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गला में खराश और बार -बार Cough - क्या यह GERD है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह उठते ही गले में एक अजीब सी चुभन महसूस होना और दिन भर सूखी खाँसी का आना एक ऐसी समस्या है जिसे लोग अक्सर मौसम का बदलाव या प्रदूषण मान लेते हैं। आप हफ़्तों तक कफ सिरप पीते रहते हैं, गरारे करते हैं और एंटीबायोटिक्स खाते हैं, लेकिन गले का भारीपन और वो खराश टस से मस नहीं होती।

दरअसल, यह जिद्दी खाँसी और गले की जलन आपके फेफड़ों या मौसम की खराबी का नतीजा नहीं है, बल्कि इसका सीधा कनेक्शन आपके पेट से है। जब पेट का एसिड उल्टी दिशा में बहकर आपके गले की नाज़ुक परतों को जलाने लगता है, तो शरीर इस खामोश डैमेज को गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिसीज़ (GERD) के रूप में सामने लाता है।

गले की यह जिद्दी खराश और खाँसी पेट से कैसे जुड़ी होती हैं?

जब हम खाँसी या गले के दर्द के बारे में सोचते हैं, तो हमारा ध्यान सीधे रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट (Respiratory Tract) पर जाता है। लेकिन गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिसीज़ (GERD) के मामले में, यह खराश पूरी तरह से पाचन तंत्र की खराबी का नतीजा होती है। इसके पीछे ये शारीरिक गतिविधियाँ ज़िम्मेदार होती हैं:

  • लोअर इसोफेगल स्फिंक्टर (LES) का कमज़ोर होना: पेट और भोजन नली (Esophagus) के बीच एक वाल्व (Valve) होता है, जो खाना पेट में जाने के बाद बंद हो जाता है। जब आपकी खराब जीवनशैली के कारण यह वाल्व ढीला पड़ जाता है, तो पेट का तेज़ एसिड वापस गले की तरफ उछलने लगता है।
  • एसिड का माइक्रो-एस्पिरेशन (Micro-aspiration): रात को सोते समय जब एसिड गले तक पहुँचता है, तो उसके कुछ अतिसूक्ष्म कण साँस की नली (Windpipe) में चले जाते हैं। शरीर इसे बाहर निकालने के लिए एक रिफ्लेक्स एक्शन करता है, जो लगातार सूखी खाँसी का रूप ले लेता है।
  • वेगस नर्व (Vagus Nerve) का ट्रिगर होना: भोजन नली और फेफड़ों को एक ही मुख्य नस (Vagus Nerve) कंट्रोल करती है। जब एसिड भोजन नली में जलन पैदा करता है, तो यह नस ट्रिगर हो जाती है और दिमाग को लगता है कि फेफड़ों में कुछ फँस गया है, जिससे आपको बार-बार खाँसने की मजबूरी महसूस होती है।

एसिड रिफ्लक्स (GERD) आपको किन खतरनाक प्रकारों से तड़पा सकता है?

यह बीमारी केवल सीने की जलन तक सीमित नहीं रहती। एसिड के गले और भोजन नली में पहुँचने के पैटर्न के आधार पर, यह समस्या आपको इन अलग-अलग रूपों में अपना शिकार बना सकती है:

  • साइलेंट रिफ्लक्स (Laryngopharyngeal Reflux - LPR): यह सबसे खामोश और खतरनाक प्रकार है। इसमें आपको सीने में जलन (Heartburn) बिल्कुल नहीं होती, लेकिन पेट का एसिड सीधे आपके वॉयस बॉक्स (Larynx) और गले तक पहुँच जाता है। इसी कारण लोग इसे सिर्फ गले में खराश समझकर गलत इलाज करते रहते हैं।
  • इरोसिव इसोफेजाइटिस (Erosive Esophagitis): इसमें लगातार एसिड के हमले के कारण भोजन नली की अंदरूनी परत छिलने लगती है और वहां छाले (Ulcers) बन जाते हैं। खाना निगलते समय भयंकर दर्द होता है।
  • नॉन-इरोसिव रिफ्लक्स डिसीज़ (NERD): इस स्थिति में एंडोस्कोपी (Endoscopy) करने पर भोजन नली में कोई डैमेज या छाले नज़र नहीं आते, लेकिन मरीज़ को एसिडिटी, खाँसी और गले में जलन की भयंकर तकलीफ बनी रहती है।

शरीर के किन खामोश संकेतों से पहचानें कि यह खाँसी GERD का अलार्म है?

