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Stress से Ulcer कैसे बनता है? Brain -Gut Axis आयुर्वेद में

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

तनाव और पेट का आपस में एक ऐसा गहरा और खामोश रिश्ता है, जिस पर हमारा ध्यान अमूमन जाता ही नहीं। जब कोई इंसान लगातार मानसिक तनाव से गुजरता है, तो उसका असर सिर्फ दिमाग तक नहीं रहता; वह सीधा पेट के पूरे सिस्टम पर वार करता है और आगे चलकर भयंकर एसिडिटी या अल्सर की वजह बन जाता है।

दरअसल, हमारा दिमाग और पेट एक खास नस के जरिए हर वक्त एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। इस लगातार होने वाली बातचीत की वजह से, दिमाग का हर डर और तनाव पेट की नाजुक अंदरूनी परतों को नुकसान पहुँचाने लगता है। इसे रोकने के लिए सिर्फ पेट की दवाइयाँ खाना काफी नहीं है, बल्कि सबसे ज्यादा जरूरी है हमारे नर्वस सिस्टम को शांत रखना।

अत्यधिक तनाव से शरीर और पेट के अंदर असल में क्या होता है?

जब आप लगातार स्ट्रेस में रहते हैं, तो शरीर 'फाइट या फ्लाइट' (Fight or Flight) मोड में चला जाता है। इस दौरान ब्रेन-गट एक्सिस (Brain-Gut Axis) में ये खतरनाक बदलाव होते हैं:

  • कॉर्टिसोल (Cortisol) का बढ़ना: यह स्ट्रेस हॉर्मोन पेट में खून की सप्लाई को रोक देता है, जिससे आंतों की सुरक्षात्मक परत कमज़ोर पड़ जाती है। लंबे समय तक रहने वाला मानसिक तनाव एसिड का संतुलन बिगाड़ देता है।
  • एसिड का अत्यधिक स्राव: घबराहट के कारण पेट में एसिड बेतहाशा बढ़ने लगता है, जो सीधा भोजन नली और पेट की दीवारों को छील देता है, जिससे पाचन संबंधी बीमारियों की शुरुआत होती है।
  • वेगस नर्व (Vagus Nerve) का सुन्न होना: यह नस दिमाग और पेट को जोड़ती है। तनाव में इसका काम धीमा हो जाता है, जिससे पाचन और मस्तिष्क का संबंध पूरी तरह टूट जाता है और खाना पचना बंद हो जाता है।
  • प्रोस्टाग्लैंडिन्स में कमी: ये पेट की परत को एसिड से बचाते हैं, लेकिन भयंकर डर और स्ट्रेस इन्हें कम कर देता है, जिससे पेट की दीवारें असुरक्षित हो जाती हैं और अल्सर पनपने लगता है।

स्ट्रेस से होने वाले पेट के अल्सर किन प्रकारों के हो सकते हैं?

अल्सर केवल गलत खानपान या मिर्च-मसाले का नतीजा नहीं होता। जब दिमाग का भारी दबाव पेट पर पड़ता है, तो इसके घाव इन मुख्य श्रेणियों में उभर कर आते हैं:

  • गैस्ट्रिक अल्सर (Gastric Ulcers): यह पेट की अंदरूनी परत में बनते हैं। स्ट्रेस के कारण जब एसिड बढ़ता है और म्यूकस कम होता है, तो यह सीधा पेट की दीवारों में गहरे घाव कर देता है, जिससे खाना खाते ही तेज़ दर्द होता है।
  • ड्युओडेनल अल्सर (Duodenal Ulcers): छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में होने वाला यह अल्सर अक्सर खाली पेट ज़्यादा दर्द देता है। एंग्जायटी या डर के कारण इसका दर्द रात के समय और भड़क उठता है।
  • स्ट्रेस अल्सर (Stress Ulcers): यह अचानक होने वाले भयंकर ट्रॉमा (Trauma), सदमे या मानसिक आघात से रातों-रात पेट या आंतों में उभर आते हैं और इनमें तेज़ जलन के साथ अचानक ब्लीडिंग शुरू हो सकती है।

अल्सर और नर्वस सिस्टम के बिगड़ने पर क्या लक्षण महसूस होते हैं?

