को 10-15 मिनट तक डुबोकर रखने (पाद प्रक्षालन) से इन्फेक्शन बहुत तेज़ी से कम होता है।

सिंथेटिक, नायलॉन या पॉलिएस्टर के मोज़े कभी न पहनें क्योंकि ये पसीना नहीं सोखते। हमेशा 100% सूती (Cotton) या बांस (Bamboo) के रेशों से बने मोज़े पहनें जो पसीने को सोखकर पैरों को सूखा रखते हैं

हाँ, यह बेहद संक्रामक (Contagious) है। अगर आप संक्रमित व्यक्ति के तौलिए, मोज़े, जूते इस्तेमाल करते हैं, या स्विमिंग पूल, जिम के लॉकर रूम और कॉमन बाथरूम में नंगे पैर चलते हैं, तो यह फंगस आपके पैरों में भी आसानी से लग सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार अधिक मीठा खाने से शरीर में कफ दोष और आम बढ़ता है। फंगस को पनपने के लिए शुगर (ग्लूकोज़) सबसे अच्छा भोजन लगता है। इसलिए इन्फेक्शन के दौरान मीठा खाना पूरी तरह कम कर देना चाहिए।

नहाने के बाद पैरों को केवल ऊपर से पोंछना काफी नहीं है। एक अलग, साफ और सूखे तौलिए से हर उँगली के बीच की दरार को अच्छी तरह रगड़ कर सुखाएं। आप नमी सोखने के लिए आयुर्वेद आधारित हर्बल पाउडर (जैसे टंकण भस्म मिश्रित पाउडर) का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

नहाने के बाद पैरों को केवल ऊपर से पोंछना काफी नहीं है। एक अलग, साफ और सूखे तौलिए से हर उँगली के बीच की दरार को अच्छी तरह रगड़ कर सुखाएं। आप नमी सोखने के लिए आयुर्वेद आधारित हर्बल पाउडर (जैसे टंकण भस्म मिश्रित पाउडर) का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

नहीं। स्टेरॉयड क्रीम्स तुरंत खुजली रोक देती हैं, लेकिन ये त्वचा की ऊपरी परत (Epidermis) को बहुत पतला कर देती हैं, जिससे इन्फेक्शन बार-बार लौटता है (Relapse) और फंगस स्टेरॉयड-रेसिस्टेंट बन जाता है। आयुर्वेदिक लेप इसके मुकाबले पूरी तरह सुरक्षित और स्थायी होते हैं।

यह इन्फेक्शन की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर उँगलियों के बीच से पानी या पस निकल रहा है (कफ-प्रधान अवस्था), तो तेल बिल्कुल न लगाएं, यह नमी को बढ़ा देगा। जब इन्फेक्शन सूख जाए और रूखापन (वात-प्रधान अवस्था) आ जाए, तब नीम तेल या जात्यादि तेल लगाना बहुत फायदेमंद होता है।

हाँ। अगर एथलीट फुट का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह फंगस त्वचा से होते हुए पैरों के नाखूनों में प्रवेश कर जाता है (Nail Fungus)। इससे नाखून मोटे, पीले, भुरभुरे होकर टूटने लगते हैं, जिसका इलाज त्वचा के इन्फेक्शन से कहीं ज़्यादा मुश्किल और लंबा होता है।

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