सामान्य खाँसी और एसिड रिफ्लक्स वाली खाँसी में बहुत बड़ा अंतर होता है। जब एसिड आपके गले को अंदर ही अंदर डैमेज कर रहा होता है, तो शरीर कुछ ऐसे खामोश अलार्म बजाता है जिन्हें कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए:

  • गले में हमेशा कुछ अटका हुआ महसूस होना (Globus Sensation): हर वक्त ऐसा लगना मानो गले में कोई गोली या कफ का गोला फँसा हुआ है, जो बार-बार थूक निगलने पर भी नीचे नहीं जाता।
  • सुबह के समय आवाज़ का बैठना (Morning Hoarseness): रात भर एसिड गले की नाज़ुक वोकल कॉर्ड्स (Vocal cords) को जलाता है, जिससे सुबह उठने पर आवाज़ भारी, फटी हुई और बैठी हुई महसूस होती है।
  • लेटते ही खाँसी का भयंकर रूप ले लेना: दिन भर आप ठीक रहते हैं, लेकिन रात को बिस्तर पर लेटते ही अचानक सूखी खाँसी का ऐसा दौरा पड़ता है कि नींद पूरी न होना एक रोज़ का संघर्ष बन जाता है।
  • अकारण खट्टी डकारें और मुँह का स्वाद बिगड़ना: खाना खाने के कुछ घंटों बाद मुँह में अचानक खट्टा या कड़वा पानी आ जाना, और दिन भर क्रोनिक फटीग व सुस्ती महसूस होना।

गले की खराश मिटाने के चक्कर में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

बार-बार खाँसने की झुंझलाहट और गले के दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए लोग अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो उनके पूरे मेटाबॉलिज़्म को अपाहिज कर देते हैं:

  • कफ सिरप का अंधाधुंध इस्तेमाल: लोग इसे फेफड़ों का कफ मानकर रोज़ाना कफ सिरप पीते रहते हैं। ये सिरप पेट के वाल्व (LES) को और ज़्यादा ढीला (Relax) कर देते हैं, जिससे एसिड रिफ्लक्स पहले से भी ज़्यादा भयंकर हो जाता है।
  • हेवी एंटीबायोटिक्स खाना: गले के इन्फेक्शन (Throat infection) के शक में लोग लगातार एंटीबायोटिक्स खाते हैं। ये दवाइयां पेट के गुड बैक्टीरिया (Gut flora) को मार देती हैं, जिससे एसिडिटी और बढ़ जाती है।
  • सोने के तरीके को नज़रअंदाज़ करना: भारी खाना खाने के तुरंत बाद बिल्कुल सीधे (Flat) लेट जाना। ग्रेविटी के बिना, पेट का एसिड सीधा गले में आ जाता है और वहां भयंकर डैमेज करता है।

आयुर्वेद इस एसिड रिफ्लक्स और गले की जलन को कैसे समझता है?

आधुनिक चिकित्सा जिसे केवल लोअर इसोफेगल स्फिंक्टर की कमज़ोरी मानती है, आयुर्वेद उसे शरीर में उर्ध्वग अम्लपित्त, दूषित समान वात और कमज़ोर जठराग्नि के भयंकर असंतुलन के रूप में गहराई से समझता है:

  • उर्ध्वग अम्लपित्त (Upward movement of Acidic Pitta): आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में पित्त (गर्मी) दूषित हो जाता है और वह नीचे की ओर जाने के बजाय ऊपर (उर्ध्व) गले की तरफ उछलता है, तो इसे उर्ध्वग अम्लपित्त कहते हैं। यही ऊपर उठता हुआ एसिड गले को जलाता है।
  • समान वात की विकृति: पेट में भोजन को सही दिशा में ले जाने का काम समान वात का होता है। लगातार कुर्सी पर बैठे रहने और मानसिक तनाव के कारण जब वात दोष भड़कता है, तो पाचन की प्राकृतिक गति (Peristalsis) उल्टी हो जाती है।
  • जठराग्नि का मंद होना और आम (Toxins): जब आपका कमज़ोर पाचन तंत्र भोजन को सही से नहीं पचा पाता, तो वह पेट में सड़कर एक विषैला और एसिडिक तत्त्व आम बनाता है। यही खट्टा आम गले में आकर छालों और खाँसी का कारण बनता है।