जब ब्रेन और गट का कनेक्शन टूटता है और अल्सर विकसित होता है, तो शरीर केवल पेट दर्द नहीं देता, बल्कि वह तनाव के कई स्पष्ट संकेत देने लगता है:

  • सीने और पेट के बीच में आग जैसी जलन: खाली पेट रहने पर या रात को सोते समय पेट के ऊपरी हिस्से में एक अजीब सी ऐंठन और भारी जलन महसूस होती है, जो कुछ खाने पर ही शांत होती है।
  • अचानक घबराहट और पसीना आना: अल्सर के दर्द के साथ व्यक्ति को एंग्जायटी से प्राकृतिक राहत की ज़रूरत महसूस होती है, क्योंकि उसकी धड़कन बिना किसी कारण तेज़ हो जाती है और उसे पसीना आने लगता है।
  • भूख का मर जाना और जी मिचलाना: स्ट्रेस हॉर्मोन्स के कारण खाने की इच्छा पूरी तरह खत्म हो जाती है और हमेशा पेट में भयंकर गैस और सूजन रहने लगती है।
  • हमेशा थकान और चिड़चिड़ापन: नींद न आने और दर्द के कारण शरीर में अत्यधिक थकान और कमज़ोरी घर कर जाती है और व्यक्ति बात-बात पर झुंझलाने लगता है।

अल्सर के दर्द में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और इसकी क्या जटिलताएं होती हैं?

जब पेट में जलन उठती है, तो तुरंत आराम पाने के लालच में लोग ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो अल्सर को कैंसर जैसी स्थिति की ओर धकेल सकते हैं:

  • एंटासिड्स (Antacids) की लत: रोज़ाना खाली पेट गैस की गोलियाँ खाने से पेट का प्राकृतिक एसिड खत्म हो जाता है और कमज़ोर पाचन के कारण खाना आंतों में सड़ने लगता है।
  • पेनकिलर्स (NSAIDs) का अंधाधुंध इस्तेमाल: सिर दर्द या स्ट्रेस कम करने के लिए पेनकिलर्स खाना पेट की लाइनिंग को पूरी तरह तबाह कर देता है और अल्सर के घाव और गहरे हो जाते हैं।
  • नींद की गोलियाँ और शराब का सहारा: तनाव को भुलाने के लिए इन नशीले पदार्थों का उपयोग नसों को सुन्न कर देता है और यह डिप्रेशन का एक बहुत बड़ा कारण बनता है।
  • इंटरनल ब्लीडिंग (Internal Bleeding): सही इलाज न मिलने पर अल्सर की परत फट सकती है (Perforation), जिससे उल्टी या मल में खून आने लगता है, जो कि एक जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी है।

स्ट्रेस और ब्रेन-गट एक्सिस को लेकर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आधुनिक विज्ञान जिसे अब 'ब्रेन-गट एक्सिस' (Brain-Gut Axis) कहता है, आयुर्वेद उसे हज़ारों सालों से 'मनोवहा स्रोतस' और 'अन्नवहा स्रोतस' के गहरे संबंध के रूप में परिभाषित करता आ रहा है:

  • वात और पित्त का भयंकर प्रकोप: अत्यधिक सोचने (Overthinking) से वात बढ़ता है, जो जठराग्नि को भड़का कर पित्त (एसिड) को तीक्ष्ण कर देता है। इसलिए सही वात दोष को कम करने के उपाय के बिना अल्सर ठीक नहीं होता।
  • साधक पित्त और पाचक पित्त का संबंध: दिमाग का 'साधक पित्त' भावनाओं को कंट्रोल करता है। जब यह स्ट्रेस से बिगड़ता है, तो पेट का 'पाचक पित्त' भी ज़हरीला हो जाता है और वह पेट की परतों को जलाने लगता है।
  • ओजस (Ojas) का क्षय: भयंकर तनाव और अल्सर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (ओजस) को जलाकर राख कर देते हैं, जिससे कब्ज़ और पाचन पूरी तरह ठप पड़ जाता है।
  • आम (Toxins) का निर्माण: कमज़ोर जठराग्नि से बना 'आम' दिमाग की बारीक नसों में जाकर उन्हें ब्लॉक कर देता है, जिससे ब्रेन फॉग और भयंकर एंग्जायटी होती है।