एसिड को शांत और गले को प्राकृतिक नमी देने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने प्रोसेसर को ठीक रखने और गले की जलन को बुझाने के लिए आपको अपनी आयुर्वेदिक डाइट में ऐसे ठंडे (शीत-वीर्य) और सुपाच्य पदार्थों को शामिल करना होगा जो एसिडिटी को प्राकृतिक रूप से सोख लें:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - एसिड को सोखने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - वाल्व को ढीला करने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, जौ (Barley), ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी। मैदा, वाइट ब्रेड, बासी रोटियां, पैकेटबंद नूडल्स।
पेय पदार्थ (Beverages) नारियल पानी, ठंडी छाछ (बिना खट्टी), सौंफ का पानी, ताज़ा गन्ने का रस। डार्क कॉफी, स्ट्रॉन्ग चाय, शराब, कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक्स।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (भोजन नली की सूजन के लिए सबसे बड़ा अमृत)। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा डीप-फ्राइड चीज़ें, बाज़ार के ट्रांस फैट।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, परवल, कद्दू, पालक (सभी कम मसाले में पकी हुई)। कच्चा प्याज, भारी कटहल, खट्टे टमाटर, तीखी लाल मिर्च।
फल (Fruits) पपीता, उबला हुआ सेब (Stewed Apple), मीठे अनार, तरबूज़। खट्टे फल (संतरा, कच्चा नींबू), पाइनएप्पल।

पेट की गर्मी और गले की खराश दूर करने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे रसायन दिए हैं जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के एसिडिटी को जड़ से खत्म करते हैं और गले की जली हुई नसों को प्राकृतिक ताक़त देते हैं:

  • धनिया: जब एसिड के कारण गले में भयंकर चुभन और पेट में आग लगी हो, तो धनिए का पानी (रात भर भिगोकर सुबह छाना हुआ) एक प्राकृतिक कूलेंट (Coolant) की तरह काम करता है। यह पित्त को तुरंत शांत करता है।
  • गिलोय: शरीर से भयंकर एसिडिक टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और सूजन (Inflammation) को खत्म करने के लिए गिलोय एक जादुई रसायन है। यह इम्यूनिटी को बढ़ाता है और गले के इन्फेक्शन को रोकता है।
  • शतावरी: एसिड रिफ्लक्स से जब भोजन नली और गले की परतें बुरी तरह छिल जाती हैं, तो शतावरी अपने स्निग्ध (Lubricating) गुणों से वहां प्राकृतिक नमी लौटाती है और छालों को तेज़ी से भरती है।
  • त्रिफला: यह केवल कब्ज़ की दवा नहीं है। जब पेट साफ नहीं होता तो एसिड ऊपर की तरफ उछलता है। त्रिफला शरीर के मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करता है और आंतों से सड़े हुए आम को खुरच कर बाहर निकाल देता है।

एसिडिटी और वात को जड़ से खत्म करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और भयंकर पित्त शरीर में गहराई तक जम चुका हो और केवल सिरप या डाइट से आराम न मिल रहा हो, तो पंचकर्म की ये क्लासिकल थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • विरेचन थेरेपी: यह उर्ध्वग अम्लपित्त (GERD) का सबसे अचूक और शक्तिशाली इलाज है। इसमें औषधीय जड़ी-बूटियों के ज़रिए शरीर में जमे हुए भयंकर एसिड और दूषित पित्त को मल के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे एसिड का गले तक उछलना जड़ से खत्म हो जाता है।
  • शिरोधारा थेरेपी: कई लोगों में एसिडिटी का मुख्य कारण भयंकर स्ट्रेस और अकारण एंग्जायटी होता है, जो वेगस नर्व को ट्रिगर करता है। सिर पर गुनगुने औषधीय तेल की लगातार धार गिराने से नर्वस सिस्टम तुरंत रिलैक्स होता है।
  • अभ्यंग मालिश: वात दोष को शांत करने और पाचन की प्राकृतिक गति (Peristalsis) को सुधारने के लिए शुद्ध औषधीय तेलों से पेट और पूरे शरीर की डीप-टिशू मालिश की जाती है।

पाचन तंत्र के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

सालों की गलत लाइफस्टाइल से डैमेज हुए वाल्व (LES) और छिल चुके गले को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पित्त-नाशक डाइट से आपका एसिड बनना कंट्रोल होगा। मुँह में खट्टा पानी आना रुकेगा और रात को लेटते ही शुरू होने वाली सूखी खाँसी में गज़ब की राहत मिलेगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म (विरेचन) और रसायनों के प्रभाव से भोजन नली की डैमेज लाइनिंग (Mucosa) हील होने लगेगी। गले में हमेशा कुछ अटके होने का एहसास (Globus) पूरी तरह गायब हो जाएगा।
  • 5-6 महीने: आपकी जठराग्नि और मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह से रिपेयर हो जाएगा। आप बिना किसी एंटासिड (Antacid) गोली के सहारे, एक प्राकृतिक, स्वस्थ और सुकून भरी नींद का अनुभव करेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

एसिड रिफ्लक्स और उससे जुड़ी खाँसी के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य एसिड बनने से रोकने के लिए प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर्स (PPIs) या एंटासिड देना। जठराग्नि को मज़बूत करना, पित्त को शांत करना और 'विरेचन' द्वारा प्राकृतिक रूप से पेट को डिटॉक्स करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल एक यांत्रिक (Mechanical) वाल्व की कमज़ोरी और अत्यधिक एसिड की समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए समान वात और दूषित पित्त का एक संपूर्ण सिंड्रोम (Syndrome) मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल केवल चाय/कॉफी छोड़ने और तकिया ऊँचा करके सोने की आम सलाह दी जाती है। डाइट में 'पित्त-नाशक' भोजन, शुद्ध गाय का घी, और अग्नि को सुधारने के लिए सही समय पर खाने पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर गोलियाँ छोड़ने पर रिबाउंड एसिडिटी (Rebound acidity) होती है और एसिड दोगुनी तेज़ी से बनता है। शरीर का मेटाबॉलिज़्म और वाल्व (LES) अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि एसिड का उलटा बहाव प्राकृतिक रूप से बंद हो जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

अगर आपको अपनी खाँसी या शरीर में ये भयंकर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी में जाना ज़रूरी हो जाता है:

  • खाना निगलने में भयंकर दर्द (Dysphagia): अगर भोजन का एक निवाला भी निगलते समय ऐसा लगे कि वह सीने में फँस गया है और अंदर भयंकर दर्द हो (यह इसोफेगल स्ट्रिक्चर या कैंसर का संकेत हो सकता है)।
  • उल्टी में खून आना (Hematemesis): अगर लगातार खाँसी या एसिडिटी के कारण आपको उल्टी हो और उसमें लाल खून या कॉफी के रंग जैसा डार्क पदार्थ दिखाई दे।
  • बिना कोशिश के वज़न का तेज़ी से गिरना: अगर खाँसी और गले की जलन के साथ-साथ आपका वज़न अचानक से कई किलो गिर जाए, जिससे भयंकर कमज़ोरी आ जाए।
  • रात को साँस रुकने का एहसास (Choking): अगर एसिड फेफड़ों में इस कदर घुस जाए कि आप आधी रात को अचानक साँस उखड़ने और दम घुटने (Choking) के कारण तड़प कर उठ जाएं।

निष्कर्ष

अपने पाचन तंत्र और भोजन नली को एक वन-वे (One-way) सड़क की तरह समझें। जब आप भारी भोजन करने के बाद तुरंत लेट जाते हैं या अत्यधिक तनाव में रहते हैं, तो यह सड़क अपना नियम भूल जाती है और पेट का खतरनाक एसिड गलत दिशा में गले की तरफ दौड़ने लगता है। सुबह उठते ही आवाज़ का बैठना, हर वक्त गले में कुछ अटका महसूस होना और रात को सूखी खाँसी का भयंकर दौरा पड़ना, ये कोई साधारण रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन नहीं है; यह एक अलार्म है कि आपका समान वात ब्लॉक हो चुका है और एसिड आपकी भोजन नली की नाज़ुक परतों को अंदर ही अंदर जला रहा है। केवल कफ सिरप पीकर या खाली पेट एंटासिड (Antacid) की गोली खाकर इस भयंकर उर्ध्वग अम्लपित्त को टालने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपके मेटाबॉलिज़्म को हमेशा के लिए अपाहिज कर रहा है।