अल्सर और तनाव को शांत करने वाला आयुर्वेदिक डाइट चार्ट

आपके दिमाग और पेट को शांत करने के लिए ऐसी आयुर्वेदिक डाइट चाहिए जो एसिड को सोख ले और नसों को भारी आराम दे। इस चार्ट का पालन करें:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - पेट और दिमाग को शांत करने वाले) क्या न खाएं (नुकसानदायक - अल्सर और वात बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) जौ का सत्तू, पुराना चावल, ओट्स, मूंग दाल की पतली खिचड़ी। मैदा, किण्वित (Fermented) अनाज, पैकेटबंद सफेद ब्रेड।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, परवल (बिना मिर्च-मसाले के उबली हुई)। टमाटर, शिमला मिर्च, भारी बैंगन, तीखी हरी मिर्च, कच्चा लहसुन।
फल (Fruits) पके हुए मीठे सेब, पपीता, तरबूज, अनार, ताज़ा नारियल पानी। खट्टे फल (संतरा, नींबू), कच्चा आम, पैकेटबंद डिब्बाबंद जूस।
पेय पदार्थ (Beverages) सौंफ और धनिए का पानी, पुदीने की चाय, ठंडा दूध (अगर पचता हो)। कड़क कॉफी, शराब (बिल्कुल वर्जित), खट्टी छाछ, कोल्ड ड्रिंक्स।
मसाले और वसा जीरा, धनिया, और पेट के घाव भरने के लिए शुद्ध देसी गाय का घी। गरम मसाला, लाल मिर्च पाउडर, रिफाइंड तेल, डीप फ्राई चीज़ें।

पेट और दिमाग को रिपेयर करने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई जादुई रसायन दिए हैं, जो न केवल पेट की एसिडिटी को सोखते हैं बल्कि नर्वस सिस्टम की थकान को भी दूर करते हैं:

  • मुलेठी (Licorice): यह अल्सर के लिए एक महाऔषधि है। मुलेठी पेट की अंदरूनी सतह पर एक सुरक्षात्मक लेप बना देती है, जिससे एसिड का असर खत्म हो जाता है और घाव तेज़ी से भरते हैं।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): दिमाग से अल्सर पैदा करने वाले कॉर्टिसोल (तनाव हॉर्मोन) को जड़ से कम करने के लिए अश्वगंधा (Ashwagandha) नर्वस सिस्टम को ज़बरदस्त ताक़त देता है।
  • ब्राह्मी (Brahmi): विचारों के शोर और भयंकर एंग्जायटी को शांत करने के लिए ब्राह्मी (Brahmi) एक जादुई मेध्य टॉनिक है, जो बिना किसी नशे के अनिद्रा (Insomnia) को दूर करती है।
  • शतावरी (Shatavari): पित्त की भयंकर गर्मी को सोखने और पेट को अंदरूनी ठंडक व नमी देने के लिए शतावरी (Shatavari) एक बेहतरीन और सुरक्षित रसायन है।
  • गिलोय (Giloy): किसी भी तरह के स्ट्रेस इंड्यूस्ड इन्फ्लेमेशन (सूजन) को कम करने के लिए गिलोय (Giloy) इम्युनिटी को फौलादी बनाती है और टॉक्सिन्स बाहर निकालती है।

ब्रेन-गट एक्सिस को संतुलित करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब तनाव बहुत गहरा हो और अल्सर का दर्द बर्दाश्त से बाहर हो जाए, तो औषधियों के साथ पंचकर्म की ये बाहरी और आंतरिक थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • शिरोधारा (Shirodhara): माथे पर गुनगुने औषधीय तेल या काढ़े की लगातार धारा गिराने वाली शिरोधारा (Shirodhara) थेरेपी स्ट्रेस हॉर्मोन्स को पिघला देती है और दिमाग के रिलैक्स होते ही पेट का एसिड स्राव प्राकृतिक रूप से बंद हो जाता है।
  • अभ्यंग मालिश (Abhyanga): ठंडी तासीर वाले वात-शामक तेलों से की जाने वाली सौम्य अभ्यंग मालिश (Abhyanga Massage) पूरे नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करती है और शरीर की जकड़न तोड़ती है।
  • तक्रधारा (Takradhara): अगर भयंकर एसिडिटी और चिड़चिड़ापन रहता है, तो औषधीय छाछ से की जाने वाली तक्रधारा (Takradhara) नर्वस सिस्टम को तुरंत शीतलता प्रदान करती है।
  • विरेचन थेरेपी (Virechana): शरीर से पुराने पित्त और एसिड को बाहर निकालने के लिए विरेचन थेरेपी (Virechana treatment) की जाती है। यह आंतों को डिटॉक्स कर अल्सर की गर्मी को जड़ से मिटाती है।

अल्सर के घाव भरने और तनाव दूर होने में कितना समय लगता है?