कफ सिरप की लत और सीने की जलन के इस खौफनाक चक्रव्यूह से बाहर निकलें। बाहर के तीखे जंक फूड और लेट-नाइट डिनर को छोड़कर हमेशा हल्का, सुपाच्य और शुद्ध गाय के घी से बना भोजन खाएं। अपनी डाइट में जौ, लौकी और धनिए का पानी शामिल करें। गिलोय, शतावरी और त्रिफला जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की विरेचन व शिरोधारा थेरेपी से अपने बिगड़े हुए पाचन और अशांत नर्वस सिस्टम को प्राकृतिक सफाई देकर नया जीवन दें। GERD और इस जिद्दी खाँसी को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा न बनने दें, आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल। इसे गैस्ट्रिक अस्थमा (Gastric Asthma) भी कहा जाता है। जब पेट का एसिड माइक्रो-एस्पिरेशन (Micro-aspiration) के ज़रिए फेफड़ों की श्वास नली में चला जाता है, तो वह वहां की नसों को इरिटेट कर देता है, जिससे बिल्कुल अस्थमा जैसी सीटी की आवाज़ (Wheezing) और भयंकर साँस फूलने की समस्या होने लगती है।

ठंडा दूध एसिडिटी को कुछ देर के लिए शांत कर सकता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार रात के समय दूध पीने से कफ बढ़ता है। अगर दूध पच नहीं पाता, तो यह पेट में जाकर आम (Toxins) बनाता है, जो एसिड के साथ मिलकर रात में गले में वापस उछलता है और भयंकर खाँसी पैदा करता है।

हाँ, मेडिकल साइंस और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि बायीं करवट सोने (Vamkushi) से पेट का आकार और ग्रेविटी इस तरह काम करती है कि एसिड नीचे की तरफ (Intestines में) रहता है और वाल्व (LES) से टकराकर गले में वापस नहीं आता।

शत-प्रतिशत। चाय और कॉफी में कैफीन होता है, जो पेट और भोजन नली के वाल्व (LES) को तुरंत ढीला कर देता है। खाली पेट इसे पीने से एसिड का निर्माण तेज़ी से होता है, जो सीधा गले में जाकर साइलेंट रिफ्लक्स (LPR) और खाँसी पैदा करता है।

इसे साइलेंट रिफ्लक्स (LPR) कहते हैं। इसमें एसिड भोजन नली में ज़्यादा देर नहीं रुकता, बल्कि सीधे गले (Throat) और वॉयस बॉक्स पर हमला करता है। इसलिए व्यक्ति को सीने में जलन नहीं होती, लेकिन आवाज़ बैठना और गले में खराश हमेशा बनी रहती है।

मिंट पेट को ठंडक देता है, लेकिन GERD के मरीज़ों के लिए यह खतरनाक हो सकता है। पिपरमिंट वाल्व (LES) की मांसपेशियों को बहुत ज़्यादा रिलैक्स (Relax) कर देता है, जिससे पेट का एसिड आसानी से ऊपर की तरफ आ जाता है।

हाँ, खाना खाने के बाद (नॉन-मिंट) चुइंगम चबाने से मुँह में लार (Saliva) ज़्यादा बनती है। लार प्राकृतिक रूप से एल्कलाइन (Alkaline) होती है, जो गले और भोजन नली में मौजूद एसिड को न्यूट्रलाइज़ (Neutralize) करके नीचे पेट में वापस धकेल देती है।

बिल्कुल। जब आप अत्यधिक तनाव में होते हैं, तो शरीर फाइट या फ्लाइट मोड में आ जाता है। इससे पाचन धीमा हो जाता है, पेट ज़्यादा एसिड बनाता है, और नर्वस सिस्टम भोजन नली की नसों को अति-संवेदनशील बना देता है, जिससे हल्की सी जलन भी भयंकर खाँसी में बदल जाती है।

दिन में थोड़ा-थोड़ा पानी पीना अच्छा है, लेकिन खाना खाने के तुरंत बाद या एक साथ लीटरों पानी पीने से पेट फूल (Distend) जाता है। यह फूला हुआ पेट वाल्व (LES) पर ऊपर की तरफ भयंकर दबाव डालता है, जिससे पानी के साथ-साथ एसिड भी गले में आ जाता है।

एल्कलाइन डाइट (जैसे लौकी, खीरा, नारियल पानी) एसिड को शांत करने में बहुत मददगार है। लेकिन अगर आपका वाल्व (LES) कमज़ोर है और जठराग्नि खराब है, तो केवल डाइट से स्थायी समाधान नहीं मिलेगा। आयुर्वेद की औषधियां (विरेचन आदि) वाल्व और पाचन को अंदर से रिपेयर करके इसे जड़ से खत्म करती हैं।

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