सालों की खराब लाइफस्टाइल से जले हुए पेट और थके हुए नर्वस सिस्टम को दोबारा रिपेयर होने में एक अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 हफ्ते: सही आयुर्वेदिक डाइट (सौंफ-मुलेठी का पानी) और शीतवीर्य औषधियों के प्रयोग से पेट की भयंकर जलन, खट्टी डकारें और अत्यधिक पसीना काफी हद तक शांत होने लगेगा।
  • 1-2 महीने: जठराग्नि के सुधरने और ब्राह्मी जैसे रसायनों के प्रभाव से दिमाग का 'फाइट या फ्लाइट' मोड शांत होगा। आपका गुस्सा कम होगा और पेट के घाव (Ulcers) तेज़ी से भरने लगेंगे।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म (शिरोधारा और विरेचन) के नियमित प्रभाव से आपका 'ब्रेन-गट एक्सिस' पूरी तरह से रीसेट हो जाएगा। आप बिना किसी पेनकिलर या एंटासिड गोली के मानसिक शांति और एक स्वस्थ पाचन तंत्र का अनुभव करेंगे।

मरीज़ों का अनुभव

मेरा नाम रेखा कंवर है और मैं जयपुर, राजस्थान से हूँ। लगभग 4 साल पहले मुझे अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या हो गई थी, जिससे मैं बहुत परेशान रहने लगी थी और मेरी पूरी सेहत प्रभावित हो गई थी। मैंने एलोपैथिक दवाइयाँ भी लीं, लेकिन उनसे मुझे साइड इफेक्ट्स होने लगे। फिर एक दिन मैंने टीवी पर जीवा आयुर्वेद के बारे में देखा और वहाँ जाने का निर्णय लिया। हम जीवा क्लिनिक गए और वहाँ से उपचार शुरू किया। नियमित दवाइयों और सही मार्गदर्शन से आज मैं पूरी तरह ठीक महसूस करती हूँ। मैं जीवा आयुर्वेद का दिल से धन्यवाद करती हूँ।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

स्ट्रेस और अल्सर के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है:

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य एसिड रोकने के लिए PPIs (एंटासिड्स) और तनाव के लिए एंटी-डिप्रेसेंट गोलियाँ देना। जठराग्नि को संतुलित करना, 'ब्रेन-गट एक्सिस' को मेध्य रसायनों से रिपेयर करना और घाव भरना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे पेट की लाइनिंग छिलने और दिमाग के केमिकल इंबैलेंस की दो अलग-अलग समस्याएं मानना। इसे अग्निमांद्य, बिगड़े हुए वात-पित्त और 'मनोवहा स्रोतस' के विकार का एक संयुक्त सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल अक्सर केवल मिर्च कम करने को कहा जाता है, लेकिन मानसिक शांति और डाइट की तासीर पर कोई विशेष फोकस नहीं होता। खाने में 'पित्त शामक' आहार, ध्यान, शिरोधारा और तनाव मुक्त दिनचर्या पर गहरा ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर गोलियाँ छोड़ने पर अल्सर दोगुनी तेज़ी से वापस आ जाता है (Rebound Acidity), और नींद की गोलियों की लत लग जाती है। शरीर का नर्वस सिस्टम और पेट अंदर से इतना मज़बूत हो जाता है कि वह तनाव को प्राकृतिक रूप से सहना सीख जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस स्ट्रेस और अल्सर को पूरी तरह शांत कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी में जाना ज़रूरी हो जाता है:

  • भयंकर उल्टी में खून आना (Hematemesis): अगर आपको अचानक उल्टियाँ आएं और उसमें ताज़ा लाल खून या कॉफी के रंग जैसा गहरे भूरे रंग का खून दिखाई दे (यह अल्सर फटने का संकेत है)।
  • काले रंग का मल आना (Melena): अगर आपका मल अलकतरा (Tar) जैसा काला और बहुत बदबूदार आ रहा हो, जो पेट या आंतों में भयंकर इंटरनल ब्लीडिंग का संकेत है।
  • पेट में अचानक और असहनीय तेज़ दर्द: ऐसा दर्द जो पेट में छुरा घोंपने जैसा महसूस हो और व्यक्ति सीधे खड़े न हो पाए (यह पेट की दीवार फटने (Perforation) का लक्षण हो सकता है)।
  • चक्कर आना और बार-बार बेहोश होना: खून की भारी कमी (एनीमिया) और अल्सर ब्लीडिंग के कारण अगर शरीर में पसीना आए और चक्कर खाकर गिरने की नौबत आ जाए।

निष्कर्ष

अपने पेट की इस आग को केवल खराब खाने का नतीजा मानने की भूल न करें। आपका पेट आपके दिमाग का दूसरा हिस्सा (Second Brain) है। जब आपका दिमाग लगातार तनाव, डर और भविष्य की चिंताओं के बोझ तले दबता है, तो वह एसिड के रूप में आपकी आंतों को जलाने लगता है। रोज़ाना खाली पेट एंटासिड्स की गोलियाँ खाना और रात को नींद की गोलियाँ निगलना इस समस्या का समाधान नहीं है; यह सिर्फ एक टाइम-बम को टालने जैसा है।

अपने शरीर के इस 'ब्रेन-गट कनेक्शन' को समझें। अपने आहार में शुद्ध गाय का घी, मुलेठी और सौंफ को शामिल करें, जो आपके पेट के लिए अमृत हैं। अश्वगंधा और ब्राह्मी जैसी जादुई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की शक्ति को अपनाएं जो आपके भयंकर तनाव को पिघला सकती हैं। शिरोधारा थेरेपी से अपने दिमाग की नसों को नया जीवन दें। इन रसायनों की आजीवन निर्भरता को अपनी आदत न बनने दें, और अपने शरीर व दिमाग को प्राकृतिक रूप से फौलादी बनाने तथा इससे राहत पाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, बिल्कुल। जब आप लगातार ज़्यादा सोचते हैं या तनाव में रहते हैं, तो आपका शरीर भारी मात्रा में कॉर्टिसोल हॉर्मोन बनाता है। यह हॉर्मोन पेट में खून की सप्लाई कम कर देता है और एसिड का उत्पादन बढ़ा देता है, जिससे पेट की दीवारें छिलकर अल्सर बन सकती हैं।

सामान्य अल्सर (पेप्टिक अल्सर) आमतौर पर एच. पाइलोरी (H. pylori) बैक्टीरिया या पेनकिलर्स के कारण धीरे-धीरे बनता है। लेकिन स्ट्रेस अल्सर अचानक किसी बड़े ट्रॉमा, सर्जरी, या बहुत भयंकर मानसिक आघात के बाद रातों-रात पेट में उभर आते हैं।

दूध पीने से कुछ मिनटों के लिए पेट की जलन शांत महसूस होती है, लेकिन दूध में मौजूद प्रोटीन और फैट को पचाने के लिए पेट बाद में और भी ज़्यादा एसिड बनाता है। यह एसिड रिबाउंड (Acid rebound) अल्सर के दर्द को और भड़का सकता है।

आयुर्वेद में बर्फ का ठंडा पानी जठराग्नि को बुझाने वाला माना गया है। यह आंतों की नसों को सिकोड़ देता है और खून के बहाव को रोक देता है, जिससे अल्सर के घाव भरने की गति धीमी हो जाती है। जलन शांत करने के लिए हमेशा सौंफ या धनिए का पानी पिएं।

शत-प्रतिशत। चाय और कॉफी में कैफीन (Caffeine) होता है। कैफीन दिमाग को उत्तेजित कर तनाव और एंग्जायटी को बढ़ाता है, और साथ ही पेट में एसिड के स्राव को दुगना कर देता है। अल्सर के मरीज़ों को इनसे पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

मुलेठी आयुर्वेद में एक बेहतरीन पित्त-शामक (एसिडिटी कम करने वाली) और व्रण-रोपक (घाव भरने वाली) औषधि है। यह पेट की अंदरूनी परत पर एक सुरक्षात्मक म्यूकस की लेयर बना देती है, जिससे एसिड छिले हुए घावों को नहीं जला पाता और वे जल्दी भरते हैं।

जी हाँ। शिरोधारा सीधे आपके नर्वस सिस्टम को शांत करती है। जैसे ही दिमाग रिलैक्स होता है, वह पेट को सिग्नल भेजता है जिससे अत्यधिक पाचक पित्त (एसिड) का स्राव तुरंत प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है।

हाँ, इबुप्रोफेन या एस्पिरिन जैसी गोलियाँ (NSAIDs) पेट की परत को बचाने वाले प्रोस्टाग्लैंडिन्स (Prostaglandins) के निर्माण को रोक देती हैं। इसके लगातार इस्तेमाल से पेट की दीवारें कमज़ोर हो जाती हैं और आसानी से अल्सर का शिकार हो जाती हैं।

रात के समय पेट आमतौर पर खाली होता है, लेकिन एसिड का स्राव जारी रहता है। खाना न होने के कारण यह एसिड सीधा अल्सर के घावों से टकराता है। इसके अलावा, रात में वात और पित्त का प्राकृतिक प्रभाव भी पेट दर्द को बढ़ा देता है।

बिल्कुल। गहरी सांस लेने (प्राणायाम) और ध्यान से वेगस नर्व (Vagus nerve) उत्तेजित होती है। यह नस दिमाग से पेट को रिलैक्स होने का सिग्नल देती है, जिससे पाचन सुधरता है और स्ट्रेस हॉर्मोन्स का स्तर तेज़ी से नीचे गिर जाता है।

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